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Kumaoni Holi

कुमाऊं में होली गीतों का इतिहास सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा से शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि उस्ताद अमानत हुसैन नामक एक मुस्लिम कलाकार को कुमाऊं की होली का जनक माना जाता है। कुमाऊं में होली गीतों का प्रचलन बृज के लोगों द्वारा हुआ। यही कारण है कि कुमाऊंनी होली में बृज का पुट है। बृज भूमि का इतिहास भगवान राधा-कृष्ण से जुड़ा है। इसी कारण अधिकांश होली गीतों में राधा-कृष्ण के प्रणय प्रसंगों का वर्णन है। बृज के बाद कुमाऊं अंचल में होली का उत्सव कई दिनों तक मनाया जाता है।

समूचे देश में बृज के बाद उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में होली का उत्सव कई दिनों तक मनाया जाता है। पहाड़ में करीब तीन माह पहले पौष से ही होली की बैठकें शुरू हो जाती हैं। शिवरात्रि के बाद होली अधिक जमने लगती है और एकादशी के दिन रंग की शुरूआत होते ही लोग पूरे रंग में आ जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में खड़ी होली का आकर्षण अधिक है। लोग घर-घर जाकर होली का गायन करते हैं। इन दिनों गांव में बच्चे, बूढ़े, युवक-युवतियां सभी कलाकार के रूप में होली गाते और नृत्य करते नजर आते हैं। कुमाऊं की सबसे प्राचीन नगरी अल्मोड़ा को सांस्कृतिक नगर के रूप में भी जाना जाता है। कुमाऊंनी होली और संस्कृति के जानकारों का कहना है कि कुमाऊं में होली गीतों का इतिहास अल्मोड़ा से ही शुरू हुआ। उसके बाद नैनीताल, पिथौरागढ़, रानीखेत आदि स्थानों में होली की बैठकें होने लगीं। हुक्का क्लब के सचिव और वरिष्ठ रंगकर्मी शिवचरण पांडे के मुताबिक उस्ताद अमानत हुसैन नामक एक मुस्लिम कलाकार को कुमाऊं की होली का जनक माना जाता है। जानकारी के अनुसार उन्होंने ही यहां जगह-जगह जाकर होली गीत प्रस्तुत किए।

कुमाऊं में होली गीतों का प्रचलन बृज के लोगों ने किया। सैकड़ों साल पहले जब मनोरंजन के साधन नहीं थे तब रामलीला और नौटंकी में निपुण बृज के कलाकार यहां आते थे और एक दो माह यहां रहकर लोगों का मनोरंजन करते थे। इन्हीं लोगों के माध्यम से बृज के गीतों का यहां हस्तांतरण हुआ। यही कारण है कि कुमाऊंनी होली में बृज का पुट है। उल्लेखनीय है कि बृज भूमि का इतिहास भगवान राधा-कृष्ण से जुड़ा है। इसी कारण अधिकांश होली गीतों में राधा-कृष्ण के प्रणय प्रसंगों का वर्णन है। कुमाऊं में प्रचलित होली मुख्यतया शास्त्रीय संगीत पर आधारित है। शास्त्रीय रागों पर आधारित होने के बावजूद होली गाने के लिए कोई शास्त्रीय बंधन नहीं होता।



कुमाऊं में बृज के लोगों ने किया होली गीतों का हस्तांतरण-

वरिष्ठ रंगकर्मी शिवचरण पांडे के मुताबिक उस्ताद अमानत हुसैन रामपुर से अल्मोड़ा आए थे। वह किस संगीत घराने से जुड़े थे अथवा नहीं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है लेकिन यह माना जाता है कि वह 1860 से 70 के आसपास अल्मोड़ा में आए और यहां रहकर संगीत के क्षेत्र में काफी काम किया।


गर्ग संहिता में है राधा-कृष्ण की होली का वर्णन-

भगवान कृष्ण के होली खेलने का वर्णन गर्ग संहिता में मिलता है। गर्ग संहिता में होली के दृश्य का सुंदर वर्णन है। इसमें बताया गया है कि राधा के नेतृत्व में गोप कन्याओं ने श्रीकृष्ण को घेर लिया। होली के गीत गाती, हंसी-ठिठोली करतीं इन कन्याओं ने धरती और आकाश को रंगों से भर दिया। यह भी वर्णन है कि श्रीकृष्ण के मुख को रंग से लेपती, अबीर गुलाल बरसाती उन बालाओं ने उन्हें रंग भरी पिचकारियों से खूब भिगो दिया। लगता है उन्नीसवीं शताब्दी अथवा उससे पहले कभी श्रीकृष्ण को रंगोत्सव का नायक बनाया गया और राधा को नायिका। यह माना जाता है कि आज भी बृज का युवक श्रीकृष्ण का प्रतिनिधि बनकर होली खेलने अपने प्रेयसी के द्वार पहुंचता है।


लेख : वरिष्ठ पत्रकार स्व० श्री दीप जोशी। 

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