उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के लिए निर्धारित समय-सारिणी को आंशिक संशोधन करते हुए नई समय-सारिणी जारी कर दी है। यह आदेश 6 अप्रैल 2026 को माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-1 द्वारा जारी किया गया है, जिसमें गर्मी और सर्दी के मौसम के अनुसार विद्यालयों के संचालन का समय निर्धारित किया गया है।
यह आदेश उत्तराखंड सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी किया गया है, जो 06 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जायेगा। नई समय-सारिणी के अनुसार विद्यालयों के समय को दो हिस्सों – ग्रीष्मकालीन (01 अप्रैल से 30 सितंबर) और शीतकालीन (01 अक्टूबर से 31 मार्च) में विभक्त किया गया है।
Uttarakahdn School New Time Table 2026
ग्रीष्मकालीन समय-सारिणी (01 अप्रैल – 30 सितंबर)
- प्रार्थना सभा: प्रातः 07:45 से 08:05
- पहला वादन : प्रातः 08:05 से 08:45
- दूसरा वादन : प्रातः 08:45 से 09:25
- तीसरा वादन : प्रातः 09:25 से 10:05
- चौथा वादन : प्रातः 10:05 से 10:45
- मध्यावकाश: प्रातः 10:45 से 11:25
- पांचवां वादन : प्रातः 11:25 से 12:05
- छठा वादन : मध्यान्ह 12:05 से 12:45
- सातवां वादन : मध्यान्ह 12:45 से 01:25
- आठवां वादन : अपरान्ह 01:25 से 02:05
शीतकालीन समय-सारिणी (01 अक्टूबर – 31 मार्च)
- प्रार्थना सभा: प्रातः 08:50 से 09:10
- पहला वादन : प्रातः 09:10 से 09:50
- दूसरा वादन : प्रातः 09:50 से 10:30
- तीसरा वादन : प्रातः 10:30 से 11:10
- चौथा वादन : प्रातः 11:10 से 11:50
- मध्यावकाश: प्रातः 11:50 से 12:30
- पांचवां वादन : मध्यान्ह 12:30 से 01:10
- छठा वादन : अपरान्ह 01:10 से 01:50
- सातवां वादन : अपरान्ह 01:50 से 02:30
- आठवां वादन : अपरान्ह 02:30 से 03:10
क्या है खास?
- हर वादन की अवधि 40 मिनट तय की गई है।
- प्रार्थना सभा के लिए 20 मिनट निर्धारित किए गए हैं।
- यह संशोधन वर्ष 2018 में जारी आदेश में आंशिक बदलाव के रूप में लागू किया गया है।
प्रशासन का निर्देश
शासन ने स्पष्ट किया है कि यह नई समय-सारिणी तत्काल प्रभाव से लागू होगी और सभी विद्यालयों को इसका पालन करना अनिवार्य होगा। साथ ही, पूर्व में जारी अन्य नियम और शर्तें यथावत लागू रहेंगी। ज्ञात हो इससे पहले सरकार ने वर्ष 2018 में विद्यालयों की समय सारिणी में संशोधन किये थे।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों के स्वास्थ्य, मौसम के प्रभाव और पढ़ाई के संतुलन को ध्यान में रखते हुए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।










