उत्तराखंड में चारधाम यात्रा-2026 का भव्य आगाज हो गया है। आस्था और श्रद्धा के इस महापर्व में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु हिमालय की गोद में स्थित पवित्र धामों के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस धार्मिक यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने स्वच्छता, प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता, सेवा, सहयोग व एकता पर बल, वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा, अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन- इन पांच संकल्पों का आग्रह किया है।
चारधाम यात्रियों के नाम प्रेषित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पूरा पत्र-
मेरे प्यारे देशवासियों,
देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो गया है। 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुल चुके हैं और आज से केदारनाथ धाम की यात्रा प्रारंभ हो रही है। 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे।
बाबा केदार के दर्शन सहित चारों धामों की यह पावन यात्रा भारत की सनातन सांस्कृतिक चेतना का एक भव्य उत्सव है। जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ और केदारनाथ की यात्राओं से भारतीय संस्कृति को एक नई दिशा दी थी। जगद्गुरु रामानुजाचार्य और जगद्गुरु मध्वाचार्य ने भी अपने धर्मविचारों को समृद्ध करने के लिए बद्रीनाथ की यात्रा की थी।
आज भी हिमालय की गोद में स्थित ये चारों धाम हमारी शाश्वत आस्था और विश्वास के केंद्र हैं। हर वर्ष विविध भाषाओं, परंपराओं और संस्कृतियों के लोग यहाँ पहुँचते हैं और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के भाव को और अधिक सशक्त करते हैं। इस वर्ष की यात्रा भी इसी परंपरा का विस्तार है।
हमारे शास्त्रों में कहा गया है-
अग्निष्टोमादिभिर्यज्ञैरिष्टा विपुलदक्षिणैः ।
न तत्फलमवाप्नोति तीर्थाभिगमनेन यत् ॥
भाव यह है कि बड़े-बड़े यज्ञों और दान आदि से हमें अपार पुण्य प्राप्त होते हैं। और इन अनुष्ठानों से भी कहीं अधिक पुण्य, हमें तीर्थ यात्राओं से प्राप्त होता है।
विकसित भारत के संकल्प में विकसित उत्तराखंड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुछ वर्ष पहले, बाबा केदार के द्वार पर मैंने कहा था कि यह दशक उत्तराखंड का दशक होगा। आज उत्तराखंड की प्रगति इस विश्वास को साकार कर रही है। उत्तराखंड आज पर्यटन, आध्यात्मिकता और आर्थिक प्रगति, तीनों क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में विकास का जो महायज्ञ चल रहा है, उसने चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम, सुरक्षित और दिव्य बनाया है। इससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं, संतों और पर्यटकों को बहुत सुविधा हो रही है। इन सारे कार्यों में उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता का ध्यान रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
मैं उत्तराखंड आने वाले हर अतिथि से भी कहूंगा कि वो इस नए अनुभव का आनंद जरूर लें। सभी यात्री अपनी यात्रा के दौरान डिजिटल व्यवस्था रखने और उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को जीने का प्रयास भी करें। इससे आपको एक अलग संतुष्टि भी मिलेगी।
चारधाम की हर यात्रा में हम एक संकल्प लेकर अपने मूल स्थान से देवभूमि के लिए आते रहे हैं। इसी क्रम में, मैं भी आपसे पांच संकल्पों का आग्रह करना चाहता हूँ:
- पहला संकल्प – स्वच्छता सर्वोपरि:
- धाम और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखें। नदियों को साफ रखने के लिए अपना योगदान दें। सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त यात्रा का संकल्प लें और इस पावन धरा की गरिमा को बनाए रखें।
- दूसरा संकल्प – प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता:
- हिमालय की इस दिव्य धरा के प्रति संवेदनशील रहें। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हुए, ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी प्रभावी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें।
- तीसरा संकल्प – सेवा, सहयोग और एकता पर बल:
- पुरातन काल से हमारी तीर्थ यात्राएं समाज की सेवा और सामुदायिक समरसता को स्थापित करने का माध्यम रही हैं। आज भी लोग इसी सेवा भाव से तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। मैं चारधाम आने वाले हर तीर्थयात्री से भी आग्रह करता हूं कि वो अपनी यात्रा के हर दिन, किसी ना किसी रूप में, लोगों की सेवा का एक काम अवश्य करें। सहयात्रियों की सहायता करें और देश की विभिन्न जगहों से आए लोगों से जुड़ें। उनकी परंपराओं का सहभागी बनकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को इस यात्रा के माध्यम से सशक्त करें।
- चौथा संकल्प – वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा:
- अपने मूल स्थान से चलकर यात्रा से घर लौटने तक अपने कुल खर्च का पांच प्रतिशत हिस्सा लोकल उत्पादों को खरीदने पर जरूर खर्च करें। अगर किसी स्थानीय चीज़ की ज़रूरत इस मौसम में नहीं भी है, तो भी उसे भविष्य के इस्तेमाल के भाव से ही खरीदने का प्रयास करें।
- पांचवां संकल्प – अनुशासन, सुरक्षा और मर्यादा का पालन:
- यात्रा के नियमों और यातायात निर्देशों का पालन करें। एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में इस तीर्थ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाएं। हम ये प्रयास करें कि हमारी यात्रा से, इस यात्रा के आयोजन और प्रबंधन में जितने भी लोग लगे हुए हैं, उन्हें कोई असुविधा ना हो।
हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में हमारे क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स चारधाम दर्शन के लिए जाने लगे हैं। मैं सभी से ये आग्रह करूंगा कि वो उत्तराखंड की स्थानीय कहानियों और यहां की छोटी-छोटी परंपराओं को भी जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करें।
मुझे विश्वास है कि इन संकल्पों के साथ आपकी यह यात्रा एक अनुपम अनुभव से जुड़ेगी। चारधाम यात्रा का हर पड़ाव आपको प्रकृति की पवित्रता, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों से और अधिक जोड़ेगा।
बाबा केदार के साथ ही चारों धामों का आशीर्वाद आपके जीवन में नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नए संकल्पों का संचार करे। मेरी यही कामना है।
आप सभी को एक सफल, सुरक्षित, दिव्य और आत्मीय यात्रा के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।
सादर,
नरेन्द्र मोदी
आशा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन 5 संकल्पों को अपनाकर आप अपनी यात्रा को न केवल सफल, बल्कि समाज और पर्यावरण के लिए भी सार्थक बनाएंगे।







