उत्तराखंड न्यूज़ । कहते हैं कि वर्दी के पीछे एक सख्त इंसान होता है, लेकिन आज उत्तराखंड पुलिस के जांबाज जवानों ने साबित कर दिया कि उस वर्दी के भीतर एक बेहद संवेदनशील और कोमल दिल भी धड़कता है। विधानसभा बजट सत्र की थकान को दरकिनार कर, इन जवानों ने एक बेजुबान की जान बचाकर इंसानियत की नई मिसाल पेश की है।
Uttarakhand Police Saved Cow
घटना आज (14 मार्च) की है, जब विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद फायर कर्मी अनूप सरकारी वाहन से वापस लौट रहे थे। दीवालीखाल से करीब 2 किलोमीटर आगे आदिबद्री की ओर बढ़ते समय अचानक उनकी नजर सड़क से नीचे एक स्क्रबर के पास पड़ी। वहां एक बेचारी गाय पेड़ की दो टहनियों के बीच अपनी गर्दन फंसाए जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी।
Uttarakhand Police Humanity
अनूप ने तुरंत मोर्चा संभाला और वहां से गुजर रहे यजुवेंद्र रावत व पुलिस कार्यालय के अन्य कर्मियों को इसकी सूचना दी। देखते ही देखते ड्यूटी से लौट रहे फायर स्टेशन ज्योतिर्मठ और उत्तरकाशी पुलिस के जवान भी अपनी गाड़ियों से उतर पड़े। सभी ने अपनी थकान को भुलाकर एक टीम के रूप में ‘पुण्य’ का यह कार्य शुरू किया। गाय पिछले 2-3 दिनों से भूखी-प्यासी वहां फंसी हुई थी और हिलने तक की ताकत नहीं बची थी। लेकिन जवानों के ‘अथक प्रयास’ रंग लाए। घंटों की मशक्कत के बाद टहनियों के जाल को काटकर गाय को सकुशल बाहर निकाला गया और कंधे से कंधा मिलाकर उसे सुरक्षित सड़क तक लाया गया।
जैसे ही गाय को पानी पिलाया गया और चारा दिया गया, उसकी बेबस आंखों में जवानों के लिए एक अजीब सी कृतज्ञता और दुआएं साफ नजर आ रही थीं। इस मानवीय कार्य के बाद तुरंत पशुपालन विभाग को सूचित किया गया ताकि उसका उचित इलाज हो सके।
आज इन जांबाज जवानों ने यह साबित कर दिया कि वर्दी का धर्म सिर्फ कानून की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि हर जीव की सेवा करना भी है।









