श्री 1008 शिखर मूलनारायण मंदिर बागेश्वर।

shikhar mool narayan temple
उत्तराखण्ड के बागेश्वर जनपद स्थित कपकोट तहसील के शिखर नामक पर्वत चोटी पर श्री 1008 मूलनारायण देव जी का महिमामयी धाम स्थित है। इन्हें भगवान श्रीकृष्ण का स्थानीय रूप भी माना जाता है। मान्यता है कि त्रेतायुग में लोक कल्याण के लिए श्रीकृष्ण ने यह रूप धारण किया। एक अन्य मान्यता के अनुसार शिखर धाम वासी मूलनारायण मघन नामक ऋषि और मायावती के पुत्र थे, जिन्हाेंने रमणीक शिखर पर्वत को निवास के लिए चुना। उनके ज्येष्ठ पुत्र का नाम नौलिंग और कनिष्ठ पुत्र का नाम बजैण था। नौलिंग देव का मंदिर सनगाड़ और बजैण देव का मंदिर भनार में स्थित है। 
यहाँ वर्षभर भक्तों का ताँता लगा रहा है। भक्त यहाँ अपनी मनौती लेकर पहुंचते हैं और मनौती पूरी होने पर सत्यनारायण कथा, भागवत कथा पाठ आदि धार्मिक अनुष्ठान करवाते हैं। लोगों का मानना है भक्ति भाव और दृढ़ इच्छा शक्ति वाले भक्त ही यहाँ तक पहुँच पाते हैं। हर वर्ष यहाँ कार्तिक मास में भगवान मूलनारायण जी की विशेष पूजा की जाती है।

Shikhar Mool Narayan Temple

समुद्र सतह से करीब 9000 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित यह धाम अत्यंत रमणीय है। बांज, बुरांश के जंगलों के मध्य मूलनारायण जी का सुन्दर धाम है। जिसका नवनिर्माण वर्ष 1991 में पंजाबी अखाड़े के महंत बद्रीनारायण ने यहां आकर कराया था। बैठने और रहने के लिए यहाँ लोगों द्वारा धर्मशालाओं का निर्माण किया गया है। अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण भी यहाँ पानी की कोई कमी नहीं है। मंदिर से कुछ दूर एक गुफा है। यहाँ से पानी निकलता है और इसी पानी को उपयोग में लाया जाता है। 
शिखर मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को करीब 8 से 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है। पैदल यात्रा बांज, बुरांश के मनमोहक जंगल से होकर पूरी होती है। यहाँ से पंचाचूली, नंदा देवी, बनकटिया, नंदा खाट आदि हिमालय के मुख्य चोटियों के दर्शन सुलभ हैं। कपकोट, महरगाड़, नाकुरी आदि क्षेत्रों के सुन्दर गांव यहाँ से देखे जा सकते हैं। यहाँ के सुन्दर वन, वन्य जीव-जंतु विशेष आकर्षण और उत्सुकता भरे होते हैं। इसीलिए लोग यहाँ देव दर्शन के अलावा प्रकृति के दीदार करने के लिए भी पहुँचते हैं। साहसिक पर्यटन प्रेमी भी इस गगनचुम्बी शिखर पर्वत तक पहुँचने के लिए लालायित रहते हैं। 
route of shikhar mool narayan
मंदिर को जाने के लिए मार्ग। 
शिखर मूलनारायण मंदिर तक पहुंचने के लिए बागेश्वर होते हुए कपकोट आना होता है। फिर यहाँ से शामा-मुनस्यारी सड़क से होते हुए खड़लेख तक वाहन से जा सकते हैं और यहीं से पैदल मार्ग शिखर धाम को जाता है। वहीं धरमघर,नाकुरी पट्टी से होते हुए भी लोग पैदल मूलनारायण जी के धाम पहुँचते हैं। इस स्थल को लोग धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रयासरत हैं। यहाँ की आस्था, नैसर्गिक सुंदरता के कारण यहाँ धार्मिक और साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं।
Beauty of mool narayan temple
सुन्दर दृश्य। 

Vinod Singh Gariya

ई-कुमाऊँ डॉट कॉम के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। इस पोर्टल के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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