सर्दियों में पहाड़ की गर्म गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक तासीर।

यहाँ पढ़ें पहाड़ों की गर्म पौष्टिक तासीर (Pahadi Winter healthy foods) के बारे में, जो यहाँ के लोग बड़े शौक से विंटर सीजन में ग्रहण करते हैं और सर्दी से बचे रहते हैं।

pahadi winter healthy foods

HIGHLIGHTS

  • पत्थर तोड़ दाल
  • पहाड़ी व्यंजन ठटवाणी
  • मडुआ और लेसु रोटी
  • चैंसू-भात: जाड़ों की औषधि

उत्तराखंड की वादियों की तरह यहां का खानपान भी अद्भुत और अद्वितीय है। पहाड़ी अंचल के भोजन में विविधता होने के साथ ही पोषक तत्वों का अनमोल खजाना छिपा है। अपनी गुणकारी और स्वास्थ्यवर्धक तासीर से यहां के मौसमी फल, सब्जी, दाल और अनाज आदि न केवल देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। भोजन को बनाने की अनूठी पारंपरिक विधि न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन होती है बल्कि पौष्टिकता को भी कई गुना बढ़ा देती है। इसमें चाहे सना नींबू हो या मंडुवे की रोटी, पालक का कापा हो या भट के डुबके और चुड़कानी। हर जायका खास है। मौसम के साथ भोजन बदला है और इस समय सर्दियों की तासीर गर्म है। सर्द मौसम में शरीर को ऊर्जा देने वाला भोजन विरासत में मिला है। दोपहर में सना हुआ नींबू (चूख), गडेरी मिक्स गहत की दाल तो शाम को मंडुवे की रोटी शरीर को ऊर्जा के साथ पौष्टिकता भी देती है।

Pahadi Winter Healthy Foods

गहत की दाल

गहत की दाल को पत्थर तोड़ दाल कहते हैं। यह पथरी के इलाज में कारगर है। उत्तराखंड के सांस्कृतिक इतिहास में प्रोफ़ेसर अजय रावत लिखते हैं, गहत औषधि है। कुमाऊं में अलग तरह से बनाया जाता है। रातभर भिगोकर हल्दी, अदरक और लहसुन के मिश्रण के साथ पकाया जाता है। फिर इसमें जीरा, हींग और गंदरायण से छौंका लगाया जाता है। यह दाल शीत से बचाती है, ऊर्जा देती है।

ठटवाणी का लाजवाब स्वाद

भट, गहत, चना, काला मास और राजमा से बनाया जाने वाला पहाड़ी व्यंजन ठटवाणी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। वर्ष 2020 में संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन फ़ूड एग्रीकल्चर  आर्गेनाइजेशन की माउंटेन रेसिपी बुक में ठटवाणी को स्थान मिला था। इस डिश को दो स्वरूपों में खाया जाता है। पहले दानों को पकाने के बाद अलग कर दिया जाता है। पकी दाल अलग से खाई जाती है। रस को मसालों के साथ अधिक स्वादिष्ट बनाकर चाँवल संग ग्रहण करते हैं।

गडेरी: मधुमेह और उच्च रक्तचाप वालों के लिए फायदेमंद

गडेरी सर्दियों के सीजन में पहाड़ में मिलने वाली प्रमुख सब्जी है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को काफी पसंद है। फाइबर और प्रोटीन के साथ विटामिन का खजाना छिपा हुआ है। वहीं, पर्वतीय अंचल में इसे कई प्रकार से बनाया जाता है। कुछ लोग इसके गुटके पसंद करते हैं तो कई लोग पहाड़ीमूली या मेथी के साथ से बनाते हैं, जो इसके गुणकारी तत्वों को और बढ़ा देती है। यह सब्जी मधुमेह और उच्च रक्तचाप से परेशान लोगों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है।

डुबके और भट की चुड़कानी

आम हो या खास, बच्चे हों या बुजुर्ग, भट के डुबके और चुड़कानी हर पहाड़ी को पसंद है। इसे उत्तराखंडियों की रसोई की शान कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। डुबके भट को पीसकर बनाये जाते हैं और चुड़कानी इस दाल को भून कर बनाई जाती है। लेकिन स्वाद के मामले में दोनों ही लाजवाब हैं। पोटैशियम, फास्फोरस, प्रोटीन, आयरन जैसे पोषक तत्वों वाली भट  की दाल की तासीर गर्म होती है। इसलिए सर्दियों में यह डिश खास है।

मडुआ और लेसु रोटी: पाचन शक्ति को करती है बेहतर

मडुआ पर्वतीय क्षेत्र का प्रमुख मोटा अनाज है, जो गुणकारी तत्वों से भरा हुआ है। पूरी तरह मडुए के आटे से बनाई या फिर गेहूं के आटे में मिलाकर बनाई गई रोटी जिसे लेसु भी कहते हैं। यह दोनों ही पौष्टिक होती हैं। तासीर गर्म होने के कारण इसे सर्दियों के समय में खाया जाता है। पोषक तत्वों से युक्त मडुए की रोटी या लेसु का असल स्वाद लकड़ी के चूल्हे में बनाने पर ही आता है। स्वास्थ्यवर्धक इस रोटी को खाने से पाचन शक्ति बेहतर होती है और वजन संतुलन में मददगार माना गया है। परंपरागत वैद्य भी इसे खाने की सलाह दी देते हैं। वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में यह सर्दियों के समय हर घर की थाली का सबसे अहम हिस्सा मानी जाती है।

चैंसू-भात: जाड़ों की औषधि

वैसे तो गढ़वाल में चैंसू-भात हर मौसम में मिलता है, लेकिन सर्दियों में इसे खासतौर पर बनाया जाता है। प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन की प्रचुरता वाले चैंसू को लेकर कहा जाता है कि जाड़ों में चैंसू-भात न खाया तो क्या खाया। इसे उड़द या भट्ट की दाल से बनाया जाता है। दाल को पीसकर चूर्ण बना लिया जाता है फिर इसे चार से पांच मिनट तक भूनकर धनिया, हल्दी, जीरा, मिर्च, नमक डालकर धीमी आंच में  पकाया जाता है।

पालक का कापा

पालक वैसे तो विटामिन, आयरन, पोटैशियम जैसे तत्वों से भरपूर सब्जी है। मुख्या रूप से सर्दियों के समय मिलने वाली इस सब्जी के गुणों से हर कोई अवगत भी है। लेकिन पर्वतीय अंचल में इसे लोहे की कढ़ाही  में विशेष रूप से बनाया जाता है। इसका स्वाद तभी खास होता है जब कापा पहाड़ी पालक से बने। यह व्यंजन स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद माना गया है।

चूख : एंटी ऑक्सीडेंट का खजाना

सना नींबू जिसे स्थानीय बोलचाल में चूख कहा जाता है। सर्दियों के मौसम में सबसे पसंदीदा है। इसे धूप में बैठकर खाने की मजा ही अलग है। यह पर्वतीय क्षेत्रों के बड़े नींबू  से तैयार होता है। नींबू के साथ मूली, भांग बीज और धनिया मिक्स नमक, गुड़ और दही को मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। खट्टे-मीठे जायके के साथ ही यह एंटी ऑक्सीडेंट गुणों से युक्त है। यह शरीर को सर्द मौसम में ताजगी देता है। आयुर्वेद में इसे लाभकारी माना गया है।

यह थी सर्दियों में पहाड़ की गर्म तासीर के बारे में एक विस्तृत जानकारी। जिसका सेवन सर्दियों के मौसम में पहाड़ों में रहने वाले लोग अवश्य करते हैं और यहाँ पड़ने वाली कड़ाके की सर्दी से बचे रहते हैं, साथ ही उनके औषधीय गुणों का लाभ प्राप्त करते हैं। यह पोस्ट हमें सुमित जोशी, ललित मोहन बेलवाल एवं दैनिक जागरण के सौजन्य से प्राप्त हुई।

Vinod Singh Gariya

ई-कुमाऊँ डॉट कॉम के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। इस पोर्टल के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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