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नमो भगवती माँ सरस्वती वंदना के बोल और पीडीऍफ़ डाउनलोड।

On: November 3, 2025 6:21 PM
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namo bhagwati maa saraswati lyrics
 नमो भगवती माँ सरस्वती‘ गढ़वाली बोली-भाषा में रचित यह सरस्वती वंदना उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों में हर दिन प्रातः बच्चों द्वारा विद्या की देवी माँ सरस्वती की स्तुति के लिए गायी जाती है। जहाँ प्रातः ही इस प्रकार की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रार्थना से शुरुवात हो जाती है वहां पढ़ाई का माहौल स्वतः ही बन जाता है। 
 

Namo Bhagwati Maa Saraswati Lyrics

 नमो भगवती मां सरस्वती
यनू ज्ञान कू भंडार दे,
 पढ़ी- लिखीं हम अग्नै बढ़ जऊं
 श्रेष्ठ बुद्धि अपार दे।
नमो भगवती मां सरस्वती……
 
कर सकूं हम  मनुज सेवा 
बुद्धि  दे विस्तार दे
जाति धर्म से ऐंच हो हम 
मां यनु व्यवहार दे।
अज्ञानता का कांडा काटी 
ज्ञान की फुलारी दे।
पढ़ी-लिखीं हम अग्नै बढ़ जाऊं
श्रेष्ठ बुद्धि अपार दे।
नमो भगवती मां सरस्वती……
 
जिकुड़ा माया, कठोर काया
मन म सुच्चा विचार  दे,
क्षमा, दया मन मा 
बड़ों का आदर सत्कार दे।
हे हंस वाहिनी सरस्वती
भव सिंधु पार उतार दे।
पढ़ी-लिखी हम अग्नै बढ़ जऊं
श्रेष्ठ बुद्धि अपार दे।
नमो भगवती माँ  सरस्वती……
 
दुर्व्यसनु का दैंत माता खैंचणा चौंदिशु बिटी।
यानी दे बुद्धि, ताकत हमू तै
आव न जू रिंगी रिटी।
हे कमलआशनी, वीणा वादिनी प्रेम कू संसार दे।
 पढ़ी-लिखी हम अग्नै बढ़ जऊं श्रेष्ठ बुद्धि अपार दे।
नमो भगवती मां सरस्वती……
Namo Bhagwati Maa Saraswati Mp3

 

 

Namo Bhagwati Maa Saraswati lyrics pdf:

गढ़वाली सरस्वती वंदना के उपरोक्त लिरिक्स आपकी सुविधा के लिए डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध हैं। आप नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके पीडीऍफ़ फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं।

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गढ़वाली बोली-भाषा में रचित यह सरस्वती वंदना उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है। इस वंदना के माध्यम से विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना की जाती है, जो ज्ञान, बुद्धि, विवेक और संगीत की प्रतीक मानी जाती हैं।

उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में स्थित अनेक विद्यालयों में प्रतिदिन प्रातःकाल बच्चे एकत्र होकर इस पवित्र वंदना का गायन करते हैं। जब सूरज की पहली किरणें हिमालय की चोटियों को आलोकित करती हैं, तब विद्यालय परिसर में बच्चों की मधुर वाणी में “नमो भगवती माँ सरस्वती” की गूंज सुनाई देती है। उस क्षण वातावरण में एक अलौकिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है।

इस सरस्वती वंदना का उद्देश्य केवल देवी की स्तुति करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मन में विद्या के प्रति आदर, अनुशासन और एकाग्रता का भाव उत्पन्न करना भी है। जब दिन की शुरुआत इस प्रकार की मनमोहक और भक्तिभाव से परिपूर्ण प्रार्थना से होती है, तब विद्यालय का संपूर्ण वातावरण स्वतः ही अध्ययन और सदाचार की भावना से ओत-प्रोत हो जाता है।

गढ़वाली भाषा में गायी जाने वाली यह वंदना न केवल क्षेत्रीय संस्कृति को सहेजने का कार्य करती है, बल्कि बच्चों में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और गर्व की भावना भी जाग्रत करती है। इस प्रकार यह परंपरा शिक्षा, संस्कृति और आस्था—तीनों के सुंदर संगम का प्रतीक बन जाती है।

Vinod Singh Gariya

ई-कुमाऊँ डॉट कॉम के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। इस पोर्टल के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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