होली के अवसर पर अपने मेहमानों को पकौड़े, चिप्स आदि तली चीजों को खिलाकर बोर हो गए हैं तो इस बार आप कुछ नया खिलाने की सोचिये। जिसमें न तो अधिक तेल की आवश्यकता होती है और न ही मसालों की। यह है शान पहाड़ों की, जो ‘आलू के गुटके’ के नाम से बड़ी प्रसिद्ध है। अपने लजीज और चटपटे स्वाद के कारण हर आयु वर्ग के लोगों को यह बेहद पसंद आती है। साधारण सा दिखने वाला यह व्यंजन अपने अनोखे मसाले और पहाड़ी अंदाज के कारण बेहद खास बन जाता है।
आलू के गुटके, पहाड़ी आलू से तैयार किये जाते हैं। कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा में गुटके का मतलब होता है छोटे-छोटे टुकड़े। यानी उबले हुए आलू के मसालेदार टुकड़े, जिन्हें सरसों के तेल और जखिया के तड़के में भुना जाता है और बनता है एक ख़ास चपटेदार व्यंजन।
आज यहाँ हम आपको पहाड़ी अंदाज में बनने वाली ‘आलू के गुटके’ की एक खास रेसिपी बताएँगे , जो बेहद साधारण और आसान है लेकिन अंत में जो आपको तैयार होकर मिलेगी, उसके सभी दीवाने हो जायेंगे। आईये जानते हैं –
आलू के गुटके की खासियत
- कम मसाले, लेकिन भरपूर स्वाद।
- सरसों के तेल और जखिया का देसी तड़का।
- तीखापन और खट्टापन का संतुलन।
- स्नैक्स के रूप में बेहद लोकप्रिय।
सामग्री (4 लोगों के लिए)
- 5-6 मध्यम आकार के उबले आलू
- 2-3 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई )
- 2-3 पहाड़ी लाल मिर्च
- 1 छोटा चम्मच जखिया (पहाड़ी मसाला)
- 1/2 छोटा चम्मच जीरा
- 1/2 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
- 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
- स्वादानुसार नमक
- 1 बड़ा चम्मच धनिया पाउडर
- 2 बड़े चम्मच सरसों का तेल
- 1/2 छोटा चम्मच अमचूर पाउडर या नींबू रस
- हरा धनिया (सजाने के लिए)
बनाने की विधि
सर्वप्रथम माध्यम आकार के पहाड़ी आलू को धोकर उबालें। तत्पश्चात हल्का ठंडा होने पर छील लें और एक आलू को बीच से काटकर इसके करीब 12 टुकड़े कर लें। उसके बाद लोहे की कढ़ाई में सरसों का तेल गर्म होने के लिए रखें। गर्म हो जाने के बाद इसमें लाल मिर्च भून लें और काले हो जाने पर निकाल लें।
फिर गर्म तेल में जीरा चटका लें और फिर जखिया के बीज भी डालें। उसके बाद कटी हरी मिर्च डाल दें। हल्का भूरा रंग आने पर बारी-बारी सभी मसाले मिला दें। थोड़ा भूनने के बाद सभी कटे हुए आलू कढ़ाई में डालें और मसालों के साथ मिलाएं। इस बीच अपने स्वाद के अनुसार नमक डालें ।
आलू के गुटके माध्यम आंच में भूनते रहें। करीब 8 से 10 मिनट बाद आलू में हल्का गोल्डन रंग आने लगता और वे कुरकुरे होने लगते हैं। इस बीच भुने हुए लाल मिर्चों को तोड़ कर कढ़ाई में डाल दें और मिलाने के बाद गैस बंद कर दें।
अब आलू के गुटके में थोड़ा सा नींबू का रस या अमचूर पाउडर डाल दें और चलाते हुए अच्छी तरह से आलू के गुटके में मिला दें। अंत में हरा धनियां काटकर ऊपर से गार्निश करें। बस अब गर्मागर्म आलू के गुटके परोसने के लिए तैयार हैं। ध्यान रहे आलू के गुटके का स्वाद लेना है तो गर्मागर्म ही लें।
कुछ खास टिप्स
- जखिया न हो तो राई का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन असली पहाड़ी स्वाद जखिया से ही आता है।
- सरसों के तेल की जगह रिफाइंड तेल न लें क्योंकि इस तेल से स्वाद बदल जाएगा।
- आलू को देर तक भूनें, यही इसको खास बनाता है।
क्यों खास हैं आलू के गुटके?
यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि पहाड़ की सादगी और अपनेपन का स्वाद भी है। न अधिक तेल, न अधिक मसाले, झटपट तैयार होने वाले इस चटपटे व्यंजन को लोग बड़े चाव से खाते हैं। कोई मेला हो या ख़ास दिन अथवा ढाबे-रेस्टोरेंट, यहाँ आपको अवश्य खाने को मिल जाते हैं आलू के गुटके। जिसके हर कोई दीवाने होते हैं।
अगर आप भी होली में अपने मेहमानों को पहाड़ का स्वाद चखाना चाहते हैं, तो इस आसान रेसिपी से “आलू के गुटके” अवश्य बनाइए और परिवार, मित्रों , मेहमानों के साथ इसका आनंद लीजिए।





