शिक्षक दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 समारोह में उत्तराखण्ड का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर रोशन हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान के हाथों चम्पावत जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजू बाला को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
क्यों मिला यह सम्मान?
डॉ. मंजू बाला को यह पुरस्कार त्रिभाषा तकनीक (Three Language Technique) के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाने के लिए मिला। इस तकनीक ने बच्चों को भाषा की जटिलताओं से बाहर निकालते हुए सीखने की प्रक्रिया को रोचक और सहज बनाया।
इस उपलब्धि के साथ ही वे उत्तराखण्ड की पहली महिला प्रधानाध्यापिका बन गई हैं जिन्हें यह राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त हुआ है। उनका योगदान राज्य के शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है।
शिक्षा में नवाचार और योगदान
डॉ. बाला ने अपने विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कई नई पहलें लागू कीं, जिनमें शामिल हैं-
- मातृभाषा आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना।
- विद्यार्थियों के लिए समावेशी शिक्षण वातावरण तैयार करना।
- गतिविधि-आधारित शिक्षा द्वारा आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना।
- Foundational Literacy and Numeracy (FLN) को मजबूत करने के लिए TLM (Teaching Learning Material) आधारित गतिविधियाँ अपनाना।
- सतत मूल्यांकन प्रणाली विकसित करना, जिससे विद्यार्थियों को सुधारात्मक सहयोग मिल सके।
तकनीकी और सामाजिक पहलें
डॉ. मंजू बाला ने विद्यालय में तकनीक और जागरूकता दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश की।
- स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल सामग्री का उपयोग कर शिक्षण को आधुनिक बनाया।
- सुरक्षित और प्रेरणादायक स्कूल वातावरण तैयार किया।
- बाल सभा का आयोजन कर बच्चों को नेतृत्व के अवसर दिए।
- मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाकर सामाजिक शिक्षा में भी योगदान दिया।
उत्तराखण्ड की प्रगति में योगदान
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखण्ड ने गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। डॉ. मंजू बाला जैसी शिक्षिकाओं की उपलब्धि इस प्रगति को और मजबूती देती है तथा राज्य की शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाती है।
डॉ. मंजू बाला की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि समर्पित शिक्षक शिक्षा को सिर्फ ज्ञान का माध्यम नहीं बल्कि समाज और भविष्य निर्माण की ठोस नींव मानते हैं।









