उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद स्थित कपकोट क्षेत्र के वीर सपूत हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। जम्मू-कश्मीर में चल रहे ऑपरेशन त्राशी के दौरान आतंकियों से मुठभेड़ में वह वीरगति को प्राप्त हो गए। शहीद जवान 2 पैरा स्पेशल फोर्स (2 PARA SF) में सेवारत थे।
सेना मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया 18 जनवरी 2026 को जम्मू-कश्मीर के कलामसोई नाला क्षेत्र (ग्रिड 284550) में ऑपरेशन त्राशी के अंतर्गत आतंकवाद विरोधी अभियान में शामिल थे। इसी दौरान आतंकियों की गोलीबारी में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और लगभग 12:40 बजे उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
20 जनवरी को बागेश्वर पहुंचेगा पार्थिव शरीर
शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया का पार्थिव शरीर 20 जनवरी 2026 को सैन्य हेलीकॉप्टर के माध्यम से डिग्री कॉलेज, बागेश्वर लाया जाएगा। वहां से पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव कपकोट ले जाया जाएगा, जहां सरयू तट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
सेना द्वारा अंतिम संस्कार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं एसओपी के अनुसार की जा रही हैं। सैन्य सम्मान के तहत बिगुल वादन, गार्ड ऑफ ऑनर सहित अन्य औपचारिकताएं निभाई जाएंगी।
परिवार में शोक की लहर
शहीद हवलदार गजेंद्र सिंह अपने पीछे पत्नी श्रीमती लीला देवी, दो बच्चे, माता-पिता, भाई और एक दिव्यांग बुआ को छोड़ गए हैं। उनका पैतृक गांव बीथी, पोस्ट ऑफिस पोथिंग, तहसील कपकोट, जिला बागेश्वर में स्थित है। शहादत की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है, वहीं गांव और जिले में उन्हें अंतिम विदाई देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
उत्तराखंड ने खोया एक और वीर सपूत
उत्तराखंड पहले ही देश को बड़ी संख्या में वीर सैनिक देने के लिए जाना जाता है। हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया की शहादत ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि देवभूमि के जवान देश की रक्षा के लिए हर समय तत्पर रहते हैं।
स्थानीय प्रशासन, जिला सैनिक कल्याण बोर्ड और सेना के अधिकारी अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। शहीद की शहादत को लेकर क्षेत्र में लोगों की आंखें नम हैं, लेकिन साथ ही देश के लिए बलिदान पर गर्व भी है।
देश हवलदार गजेंद्र सिंह के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।










