हिन्दू नववर्ष चैत्र के प्रथम दिवस यानि 1 गत्ते को उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचल में एक पर्व मनाया जाता है जो फूलदेई (PHOOL DEI ) के नाम से जाना जाता है। मुख्यतः इस पर्व को यहाँ के बच्चों द्वारा मनाया जाता है, जिसमें छोटे-छोटे बच्चे गांव के हर घर की दहलीज पर जाकर फूल बिखेरते हैं और दक्षिणा प्राप्त करते हैं।

फूलदेई पर्व पर बच्चे सुबह ही उठकर स्नान करके पास के जंगल जाकर ताजे-ताजे फूल तोड़कर लाते हैं। जिनमें बुरांश, प्योंली, बासिंग, भिटौर आदि के सुन्दर पुष्प होते हैं। इन्हें बच्चे रिंगाल की छोटी टोकरियों में सजाते हैं और फिर नए कपड़े धारण कर घर-घर जाते हैं और लोगों के घरों की देहरी पर फूल अर्पित करते हुए यह आशीर्वचन देते हैं –
फूलदेई, फूलदेई,
छम्मा देई, छम्मा देई, दैणी द्वार, भर भकार,
यो देई सौं,
बारम्बार नमस्कार।
फूलदेई, फूलदेई।
फिर नन्हे बच्चों को उस घर द्वारा गुड़, चांवल और सिक्के दिए जाते हैं। शाम को इन चांवलों की सई बनाई जाती है और लोगों में बांटा जाता है।
वीडियो देखें – https://youtu.be/2A8BPx1lEFk
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