हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर भगवान बागनाथ की भूमि बागेश्वर में लगने वाले पौराणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक एवं ऐतिहासिक उत्तरायणी मेला 2026 मंगलवार, दिनांक 13 जनवरी 2026 से प्रारम्भ होगा, जो दिनांक 20 जनवरी तक चलेगा। पतित पावनी सरयू, गोमती तथा अदृश्य सरस्वती नदियों के त्रिवेणी संगम, नीलेश्वर व भीलेश्वर पर्वतों की तलहटी और सूर्यकुंड व अग्निकुंड जैसे पवित्र स्थलों के मध्य मार्कण्डेय ऋषि तपोभूमि व्याघ्रेश्वर यानी बागेश्वर में लगने वाले इस मेले की तैयारियां चरम पर हैं। इस बार यह मेला 8 दिन तक चलेगा। मेला आयोजन समिति और प्रशासन इस ऐतिहासिक मेले को भव्य बनाने के लिए जुटा हुआ है। 8 दिवसीय इस कौतिक में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर ली गई हैं। जिसमें विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं, लोक क्रीड़ाएं, विभिन्न विद्यालयों के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जायेंगे। प्रदेश भर के लोक कलाकार उत्तरायणी कौतिक में अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां देंगे।
उत्तरायणी मेले का शुभारम्भ दिनांक 13 जनवरी 2026 की प्रातः 11 बजे से भव्य झांकी के साथ होगा, जिसमें विभिन्न स्कूली बच्चे, लोक वाद्य कलाकार, छोलिया नर्तक और विभिन्न सांस्कृतिक दल समेत सैकड़ों लोग शामिल होंगे। अपराह्न 2 बजे प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस उत्तरायणी मेले का विधिवत उद्घाटन करेंगे।
इस बार बागेश्वर में लगने वाले उत्तरायणी मेले को भव्य और दिव्य बनाने के लिए तिथिवार विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताएं की सूची जारी की गई है। जिसमें यहाँ के लोक कलाकार, स्कूली बच्चे, खिलाडी, विभिन्न सांस्कृतिक दल प्रतिभाग करेंगे। आईये यहाँ देखते हैं तिथिवार कार्यक्रमों की सूची –
उत्तरायणी मेला बागेश्वर 2026
पहला दिन – 13 जनवरी 2026
- सरयू तट पर दीपदान – सायं 6:15 बजे से।
- भजन संध्या जिसमें खुशी जोशी, पंडित प्रमोद जोशी और अमन साँवरिया अपनी प्रस्तुति देंगे।
दूसरा दिन – 14 जनवरी 2026
- सरयू बगड़ में वालीबॉल प्रतियोगिता – दोपहर 12 बजे से।
- अल्पना प्रतियोगिता – दोपहर 1:00 बजे से, जो पालिका परिसर में संपन्न होगी।
- स्कूली बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम – दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक।
- आमंत्रित कलाकार – ख़ुशी जोशी एवं गोविन्द दिगारी (प्रस्तुति-2 बजे से 5 बजे तक)
- विभिन्न क्षेत्रीय सांस्कृतिक दलों के कार्यक्रम।
तीसरा दिन – 15 जनवरी 2026
- शिखर हिमालय जन सांस्कृतिक समिति की स्टार नाईट ( रात्रि 8 बजे से 12 बजे तक), जिसमें इन्दर आर्य, कुंदन कोरंगा, मेघना चंद्रा और उनकी टीम अपनी प्रस्तुति देगी।
- वॉलीबॉल प्रतियोगिता सरयू बगड़ में – 12 बजे से।
- महेंदी प्रतियोगिता – 1 बजे से।
- विभिन्न विद्यालयों के सांस्कृतिक कार्यक्रम – 12 बजे से 2 बजे तक।
- आमंत्रित दलों की प्रस्तुति – 2 बजे से 5 बजे तक।
- राकेश पनेरु का एकल गायन।
- रमेश जगरिया का एकल गायन।
चौथा दिन – 16 जनवरी 2026
- स्टार नाईट – दीक्षा ढौंढियाल, रमेश बाबू गोस्वामी, अनिल रावत (रात्रि)
- विभिन्न खेल, कुमाऊनी व्यंजन प्रतियोगिता, बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- दीवान कनवाल और अजय ढौंढियाल की जुगलबंदी।
- अन्य आमंत्रित सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुति।
पांचवां दिन – 17 जनवरी 2026
- स्टार नाईट – ललित मोहन जोशी, हेमा नेगी करासी, अजय चंदोला और कामेडियन गणेश बिष्ट की प्रस्तुति।
- आर्म रेसलिंग (सरयू बगड़ में)
- विभिन्न विद्यालयी सांस्कृतिक कार्यक्रम
- पूरन राठौड़ की एकल प्रस्तुति।
- प्रभाकर जोशी की एकल प्रस्तुति।
- आमंत्रित सांस्कृतिक दलों के रंगारंग कार्यक्रम।
छठा दिन – 18 जनवरी 2026
- The Rang Himalayan Band की स्टार नाइट। जिसमें कैलाश कुमार, दीपिका राज, कमलजीत ढकरियाल एवं टीम अपनी प्रस्तुति देंगे।
- दंगल प्रतियोगिता – सरयू बगड़ में
- कमला देवी (कोक स्टूडियो) के बैर भगनौल की प्रस्तुति।
- आमंत्रित सांस्कृतिक दलों की मनमोहक प्रस्तुतियां।
सातवां दिन – 19 जनवरी 2026
- स्टार नाईट – माया उपाध्याय, संदीप सोनू, साक्षी काला, चंद्रशेखर तिवाड़ी और बेबी प्रियंका।
- सरयू बगड़ में दंगल प्रतियोगिता का फाइनल।
- कुमाऊंनी लोक गायक आनंद कोरंगा की प्रस्तुति।
- तारा पथनी का लोक गायन।
- विभिन्न सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियां।
आठवां दिन – 20 जनवरी 2026
- बॉलीवुड स्टार नाईट – देव नेगी, चन्द्रकला, मन चड्ढा, बी के सामंत
- विभिन्न आमंत्रित सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुति।
- पुरस्कार वितरण
- उत्तरायणी कौतिक 2026 का समापन।
यह हैं बागेश्वर में आयोजित होने वाले उत्तरायणी मेला 2026 के विभिन्न कार्यक्रम, जो बागनाथ नगरी में 8 दिन तक लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेंगे। इसके अलावा यहाँ आस्था का सैलाब भी उमड़ पड़ेगा। लोग मकर संक्रांति के पवित्र अवसर पर सरयू, गोमती और सरस्वती (विलुप्त) के त्रिवेणी संगम पर आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करेंगे साथ ही बाबा बागनाथ के दर्शन करेंगे।
व्यापारिक दृष्टि से भी बागेश्वर का यह मेला उत्तराखण्ड के प्रमुख आयोजनों में से एक है। यहाँ प्राचीन समय से ही हिमालयी जड़ी-बूटियों, दानपुर के रिंगाल उत्पाद, जोहार-मुनस्यारी के दन-गलीचे, कम्बल, पश्मीना शॉल, खरही पट्टी के ताम्र शिल्प, काली कुमाऊँ के लौह उत्पाद, पहाड़ी संतरे, पहाड़ी गन्ना आदि का अच्छा व्यापार होता है। वहीं कुमाऊँ मैस्टिफ डॉग खरीदने के लिए लोग दूर-दूर से यहाँ पहुँचते हैं।
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- उत्तरायणी- सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का त्यौहार।
ज्ञात हो बागेश्वर के इस ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले की शुरुआत चंद वंशीय राजाओं के शासन काल में माघ मेले के रूप में हुई थी। यह वही मेला है जहाँ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ पहाड़ के लोगों ने एकजुट होकर कुली बेगार और कुली बरदायस जैसी अमानुषिक प्रथा को समूल नष्ट करने की कसम खाई और उससे सम्बंधित रजिस्टर ब्रिटिश अधिकारियों की मौजूदगी में सरयू नदी में बहा दिए थे।










