आज के आधुनिक युग में शिक्षा धीरे-धीरे सिर्फ डिग्रियों व कॉरपोरेट करियर तक सिमटती जा रही है, वहीं विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान एक ऐसी संस्था के रूप में वटवृक्ष की भांति खड़ी है, जो आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ प्राचीन भारतीय मूल्यों एवं संस्कारों का संतुलित समन्वय कर रही है। भारत के सबसे बड़े निजी गैर-सरकारी शैक्षिक संगठनों में से एक, विद्या भारती का उद्देश्य केवल साक्षरता नहीं, बल्कि ‘सांस्कृतिक पुनरुत्थान’ है। यह संस्था “सा विद्या या विमुक्तये” के मंत्र के साथ भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ बनाने की दिशा में प्रयासरत है।
विद्या भारती हर वर्ष नए सत्र के लिए एक वार्षिक गीत जारी करती है। वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक गीत ‘भारत की पावन माटी का तिलक लगाते हैं‘ प्राथमिक वर्ग एवं ‘राष्ट्र सेवा हित समर्पित, हम करें सर्वस्व अर्पण‘ माध्यमिक वर्ग के भैया-बहनों के लिए चुना गया है। राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत ये दोनों गीत संस्था द्वारा देश में संचालित सभी विद्या के मंदिरों में गाया जा रहा है।
विद्या भारती वार्षिक गीत 2026-27 लिरिक्स
इस पोस्ट में पढ़ें विद्या भारती वार्षिक गीत के लिरिक्स, जो सत्र 2026-27 के लिए हैं। यहाँ आपके लिए प्राथमिक और माध्यमिक दोनों कक्षाओं के लिये जारी गीत के लिरिक्स प्रस्तुत हैं, साथ ही आप इन दोनों गीतों के ऑडियो भी सुन सकते हैं।
भारत की पावन माटी का-प्राथमिक कक्षा (सत्र 2026-27)
भारत की पावन माटी का, तिलक लगाते हैं,
हम शिशु मन्दिर के बच्चे इसे, शीश नवाते हैं।
भारत की पावन माटी का, तिलक लगाते हैं,
हम शिशु मन्दिर के बच्चे इसे, शीश नवाते हैं।
भारत की पावन माटी का……
गंगा से पावन बनकर हम, सबके कष्ट मिटायें,
ऐसी शक्ति दे दो भगवन, हम सबके बन जायें।
हाथ पकड़ लें उनका जो, पीछे रह जाते हैं,
हम शिशु मन्दिर के बच्चे इसे, शीश नवाते हैं।
भारत की पावन माटी का……
सूरज जैसे तपते हैं और, चन्द्र सा शीतल रहते,
जैसा भाव मिले हमको, हम वैसे ही बन जाते।
शत्रु आँख दिखाये तो, हम सबक सिखाते हैं,
हम शिशु मन्दिर के बच्चे इसे, शीश नवाते हैं।
भारत की पावन माटी का……
ध्रुव प्रहलाद भरत सा बनना, जिसने हमें सिखाया,
सत्य बोलना झूठ से लड़ना, जिसने हमें बताया।
ऐसे गरुजन को हम पुनि-पुनि, शीश झुकाते हैं,
हम शिशु मन्दिर के बच्चे, इसे शीश नवाते हैं।
भारत की पावन माटी का……
राष्ट्र सेवा हित समर्पित-माध्यमिक कक्षा (सत्र 2026-27)
राष्ट्र सेवा हित समर्पित, हम करें सर्वस्व अर्पण।
साधना पथ पर चलें नित, करें सार्थक सफल जीवन।। ध्रुपद
देश जागृत हो रहा है, विश्व भी स्वीकारता।
युवा शक्ति क्रांति लाई, सब कोई है जानता ।।
विविध क्षेत्रों में प्रगति है, हो रहा नवजागरण ।
साधना पथ पर चलें, नित करें सार्थक सफल जीवन || 1 ||
संगठित हम हो रहे हैं, एक नया विश्वास है।
लक्ष्य होंगे पूर्ण सब के, सभी में उल्लास है।।
इक नया भारत बनेगा, स्वस्थ सुस्थिर शुभ चिरंतन ।
साधना पथ पर चलें नित, करें सार्थक सफल जीवन।। 2।।
गीत वंदे मातरम् हम, सभी मिलकर गा रहे।
डेढ़ सौ वर्षों की यात्रा, सप्त सुर में ढल रहे।।
पंच परिवर्तन से होगा, भव्य भारत का गठन ।
साधना पथ पर चलें नित करें सार्थक सफल जीवन ।।3 ||
राष्ट्र सेवा हित समर्पित, हम करें सर्वस्व अर्पण।
साधना पथ पर चलें नित, करें सार्थक सफल जीवन।।
हमें प्रसन्नता हुई कि आपने विद्या भारती के इन गीतों को गाने के लिए इनके लिरिक्स खोजे। हमें विश्वास है आप विद्या भारती के लक्ष्यों को मजबूत करते हुए राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का विकास के योगदान करेंगे, जिसके द्वारा हिन्दुत्वनिष्ठ एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत तथा शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से पूर्ण विकसित युवा पीढ़ी का निर्माण हो, जो जीवन की वर्तमान चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक कर सके और जिसका जीवन नगरों, ग्रामों, वनों, गिरिकन्दराओं एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में निवास करने वाले वंचित और अभावग्रस्त अपने बांधवों को सामाजिक कुरीतियों एवं अन्याय से मुक्त कराकर राष्ट्रजीवन को सुसंस्कृत, समरस तथा सुसम्पन्न बनाते हुए ‘वसुधैवकुटुम्बकम्’ के भाव से प्रेरित होकर विश्वकल्याण के लिए समर्पित हो।










