पर्यटकों की नज़रों से दूर एक खूबसूरत पर्यटक स्थल – Sukunda

sukunda
उत्तराखण्ड के बागेश्वर जनपद में कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं जो विश्व के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियर साहसिक यात्रा के शौक़ीन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। वहीं जिले में कुछ ऐसे स्थान भी हैं जो अभी पर्यटकों की नज़रों से दूर हैं। ऐसा ही एक ऐसा सुंदर स्थल है- सुकुण्डा (Sukunda), जहाँ पर पर्यटन की अपार संभावनाएं विद्यमान है। आईये जानते हैं इस खूबसूरत स्थल के बारे में –
बागेश्वर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर कपकोट के निकट पोथिंग गांव की एक सुन्दर पहाड़ी है सुकुण्डा, जिसे स्थानीय लोग सुकुण्ड के नाम से जानते हैं। सिंधु सतह से अनुमानित 5000 फ़ीट की ऊंचाई वाली इस पहाड़ी में एक पानी का तालाब भी है जिसे लोग सुकुण्डा ताल के नाम से जानते हैं। वहीं इस पहाड़ की चोटी से नजर आने वाले दृश्य हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहाँ से हिमालय की पूरी श्रृंखलाओं के दर्शन किये जा सकते हैं वहीं रात में कुमाऊँ और गढ़वाल के विभिन्न गांवों और शहरों की टिमटिमाती लाइट बेहद आकर्षक लगती है।

सुकुण्ड मूलतः दो शब्दों ‘सु’ और ‘कुण्ड’ से मिलकर बना है। जिसका अर्थ होता है एक ‘सुंदर कुण्ड’। इसी सुंदर कुंड के नाम से इस पहाड़ी का नामकरण हुआ है। लोगों में मान्यता है कि हिमालय में निवास करने वाले सभी देवी-देवता यहाँ हर रोज प्रातःकाल स्नान हेतु आते हैं। चारों तरफ से जंगलों से घिरा होने पर भी इस कुण्ड में कहीं गन्दगी नहीं दिखाई देती। लोग कहते हैं कि जब इस कुण्ड में पेड़ों की कोई भी सूखी पत्ती गिर जाती है तो यहाँ पर निवास करने वाली पक्षियां इन पत्तियों को अपनी चोंच द्वारा बाहर निकाल देती हैं।

जन-श्रुतियों के अनुसार इस कुण्ड का निर्माण बलशाली भीम द्वारा किया गया था। कहते हैं जब पांडव अज्ञातवास के समय यहाँ से गुजर रहे थे तो उन्हें यहाँ काफी प्यास लग गयी, दूर तक कहीं भी पानी का नामोनिशान नहीं था। प्यास बुझाने के लिए बलशाली भीम ने अपनी गदा से इस चोटी पर प्रहार किया और एक कुण्ड (जलाशय) का निर्माण कर डाला। इसी कुण्ड से प्यासे पाण्डवों ने अपनी प्यास बुझाई थी। इसी कारण आज भी इस कुण्ड को धार्मिक दृष्टि से देखा जाता है। इस कुण्ड में स्नान करना, कुछ छेड़-छाड़ करना सख्त मना है।

जहाँ यह कुण्ड स्थित है वहां का सम्पूर्ण क्षेत्र सुकुण्डा कहलाता है। सुकुण्डा एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण यहाँ से हिमालय की सम्पूर्ण पर्वत श्रृंखलाओं का दर्शन किये जा सकते हैं। भारत का स्विट्जर्लैंड कहा जाने वाला प्रसिद्द पर्यटक स्थल कौसानी और सुकुण्डा की ऊंचाई लगभग बराबर है। सुकुण्डा अभी तो शैलानियों की पहुँच से तो दूर है लेकिन वर्तमान में सुकुण्डा को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने भरपूर कोशिश की जा रही है। कपकोट और पोथिंग गाँव से सुकुण्डा को सड़क मार्ग द्वारा जोड़ने की योजना है। सरकार इस स्थल को विकसित करने का भरसक प्रयास करे तो निश्चित ही सुकुण्डा एक प्रसिद्द पर्यटक स्थल के रूप में उभरकर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगा।

यहाँ भी पढ़ें : सुकुण्डा ताल-धार्मिक, पौराणिक मान्यताएं और पर्यटन की संभावनाएं।

पूरा लेख पढ़ने के लिए कृपया उपरोक्त शीर्षक पर टैप करें या https://www.eKumaon.com पर जाएँ।

Vinod Singh Gariya

ई-कुमाऊँ डॉट कॉम के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। इस पोर्टल के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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