स्वर्ग तारा जुन्याली रात के बोल एवं हिंदी में भावार्थ।

सरग तारा जुन्याली रात को सुण लो तेरी मेरी बात-उत्तराखंड का एक प्राचीन लोकप्रिय और सदाबहार लोकगीत है। जो आज भी कुमाऊँ और गढ़वाल में गाया और सुना जाता है। इस पोस्ट में गीत के लिरिक्स और भावार्थ प्रस्तुत हैं जिससे आपको इस गीत के अर्थ को समझने में सहूलियत होगी।

Swarg Tara Junyali Raat lyrics

Swarg Tara Junyali Raat : दशकों से उत्तराखंड के मधुर गीतों में शामिल होकर जन-जन का लोकप्रिय गीत ‘स्वर्ग तारा जुन्याली रात, को सुणलो यो मेरी बात’ एक प्रेमगीत है। जिसमें नायक अपनी नायिका की तुलना सरग यानी आसमान (स्वर्ग) के तारे से कर रहा है। वह कहता है – ‘स्वर्ग की तारा यानी स्वर्ग के तारे जैसी सुन्दर, इस जुन्याली अर्थात चांदनी रात में मेरी बात कौन सुनेगा ?’

Swarg Tara Junyali Raat lyrics

सरग तारा, सरग तारा जुन्याली रात,
को सुण लो ओई-होई यो मेरी बाता,
सरग तारा …….
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण लो मेरी बाता,

(स्वर्ग की तारा, इस जुन्याली (चांदनी) रात में मेरी बात कौन सुनेगा ?)

सरग तारा भौत हुनी, उज्याल ज्यूनी कौ,
सरग तारा भौत हुनी, उज्याल ज्यूनी कौ,
दिन – दिन, रात-रात ध्यान छौ उनी कौ
सरग तारा, सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात
(स्वर्ग में बहुत से तारे होते हैं , लेकिन प्रकाश ज्यूनी यानी चन्द्रमा का ही होता है। )

नाक में की फुली सुवा, नाक में की फुली,
तराजु में तोली द्युलो, कैकी माया ठूली।
तराजु में तोली द्युलो, कैकी माया ठूली।
सरग तारा, सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात.
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात.
(नाक में फुली – नाम की पिन। तोली द्युलो- तोल दूंगा। कैकी माया ठुली – किसका प्यार-स्नेह बड़ा यानी ज्यादा। )

धमेली क फुना सुवा, धमेली क फुना सुवा,
धमेली क फुना सुवा, धमेली क फुना सुवा,
तेरी पड़ी ग्ये छ माया, हाई अनाधुना
तेरी पड़ी ग्ये छ माया, हाई अनाधुना
सरग तारा
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ यो हमरी बात
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात।

(धमेली क फुन-महिलाओं द्वारा सिर में श्रृंगार के लिए लगाया जाने वाला धागे का रंगीन गुच्छा। )

Swarg Tara lyrics translation

नथुली क चैन सुवा, नथुली क चैन सुवा,
नथुली क चैन सुवा, नथुली क चैन सुवा,
त्वील मेरी भूख तोड़ी, तोड़ी है छ नीन
त्वील मेरी भूख तोड़ी, तोड़ी है छ नीन
सरग तारा
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ यो हमरी बात
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात।

(सुवा-कुमाऊँ और गढ़वाल में प्रेयसी और प्रेमी के लिए ‘सुवा’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ सुवा तोते को भी कहा जाता है। )

फर-फर उड़न ऐ जा, ओ राजा की राणी,
फर-फर उड़न ऐ जा, ओ राजा की राणी,
न कर, न कर भागी, तू मेरी निखाणी,
न कर, न कर भागी, तू मेरी निखाणी,
सरग तारा
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ यो हमरी बात
सरग तारा जुन्याली रात, को सुण छ तेरी मेरी बात।

( ऐ जा – आ जाओ। भागी – भाग्यवान। निखाणी – खाने के वंचित कर देना। )

स्वर्ग तारा गीत में यह लिरिक्स भी हैं :
स्वर्ग तारा, स्वर्ग तारा जुन्याली रात,
को सुण लो यो मेरी बाता।
स्वर्ग तारा ……

ताल गाड़ा में धणियां बोयो, माल गाड़ा में राया
चिठी में जवाब द्यूलो, बाटुली में माया।
स्वर्ग तारा, स्वर्ग तारा जुन्याली रात,
को सुण लो यो मेरी बाता।
स्वर्ग तारा ……

(नीचे वाले खेत में धनिया बोया है और ऊपर वाले खेत में राई, चिट्ठी में जवाब दूंगा और बाटुली (हिचकी) में प्यार।)

लखटिया गुड़ सुवा, लखटिया गुड़
कैकी भैच दैल फ़ैल, कैकी पट रूढ़।
लखटिया गुड़ सुवा, लखटिया गुड़
कैकी भैच दैल फ़ैल, कैकी पट रूढ़।
स्वर्ग तारा, स्वर्ग तारा जुन्याली रात,
को सुण लो यो मेरी बाता।
स्वर्ग तारा ……

(लखटिया गुड़-एक विशेष प्रकार का गुड़, जिसकी भेली को बहुत बल लगाकर तोड़ा जाता है और यह गुड़ स्वादिष्ट होता है। कैकी भैच दैल फ़ैल, कैकी पट रूढ़-किसी के लिए उपलब्धता इफरात (प्रचुरमात्रा) हुई और किसी के लिए रूढ़ पड़ा यानी सूखा अर्थात कुछ प्राप्त नहीं हुआ।)

क्याल खाया, नारींग खाया ,क्या करुं खाया लै,
ढीठ पड़ी भेट ना हुनी, क्या करुं माया लै।
स्वर्ग तारा, स्वर्ग तारा जुन्याली रात,
को सुण लो यो मेरी बाता।
स्वर्ग तारा ……

(केले खाये, नारंगी खाये लेकिन इन्हें खाकर क्या करूँ। क्योंकि तुम दिखते हो मगर मुलाकात नहीं होती है, सिर्फ प्यार से क्यां करूँ।)

धोती धोयो, धाम हालो, चाकली पाट में,
रुंनी सुवा छोड़ि आयुं, अकेली खाट में।
स्वर्ग तारा, स्वर्ग तारा जुन्याली रात,
को सुण लो यो मेरी बाता।
स्वर्ग तारा ……

(धोती धोकर चौड़े पटाल पर धूप में सुखाने डाला। रोटी हुई प्रेयसी को अकेला खाट पर छोड़कर आया।)

यह थे उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगीत ‘स्वर्ग तारा जुन्याली रात’ के बोल। भावी पीढ़ी को अपने लोकगीत और उसके भाव को पहुंचाने के उद्देश्य से इस पोस्ट को तैयार किया गया है। जिसमें कठिन कुमाउनी शब्दों के हिंदी में अर्थ बताने की कोशिश की है। उम्मीद है नयी पीढ़ी के लिए यह छोटा सा प्रयास मददगार होगा।

Vinod Singh Gariya

ई-कुमाऊँ डॉट कॉम के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। इस पोर्टल के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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