उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के मध्य बसा चोपता (Chopta) गढ़वाल क्षेत्र का एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, हरे-भरे बुग्यालों, बर्फ से ढकी चोटियों और आध्यात्मिक स्थलों के कारण लोग इसे अक्सर “भारत का मिनी स्विट्जरलैंड” भी कहते हैं। अगर आप भी शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ समय प्रकृति के साथ बिताना चाहते हैं, तो चोपता आपके लिए एक परफेक्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन हो सकता है।
चोपता सिर्फ ट्रैकिंग के शौकीन लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकृति से लगाव रखने वाले, फोटोग्राफरों, आध्यात्मिक यात्रियों और परिवार के साथ घूमने वालों के लिए भी एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। यहां आपको हिमालय की शानदार वादियां, शांत और स्वच्छ झीलें, प्राचीन मंदिर और वन्यजीवों से भरे जंगल देखने को मिलेंगे। आइए जानते हैं चोपता में घूमने की 5 सबसे खूबसूरत स्थलों के बारे में।
तुंगनाथ मंदिर – दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में से एक
यदि आप चोपता की यात्रा पर आते हैं तो तुंगनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करें क्योंकि इस मंदिर के दर्शन किये बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। समुद्र तल से करीब 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और पंचकेदारों में तृतीय केदार माना जाता है।
मान्यता है कि तुंगनाथ मंदिर एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है और इसका संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। चोपता से लगभग 3.5 किलोमीटर का ट्रैक करके यहां पहुंचा जा सकता है। ट्रैक का मार्ग घने जंगलों और खूबसूरत पहाड़ी दृश्यों से होकर पूरा होता है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देता है। मंदिर परिसर से चौखंबा, नंदा देवी और केदारनाथ पर्वत श्रृंखलाओं के मनोहारी दृश्य दिखाई देते हैं।
तुंगनाथ मंदिर की विशेषता
- पंचकेदारों में महत्वपूर्ण स्थान
- भगवान शिव को समर्पित प्राचीन मंदिर
- आसान और खूबसूरत ट्रेकिंग मार्ग
- हिमालयी चोटियों का मनोरम दृश्य
चंद्रशिला ट्रेक – सूर्योदय देखना है तो चले आएं
तुंगनाथ मंदिर से आगे करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंद्रशिला शिखर चोपता की सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग डेस्टिनेशनों में से एक है। “चंद्रशिला” का अर्थ है “चंद्रमा की चट्टान”। एक कथा के अनुसार चंद्रमा (चंद्रदेव) ने क्षय रोग से मुक्ति पाने के लिए यहाँ हजारों वर्षों तक भगवान शिव की आराधना की थी। वहीं हिन्दू पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने इस स्थान पर भगवान शिव की तपस्या की थी।
यह ट्रैक प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम है जहाँ चोटी पर पहुंचने के बाद हिमालय की 360 डिग्री पैनोरमिक दृश्य लोगों को आकर्षित करता है। यहां से चौखंबा, नंदा देवी, त्रिशूल और बंदरपूंछ जैसी प्रसिद्ध हिमालय चोटियों के मनमोहक दृश्य देखे जा सकते हैं।
विशेष रूप से सूर्योदय के समय यह जगह किसी देवलोक से कम नहीं लगता। जैसे ही सूर्य की पहली किरणें बर्फीली चोटियों पर पड़ती हैं, पूरा क्षेत्र स्वर्ण आभा से भर उठता है।
चंद्रशिला ट्रेक क्यों करें?
- उत्तराखंड के सबसे खूबसूरत ट्रेकों में शामिल
- सूर्योदय और सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य
- बर्फबारी के दौरान रोमांचक अनुभव
- फोटोग्राफी के लिए शानदार स्थान
देवरिया ताल – हिमालय का दर्पण
चोपता से लगभग 61 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवरिया ताल एक शांत और सुरम्य उच्च हिमालयी क्षेत्र का ताल (झील) है। यह झील चारों ओर से घने जंगलों से घिरी हुई है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता से सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है।
इस ताल की सबसे बड़ी विशेष बात है कि साफ मौसम में इसके पानी में चौखंबा पर्वत का प्रतिबिंब दिखाई देता है। ऐसा लगता है मानो पूरा हिमालय झील के अंदर उतर आया हो। जिसे देखने के लिए पर्यटक यहाँ चले आते हैं।
देवरिया ताल तक पहुंचने के लिए सारी गांव से लगभग 2 किलोमीटर का आसान ट्रैक करना पड़ता है। यह ट्रैक फैमिली, बच्चों और नए ट्रैकर्स के लिए भी बेहद उपयुक्त माना जाता है।
देवरिया ताल की विशेषताएं
- चौखंबा पर्वत का शानदार प्रतिबिंब
- कैंपिंग और फोटोग्राफी के लिए उपयुक्त
- आसान ट्रैकिंग मार्ग
- प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग
कांचुला खरक कस्तूरी मृग अभयारण्य
अगर आप वन्यजीवों और प्रकृति से लगाव रखते हैं तो कांचुला खरक मस्क डियर सैंक्चुरी अवश्य जाएं। चोपता-गोपेश्वर मार्ग पर स्थित यह अभयारण्य करीब 7 किलोमीटर की दूरी पर है।
लगभग 6 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य दुर्लभ कस्तूरी मृग (Musk Deer) के संरक्षण और प्रजनन के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवदार और बुरांश के जंगल, रंग-बिरंगे फूल और शांत वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यह स्थान पक्षी प्रेमियों और प्रकृति फोटोग्राफरों के लिए भी बेहद खास माना जाता है।
यहां क्या देखें?
- दुर्लभ कस्तूरी मृग
- हिमालयी वनस्पतियां
- पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां
- शांत और प्रदूषण मुक्त वातावरण
सारी गांव – गढ़वाली संस्कृति की झलक
चोपता जाने वाले मार्ग पर स्थित सारी गांव एक छोटा लेकिन बेहद आकर्षक हिमालयी गांव है। यह गांव देवरिया ताल ट्रैक का प्रारंभिक बिंदु भी माना जाता है।
सारी गांव में आप पारंपरिक गढ़वाली जीवनशैली को नजदीक से देख सकते हैं। यहां के पारंपरिक पहाड़ी शैली में बने घर, खेत, पहाड़ी भोजन और ग्रामीण संस्कृति पर्यटकों को एक अलग अनुभव प्रदान करते हैं।
यदि आप उत्तराखंड की असली संस्कृति को नजदीक से देखना चाहते हैं, तो इस गांव में कुछ समय अवश्य बिताएं।
सारी गांव में क्या करें?
- स्थानीय गढ़वाली पारम्परिक भोजन का स्वाद लें
- ग्रामीण जीवन को नजदीक से देखें
- सुंदर हिमालयी व्यूज का आनंद लें
- देवरिया ताल ट्रेक की शुरुआत करें
चोपता घूमने का सबसे अच्छा समय
मार्च से जून
गर्मी के मौसम जब शहरों का तापमान 45 डिग्री के पार रहता है इस दौरान चोपता का मौसम बेहद सुहावना रहता है। इस समय चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और साफ आसमान देखने को मिलता है। ट्रैकिंग और दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए यह सबसे उपयुक्त समय माना जाता है।
सितंबर से नवंबर
बारिश के बाद चोपता की वादियां और भी खूबसूरत दिखाई देने लगती हैं। मौसम साफ रहता है और हिमालय की चोटियों के शानदार व्यूज देखने को मिलते हैं।
दिसंबर से फरवरी
यदि आप स्नोफॉल का आनंद लेना चाहते हैं, तो सर्दियों का मौसम सबसे अच्छा है। इस दौरान चोपता और चंद्रशिला का पूरा क्षेत्र बर्फ की सफेद चादर से ढक जाता है , जो पर्यटकों को एक उमंग और उत्साह से भर देता है।
चोपता क्यों जाएं?
चोपता उत्तराखंड के उन ख़ास पर्यटक स्थलों में से एक है जहां प्रकृति, अध्यात्म और रोमांच एक साथ देखने को मिलते हैं। तुंगनाथ मंदिर की आध्यात्मिक शांति, चंद्रशिला की रोमांचक ट्रैकिंग , देवरिया ताल की प्राकृतिक सुंदरता, कांचुला खरक अभयारण्य की जैव-विविधता और सारी गांव की सांस्कृतिक विरासत इसे उत्तराखंड के सबसे खास पर्यटन स्थलों में शामिल करती है।
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अगर आप अपनी छुट्टियों में किसी शांत, खूबसूरत और एक विशेष टूरिस्ट प्लेस की तलाश कर रहे हैं, तो चोपता को अपनी ट्रैवल लिस्ट में अवश्य शामिल करें। आपका यहां बिताया गया हर पल आपको हिमालय की गोद में एक अनूठा और यादगार अनुभव देगा।












