Delhi Dehradun Expressway बनकर तैयार है और 14 अप्रैल के दिन बैसाखी के अवसर पर इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जा रहा है। यह एक्सप्रेस-वे बेहद ख़ास है क्योंकि इस पर बना है 12 किमी लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर। यह कॉरिडोर एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर माना जा रहा है, जो वन्य जीवों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करेगा और मानव-वन्य जीव संघर्ष को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। यहाँ गाड़ियों की रफ़्तार भी होगी और वन्य जीवों का अपना संसार भी होगा।
Delhi Dehradun Expressway Elevated Corridor
Delhi Dehradun Expressway विशेष रूप से उन संवेदनशील वन क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जहां जैव-विविधता अत्यंत समृद्ध है। एक्सप्रेस-वे का अंतिम 20 किलोमीटर का भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन क्षेत्र और उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने जंगलों से होकर गुजरता है। ऐसे में इस कॉरिडोर का निर्माण वन्य जीवों के संरक्षण के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
साउंड बैरियर और लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं
इस परियोजना के तहत वन्य जीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए आधुनिक संरचनाएं विकसित की गई हैं। इसमें हाथियों के लिए ख़ास अंडरपास के साथ अन्य वन्य जीवों के लिए भी कई अंडरपास बनाए गए हैं। इसके अलावा साउंड बैरियर और लाइट बैरियर जैसी व्यवस्थाएं इस एलिवेटेड कॉरिडोर में हैं, जिससे यहाँ गाड़ियों और इनके टायरों की आवाज, हॉर्न तथा प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव बेहद कम रहे और वन्य जीवों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
लगाएं गए हैं 1.95 लाख पौधे
इस परियोजना के पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण भी किया गया है। यहाँ कुल 165.5 हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 1.95 लाख पौधे लगाए गए हैं। साथ ही वन एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए इको-रेस्टोरेशन कार्यों पर 40 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी खर्च की जा रही है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया जा सके।
33,840 पेड़ों को कटने से बचाया
यहाँ दिलचस्प बात यह है कि प्रारंभ में इस परियोजना के लिए करीब 45 हजार पेड़ों के कटने का अनुमान था, लेकिन आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के चलते कुल 33,840 पेड़ों को कटने से बचा लिया गया। अंततः मात्र 11,160 पेड़ों की ही कटाई करनी पड़ी, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सकारात्मक प्रयासों को दिखाता है।
240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी
इस Elevated Corridor का प्रभाव केवल वन्य जीवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी सहायक सिद्ध होगा। अनुमान है कि इस एलिवेटेड कॉरिडोर के बनने से अगले 20 वर्षों में लगभग 240 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो 60 से 68 लाख पेड़ों द्वारा अवशोषित कार्बन के बराबर है। इसके साथ ही करीब 19 प्रतिशत ईंधन की बचत भी संभव होगी।
सृजित होने रोजगार के अवसर
यह Elevated Wildlife Corridor वन्य जीवों के लिए सुरक्षित और सुगम मार्ग देगा, जिससे विभिन्न प्रजातियों के बीच बेहतर आनुवंशिक आदान-प्रदान बेहतर होगा और जैव विविधता को मजबूती मिलेगी। साथ ही, एक्सप्रेस-वे के निर्माण से यात्रा समय में कमी आएगी और पर्यटन, व्यापार तथा स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
कुल मिलाकर, दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना यह एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर आधुनिक विकास और प्रकृति संरक्षण के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल के रूप में देखा जा रहा है। आज जब दुनिया विकास और पर्यावरण के बीच सामंजस्य कैसे हो के उपाय खोज रही है, ऐसे में दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बना यह एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर हम सभी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है जहाँ सड़क भी बनी है, जंगल भी सुरक्षित है और वहां का वाइल्ड लाइफ भी प्रभावित नहीं हुआ है।








