पर्यटकों के लिए खुली विश्व धरोहर फूलों की घाटी।

उत्तराखंड की भ्यूंडार घाटी यानी यूनेस्को की विश्व धरोहर 'वैली ऑफ फ्लावर्स' 1 जून से पर्यटकों के लिए पूरी तरह खुल गई है। चमोली जिले की यह खूबसूरत घाटी अपनी अद्भुत जैव विविधता और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के लिए प्रसिद्ध है। जुलाई से सितंबर के बीच यहाँ फूलों का असली संसार बिखरता है, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है।

Valley of Flowers

HIGHLIGHTS

  • नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान ने 1 जून पर्यटकों के लिए 'फूलों की घाटी' को आधिकारिक तौर पर खोल दिए हैं।
  • यूनेस्को के इस विश्व धरोहर में दुर्लभ हिमालयी जड़ी-बूटियों और फूलों का अद्भुत संसार मौजूद है।
  • पर्यटक अब अक्टूबर के अंत तक या बर्फबारी शुरू होने तक इस खूबसूरत घाटी का दीदार कर सकेंगे।
  • मानसून के साथ यहाँ ब्रह्म कमल और ब्लू पोस्ता जैसे दुर्लभ फूलों की बहार जुलाई से सितंबर के बीच अपने चरम पर होगी।

प्रकृति प्रेमियों, पर्यटकों और एडवेंचर के शौकीनों का इन्तजार अब ख़त्म हुआ। करीब 7 महीने के लंबे समय के बाद देश-विदेश के पर्यटक अब चमोली जनपद स्थित विश्व प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) का दीदार कर सकेंगे। 1 जून से नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान ने ‘फूलों की घाटी’ को पर्यटकों के लिए आधिकारिक रूप से खोल दिया है। इसके खुलने के साथ ही अब पर्यटक इस खूबसूरत घाटी में आवाजाही और ट्रैकिंग कर सकेंगे।

यूनेस्को की विश्व धरोहर है यह घाटी

फूलों की घाटी प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकर्स के लिए किसी खजाने से कम नहीं मानी जाती। यहाँ बड़ी संख्या में दुर्लभ हिमालयी जड़ी-बूटियाँ और फूल पाए जाते हैं। घाटी की इसी अनूठी जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को देखते हुए यूनेस्को (UNESCO) द्वारा फूलों की घाटी को ‘विश्व धरोहर’ (World Heritage Site) में शामिल किया गया है। स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि घाटी के खुलने से इस सीजन में स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को भी नई गति मिलेगी, जिससे होटल, गाइड और होमस्टे संचालकों के चेहरे की ख़ुशी साफ देखी जा सकती है।

अक्टूबर अंत तक दीदार का मौका

हर वर्ष की भांति इस बार भी जून माह के शुरुआती सप्ताह में घाटी को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। आमतौर पर यह घाटी अक्टूबर के अंत तक या बर्फबारी प्रारम्भ होने तक पर्यटकों के लिए खुली रहती है।

जुलाई से सितंबर के बीच दिखेगा असली जादू

वैसे तो फूलों की घाटी आज से खुल गई है, लेकिन मानसून के आगमन के साथ यहाँ असली फूलों की बहार शुरू होती है। जुलाई से सितंबर के मध्य यह घाटी अपने चरम सौंदर्य पर पहुंचती है। इस दौरान ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता और कोबरा लिली समेत सैकड़ों दुर्लभ प्रजातियों के फूल पूरी घाटी को रंग-बिरंगी चादर से ढक देते हैं, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव होता है।

पर्यटकों के लिए जरूरी सलाह:

वैली ऑफ़ फ्लॉवर्स की यात्रा पर जाने वाले ट्रैकर्स और पर्यटकों को स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनी और नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान के नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है, ताकि पर्यावरण को कोई भी नुकसान पहुँचाए बिना इस प्राकृतिक स्वर्ग का आनंद लिया जा सके।

फूलों की घाटी के बारे में विस्तृत में पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएँ – फूलों की घाटी, जहाँ प्रकृति हर 15 दिन में बदल लेती है नया रंग।

Vinod Singh Gariya

विनोद सिंह गढ़िया इस वेब पोर्टल के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। करीब 15 वर्षों से विभिन्न वेब पोर्टलों के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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