उत्तराखण्ड (बागेश्वर) |  कपकोट ब्लॉक के झूनी ग्राम पंचायत में स्थित एक सुन्दर पहाड़ी से पतित पावनी सरयू का उद्गम होता है। यहाँ से छोटी-छोटी सौ धाराओं में निकलकर सरयू अविरल बहना शुरू करती है। सरयू के इस उद्गम स्थल को सरमूल कहा जाता है।  जिस स्थल पर मां सरयू धरती पर उतरती हैं उस जगह को 'सौधारा' कहते हैं। यहाँ पर सरयू मैया का मंदिर बनाया गया है। यहाँ हर वर्ष वैशाखी पूर्णिमा का मेला लगता है। क्षेत्र के लोग यहाँ अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध तर्पण हेतु आते हैं। सौ-धारा में लोग बच्चों के जनेऊ संस्कार भी कराते हैं। शिव पुराण में सहस्रधारा का वर्णन है।
Origin of Saryu
Origin of Saryu River |  सरयू का उद्गम स्थल

विश्व विख्यात पिंडारी ग्लेशियर मार्ग के पास होते हुए भी पतित पावनी सरयू का यह उद्गम स्थल आज भी धार्मिक पर्यटकों की पहुँच से दूर है। क्षेत्र के लोग इस स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने में प्रयासरत हैं।

सरयू नदी के उद्गम स्थल सरमूल तक कैसे पहुंचें ?

- यदि आप दिल्ली से आ रहे हैं तो नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। यहाँ से आप सीधा भीमताल, भवाली, अल्मोड़ा, ताकुला, बागेश्वर होते हुए कपकोट तक आ सकते हैं। यहाँ के लिए आसानी से KMOU की बस उपलब्ध रहती हैं। हल्द्वानी से कपकोट (भराड़ी) या बागेश्वर तक टैक्सी भी उपलब्ध रहती हैं। कपकोट (भराड़ी), सौंग, मुनार होते हुए आप तरसाल तक गाड़ी से जा सकते हैं। पैदल पतियासार, सूपी, तलाई के मनोहर दृश्यों को देखते हुए आपको झूनी गांव जाना होगा। यहीं झूनी गांव के पास ही एक सुन्दर पहाड़ी से सरयू का उद्गम होता है।  


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