प्रस्तुत पंक्तियाँ उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार स्वर्गीय श्री चारु चंद्र चंदोला जी की हैं।
Burushi Ko Kumkum Maro
घरवाइ जी रौ बरस हजारा।

प्रस्तुत पंक्तियाँ उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार स्वर्गीय श्री चारु चंद्र चंदोला जी की हैं।
घरवाइ जी रौ बरस हजारा।
विनोद सिंह गढ़िया इस वेब पोर्टल के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। करीब 15 वर्षों से विभिन्न वेब पोर्टलों के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।