उत्तराखंड के कुमाऊँ में होली गायन की परम्परा सबसे विशिष्ट है। यहाँ होली गायन पौष माह के पहले रविवार से प्रारम्भ हो जाती है। जिसे बैठकी होली कहा जाता है। इस बैठकी होली में शास्त्रीय रागों पर आधारित जिसमें भक्तिपरक होलियां गाई होती हैं। यह सिलसिला पौष माह से बसंत पंचमी -शिवरात्रि तक चलता है।
कुमाऊँ में खड़ी होली गाने की शुरुआत एकादशी से होती है। इसी दिन गांव के एक निर्धारित स्थान जिसे ‘होली का अखाड़ा’ भी कहा जाता है, पर चीर बंधन होता है। चीर को घुमाते हुए लय और ताल के साथ खड़ी होली का गायन होता है। कुमाऊँ की प्रसिद्ध एक खड़ी होली इस प्रकार है –
झुकी (जोगी) आयो शहर से ब्यौपारी।
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी,
हे झुकी आयो शहर से ब्यौपारी।
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी,
हे झुकी आयो शहर से ब्यौपारी।
इस ब्यौपारी को भूख बहुत है
हे इस ब्यौपारीको भूख बहुत है
इस ब्यौपारी को भूख बहुत है
हे इस ब्यौपारी को भूख बहुत है
पूरियाँ पकाई दे नथ वाली …..
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी
पूरियाँ पकाई दे नथ वाली …..
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी।
आहा इस ब्यौपारी को प्यास बहुत है
हे इस ब्यौपारी को प्यास बहुत है
आहा इस ब्यौपारी को प्यास बहुत है
हे इस ब्यौपारी को प्यास बहुत है
पनिया पिलाई दे नथ वाली….
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी
पनिया पिलाई दे नथ वाली….
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी,
झुकी आयो शहर से ब्यौपारी
आहा इस ब्यौपारी को नींद बहुत है,
हे इस ब्यौपारी को नींद बहुत है
आहा इस ब्यौपारी को नींद बहुत है
हे इस ब्यौपारी को नींद बहुत है
पलंग बिछा दे नथ वाली…..
झुकी आयो शहर से ब्योपारी
पलंग बिछा दे नथ वाली…..
झुकी आयो शहर से ब्योपारी
झुकी आयो शहर से ब्योपारी,
झुकी आयो शहर से ब्योपारी।
Kumaoni Holi Song PDF : कुमाऊनी होली गीतों का पीडीऍफ़ आप इस लिंक में प्राप्त कर सकते हैं। जिसमें करीब 48 पृष्ठ हैं।
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