खाकी के भीतर छिपी इंसानियत: मौत के मुहाने से बेजुबान को खींच लाए देवदूत!

मौत के मुंह से बेजुबान को सुरक्षित बाहर निकाला। 14 मार्च को जनपद चमोली गढ़वाल के दीवालीखाल से लगभग 2 किलोमीटर दूर एक गाय पिछले 2–3 दिनों से सड़क से नीचे एक स्क्रबर के पास पेड़ों की टहनियों में फंसी हुई थी। जवानों ने अथक प्रयास कर उसे सकुशल बाहर निकालकर इंसानियत का परिचय दिया। विस्तृत में नीचे पढ़ें -

Uttarakhand police service

HIGHLIGHTS

  1. उत्तराखंड पुलिस ने दिखाई इंसानियत, मौत के मुंह से गाय को बचाया।
  2. चमोली के दीवालीखाल के पास 2–3 दिनों से टहनियों में फंसी थी गाय।
  3. फायर और पुलिस कर्मियों ने मिलकर चलाया रेस्क्यू अभियान।
  4. घंटों की मशक्कत के बाद सकुशल बाहर निकालकर पिलाया पानी और दिया चारा।
  5. जवानों की संवेदनशीलता ने मानवता की अनोखी मिसाल पेश की।

उत्तराखंड न्यूज़ । कहते हैं कि वर्दी के पीछे एक सख्त इंसान होता है, लेकिन आज उत्तराखंड पुलिस के जांबाज जवानों ने साबित कर दिया कि उस वर्दी के भीतर एक बेहद संवेदनशील और कोमल दिल भी धड़कता है। विधानसभा बजट सत्र की थकान को दरकिनार कर, इन जवानों ने एक बेजुबान की जान बचाकर इंसानियत की नई मिसाल पेश की है।

Uttarakhand Police Saved Cow

घटना आज (14 मार्च) की है, जब विधानसभा सत्र की समाप्ति के बाद फायर कर्मी अनूप सरकारी वाहन से वापस लौट रहे थे। दीवालीखाल से करीब 2 किलोमीटर आगे आदिबद्री की ओर बढ़ते समय अचानक उनकी नजर सड़क से नीचे एक स्क्रबर के पास पड़ी। वहां एक बेचारी गाय पेड़ की दो टहनियों के बीच अपनी गर्दन फंसाए जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी।

Uttarakhand Police Humanity

अनूप ने तुरंत मोर्चा संभाला और वहां से गुजर रहे यजुवेंद्र रावत व पुलिस कार्यालय के अन्य कर्मियों को इसकी सूचना दी। देखते ही देखते ड्यूटी से लौट रहे फायर स्टेशन ज्योतिर्मठ और उत्तरकाशी पुलिस के जवान भी अपनी गाड़ियों से उतर पड़े। सभी ने अपनी थकान को भुलाकर एक टीम के रूप में ‘पुण्य’ का यह कार्य शुरू किया। गाय पिछले 2-3 दिनों से भूखी-प्यासी वहां फंसी हुई थी और हिलने तक की ताकत नहीं बची थी। लेकिन जवानों के ‘अथक प्रयास’ रंग लाए। घंटों की मशक्कत के बाद टहनियों के जाल को काटकर गाय को सकुशल बाहर निकाला गया और कंधे से कंधा मिलाकर उसे सुरक्षित सड़क तक लाया गया।

जैसे ही गाय को पानी पिलाया गया और चारा दिया गया, उसकी बेबस आंखों में जवानों के लिए एक अजीब सी कृतज्ञता और दुआएं साफ नजर आ रही थीं। इस मानवीय कार्य के बाद तुरंत पशुपालन विभाग को सूचित किया गया ताकि उसका उचित इलाज हो सके।

आज इन जांबाज जवानों ने यह साबित कर दिया कि वर्दी का धर्म सिर्फ कानून की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि हर जीव की सेवा करना भी है।

Vinod Singh Gariya

ई-कुमाऊँ डॉट कॉम के फाउंडर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। इस पोर्टल के माध्यम से वे आपको उत्तराखंड के देव-देवालयों, संस्कृति-सभ्यता, कला, संगीत, विभिन्न पर्यटक स्थल, ज्वलन्त मुद्दों, प्रमुख समाचार आदि से रूबरू कराते हैं।

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