उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ स्थित मुनस्यारी के रहने वाले विक्की सिंह तोमक्याल (Vicky Singh Tomkyal) इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने संघर्षों के कारण चर्चा में हैं। मात्र 24 वर्ष के विक्की दिनभर मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) की कड़ी ट्रेनिंग कर अपने लक्ष्य की तैयारी करते हैं और रात में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करके अपने परिवार और अपने सपनों दोनों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं।
उनकी इस प्रेरणादायक कहानी ने यह सिद्ध कर दिया है कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों, कड़े अनुशासन और निरंतर मेहनत से प्राप्त होती है।
दिन में फाइटर, रात में सिक्योरिटी गार्ड
जहां अधिकांश पेशेवर खिलाड़ियों को आधुनिक जिम, महंगे उपकरण और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सुविधा मिलती है, वहीं विक्की सिंह तोमक्याल का सफर बिल्कुल भिन्न है। सीमित संसाधनों के बावजूद वे हर दिन घंटों तक अभ्यास करते हैं और रात में सिक्योरिटी गॉर्ड की नौकरी कर अपनी आजीविका चलाते हैं।
सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी से मिलने वाली तनख्वाह का बड़ा हिस्सा वे अपने परिवार की जिम्मेदारियों और आगामी मुकाबलों की तैयारी पर खर्च करते हैं। उनके लिए हर दिन संघर्ष और सपनों के बीच सामंजस्य बनाने की चुनौती है।
सीमित संसाधनों में जारी है अभ्यास
विक्की का अभ्यास किसी हाई-टेक ट्रेनिंग सेंटर में नहीं बल्कि खुले मैदानों और साधारण स्थानों पर होता है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में वे बेहद साधारण तरीकों से अपनी फिटनेस और तकनीक को बेहतर बनाते नजर आते हैं।
कभी वे भारी टायर उठाकर ताकत बढ़ाते हैं, तो कभी पुल-अप्स, प्लैंक, रेसलिंग और वेट एक्सरसाइज करते हैं। एक वीडियो में उन्होंने गैस सिलेंडर पर तकिया बांधकर किकिंग का अभ्यास किया, जिसने लोगों का खूब ध्यान आकर्षित किया। यह दिखाता है कि यदि इरादा मजबूत हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।
अनुशासन और फिटनेस पर विशेष ध्यान
विक्की सिंह तोमक्याल अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नियमित रूप से अपनी ट्रेनिंग, फिटनेस रूटीन और डाइट से जुड़े वीडियो पोस्ट करते हैं। लगभग 17 हजार से अधिक फॉलोअर्स उनके संघर्ष और मेहनत से प्रेरणा लेते हैं।
वे अपने प्रशंसकों को बताते हैं कि किसी भी खिलाड़ी के लिए अनुशासन, सही खान-पान और निरंतर अभ्यास सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
विदेश जाने की सलाह पर दिया भावुक जवाब
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने विक्की को बेहतर अवसरों के लिए विदेश जाने की सलाह दी। लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे भारत में रहकर ही अपना सपना पूरा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि कई लोग उन्हें अलग-अलग देशों में आने का सुझाव देते हैं, लेकिन वे अपने देश में ही खुश हैं। उनका मानना है कि यदि भारत में हर खेल और हर खिलाड़ी को समान समर्थन मिले तो देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि केवल क्रिकेट ही नहीं, बल्कि हर खेल को बराबर महत्व और प्यार मिलना चाहिए। यदि खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलेगा तो भारत दुनिया के सामने नई-नई प्रतिभाएं पेश कर सकता है।
सोशल मीडिया पर मिल रहा भरपूर समर्थन
विक्की की संघर्षभरी दास्तां ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है। उनके वीडियो पर लोग उनकी मेहनत, समर्पण और जज्बे की सराहना कर रहे हैं। कई लोग उन्हें आर्थिक सहायता, बेहतर प्रशिक्षण और प्रायोजन (स्पॉन्सरशिप) मिलने की भी मांग कर रहे हैं।
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं।
संघर्ष ही है असली पहचान
विक्की सिंह तोमक्याल की यह जर्नी इस बात का प्रमाण है कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए हमेशा बड़ी और आधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता नहीं होती। मेहनत, लगन, धैर्य और आत्मविश्वास किसी भी व्यक्ति को सफलता की ओर ले जा सकते हैं।
उत्तराखंड के इस युवा खिलाड़ी ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं। आज विक्की केवल एक MMA फाइटर नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए संघर्ष, आत्मविश्वास और उम्मीद के प्रेरणास्रोत बन चुके हैं।











