प्रस्तुत पंक्तियाँ उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार स्वर्गीय श्री चारु चंद्र चंदोला जी की हैं।
Burushi Ko Kumkum Maro
घरवाइ जी रौ बरस हजारा।
प्रस्तुत पंक्तियाँ उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार स्वर्गीय श्री चारु चंद्र चंदोला जी की हैं।
घरवाइ जी रौ बरस हजारा।
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