बद्रीनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं, अगर आप इस साल बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने जा रहे हैं तो बस यह आर्टिकल पढ़ लो और केवल दो दिन एक्स्ट्रा लेकर चलना… आपके सात बद्री के दर्शन हो जायेंगे, आपकी सप्तबद्री यात्रा पूर्ण हो जाएगी। एक और बात, अगर आप पैदल ज्यादा नहीं भी चल सकते तो भी कोई बात नहीं, आपको कहीं भी ज्यादा चढ़ाई वगैरह नहीं करनी… बस कहीं कुछ 50-60 सीढियाँ चढ़ना उतरना हैं तो कहीं करीब 300 से 400 मीटर सामान्य सा चढ़ना हैं। इस यात्रा में ना केवल सात बद्री के दर्शन होंगे बल्कि पंच केदार में से एक केदार के भी आपको दर्शन हो जायेंगे।
सप्त बद्री यात्रा ( Sapta Badri Yatra) का रूट और उनकी संक्षिप्त परिचय:
बद्रीनाथ (मुख्य मंदिर)
वैसे तो ऋषिकेश से बद्रीनाथ बीच में ही कुछ बद्री मंदिर आते हैं, पर हम शुरुवात बद्रीनाथ के मुख्य मंदिर से करते हैं जो कि भारत के चार धामों में से एक धाम हैं। नर -नारायण पर्वत के बीच यह मंदिर बना हुआ हैं। हिन्दू धर्म का एक सबसे बड़ा धाम हैं यह, इसलिए इसके बारे में सबको पता हैं। बद्रीनाथ से सुबह जल्दी वापसी करें और आगे बताये हुए कार्यक्रम के हिसाब से दर्शन करते हुए जाए। जब आपके बद्रीनाथ दर्शन हो जाते हैं तो आप वापस ऋषिकेश की तरफ जाने के लिए जोशीमठ की तरफ ही बढ़ते हैं तो ऋषिकेश की तरफ लौटने वाले इसी रास्ते पर ही एक बद्री मंदिर बना हुआ हैं जो हैं योग ध्यान बद्री।
योग ध्यान बद्री (पांडुकेश्वर)
बद्रीनाथ से केवल 15 किमी ही आप चलेंगे कि मुख्य रोड पर ही पांडुकेश्वर नामक एरिया में योग ध्यान बद्री मंदिर आ जायेगा। आपको यहाँ पैदल ही कुछ सीढियाँ उतरकर पहाड़ी से निचे बने गाँव में जाना होगा। पांडवो के पिता पाण्डु की मृत्यु यही हुई थी, पाण्डु के अंतिम दिनों में इसी जगह भगवान विष्णु ने उन्हें अपने दर्शन दिए थे। यहाँ दो प्राचीन मंदिर के दर्शन आप करेंगे, जो ASI द्वारा प्रोटेक्टेड हैं। समय : एक घंटा
नरसिंह बद्री (ज्योतिर्मठ)
यह मंदिर योग ध्यान बद्री से आगे बढ़ने पर ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के मुख्य बाजार में मिलेगा। यहाँ विष्णु भगवान् के चौथे अवतार भगवान विष्णु की पूजा होती हैं …. यहाँ जो मूर्ति हैं उसका एक हाथ क्षींण होता जा रहा हैं, जब यह हाथ धड़ से अलग हो जायेगा तब नर नारायण पर्वत आपस में मिल जायेंगे और फिर बद्रीनाथ धाम का रास्ता बंद हो जायेगा ,तब उनकी पूजा की जायेगी भविष्य बद्री में। समय : तीन घंटे
भविष्य बद्री (नीती घाटी)
जोशीमठ से इसका रूट थोड़ा अलग पड़ेगा। जोशीमठ से 16 किमी दूर निति घाटी में बना हुआ हैं यह मंदिर। मंदिर की समुद्रतल से ऊंचाई 2800 मीटर हैं और गाड़ी को कुछ जगह कुछ चैलेंजिंग चढ़ाई भी मिलेगी। यहाँ आपको कुछ 300 -400 मीटर पैदल चलना होगा ,लेकिन यह मंदिर आपको सातों बद्री में सबसे शांत और सुकून भरा लगेगा। चारो तरफ बर्फीली पहाड़ियां, बड़े बड़े पेड़, दूर दूर तक कोई नहीं सिवाय इस मंदिर के। यहाँ की मूर्ति धीरे धीरे जमीन से प्रकट होती जा रही हैं जो भविष्य में नर नारायण पर्वत की घटना के बाद पूर्ण प्रकट हो जायेगी। समय : आधा घंटा
वृद्ध बद्री (अणीमठ)
भविष्य बद्री से फिर जोशीमठ आओ, जोशीमठ से ऋषिकेश की तरफ मात्र 7 किमी बढ़ेंगे कि दायी तरफ एक बोर्ड नजर आ जायेगा जिस पर इस मंदिर का नाम लिखा होगा। यहाँ भी आपको कुछ 100 -150 सीढियाँ चढ़नी उतरनी होगी। यहाँ भगवान विष्णु की मूर्ति वृद्ध रूप में हैं क्योंकि इसी जगह उन्होंने नारद मुनि को वृद्ध रूप में दर्शन दिए थे। यहाँ से आगे बढ़कर आप “हेलंग” जाकर रात रुक जाए। समय : आधा घंटा
ध्यान बद्री एवं कल्पेश्वर महादेव (उर्गम घाटी)
हेलंग से आपको सुबह जल्दी उर्गम घाटी की तरफ जाना होगा। यह रास्ता काफी टूटा फूटा और एकदम ख़राब मिलता हैं ,यहाँ एक्सपर्ट ड्राइवर ही गाडी चलाये। क्योंकि कई जगहों पर गाडी के घुमाव और साथ में चढ़ाई बहुत दुर्गम तरह की मिलेगी। यह जगह सबसे कठिन बद्री माना जा सकता हैं। लेकिन इसी एक ही जगह पर एक बद्री मतलब ध्यान बद्री और एक केदार मतलब कल्पेश्वर केदार के दर्शन हो जाएंगे। यहाँ विष्णु भगवान की मूर्ति ध्यान अवस्था में हैं। समय : 5 से 6 घंटे
आदिबद्री (कर्णप्रयाग के पास)
आप वापस हेलंग आ जाए और कर्णप्रयाग तक पहुंचे। कर्णप्रयाग से 18 किमी दूर स्थित हैं आदिबद्री। यह प्रथम बद्री हैं, यहाँ मंदिरों का एक समूह हैं। पैदल बिलकुल नहीं चलना होगा यहाँ। कहते है बद्रीनाथ से पहले विष्णु भगवान की पूजा इसी जगह बद्री के रूप में होती थी। समय :आधा घंटा
अब आप वापस कर्णप्रयाग पहुंच कर सीधे ऋषिकेश की तरफ आगे बढ़ सकते हैं। इसी तरह आपकी पंचबद्री एवं एक केदार की यात्रा आसानी से हो सकती हैं। शुभ यात्रा।
लेख – श्री ऋषभ भरावा










