Namo Bhagwati Maa Saraswati Lyrics
Namo Bhagwati Maa Saraswati lyrics pdf:
गढ़वाली बोली-भाषा में रचित यह सरस्वती वंदना उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है। इस वंदना के माध्यम से विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना की जाती है, जो ज्ञान, बुद्धि, विवेक और संगीत की प्रतीक मानी जाती हैं।
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में स्थित अनेक विद्यालयों में प्रतिदिन प्रातःकाल बच्चे एकत्र होकर इस पवित्र वंदना का गायन करते हैं। जब सूरज की पहली किरणें हिमालय की चोटियों को आलोकित करती हैं, तब विद्यालय परिसर में बच्चों की मधुर वाणी में “नमो भगवती माँ सरस्वती” की गूंज सुनाई देती है। उस क्षण वातावरण में एक अलौकिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है।
इस सरस्वती वंदना का उद्देश्य केवल देवी की स्तुति करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मन में विद्या के प्रति आदर, अनुशासन और एकाग्रता का भाव उत्पन्न करना भी है। जब दिन की शुरुआत इस प्रकार की मनमोहक और भक्तिभाव से परिपूर्ण प्रार्थना से होती है, तब विद्यालय का संपूर्ण वातावरण स्वतः ही अध्ययन और सदाचार की भावना से ओत-प्रोत हो जाता है।
गढ़वाली भाषा में गायी जाने वाली यह वंदना न केवल क्षेत्रीय संस्कृति को सहेजने का कार्य करती है, बल्कि बच्चों में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम और गर्व की भावना भी जाग्रत करती है। इस प्रकार यह परंपरा शिक्षा, संस्कृति और आस्था—तीनों के सुंदर संगम का प्रतीक बन जाती है।












