'सिर-पंचमी ' (बसंत पंचमी )

आज बसंत पंचमी  है, जिसे उत्तराखण्ड में 'सिर-पञ्चमी' के नाम से मनाते हैं। आज के दिन उत्तराखण्ड में लोग सुबह स्नान कर अपने देवी-देवताओं के थान और घर को गाय के गोबर से लीपते हैं। उसके बाद अक्षत-पिठ्याँ और धूप-दीप जलाकर जौं के खेत में जाते हैं और वहां पर जौं के पौधों की पूजा कर उन्हें उखाड़कर घर में लाते हैं। इन पौधों पर सरसों का तेल लगाया जाता है। परिवार के सभी लोग स्नान कर अक्षत-पिठ्याँ लगाते हैं। महिलायें 'जी रये, जागी रये.…' शुभकामना के साथ छोटे बच्चों के सिर में खेत से लाये जौ के पौधे को रखती हैं और घर की बेटी अपने से बड़ों के सिर में इस जौ के पौधे रखकर शुभआशीष प्राप्त करती है। महिलायें लाल मिट्टी का गारा बनाकर घर के दरवाज़ों और छज्जों के चौखटों पर इस जौ के पौधों को लगाती हैं। विवाहित बेटियां इस पर्व पर भी अपने मायके आती हैं। हमारे बुजुर्ग आज भी इस पर्व पर अपनी पारंपरिक टोपी में जौ के पौधे को लगाये रखते हैं। घर में खीर, पूड़ी, हलुवा,पुवे, बाड़े इत्यादि पकवान बनाये जाते हैं। घर के वरिष्ठ अपने ईष्ट देवों और अपने पितरों की पूजा कर इन पकवानों को अर्पित करते हैं। तत्पश्यात छोटे बच्चों और मायके आयी बेटी को पकवान खिलाये जाते हैं। आज के ही दिन पहाड़ों में छोटे बच्चों के नाक-कान छेदे जाते हैं। आज भी उत्तराखण्ड में 'सिर-पंचमी '/ श्री-पंचमी ' का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आप सभी को बसंत ऋतु के आगमन पर स्वागत पर्व 'बसंत पंचमी  / 'सिर पंचमी
बसंत पंचमी Basant Panchami
' की हार्दिक शुभकामना। 

आईये, नई ऋतु से, नए संकल्पों के साथ नये उत्तराखण्ड के नवनिर्माण का संकल्प लें।

Comments

Popular posts from this blog

Phooldei फूलदेई- उत्तराखंड का एक लोकपर्व।

Kashil Dev | कपकोट और काशिल देव।

Chirpat Kot Temple - चिरपतकोट धाम | धार्मिक और साहसिक पर्यटन की अपार सम्भावनायें।