उत्तराखण्ड के हजारों गांव आज भी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क से गांव की दूरी 5 से 25 किलोमीटर और कुछ गांव इससे भी अधिक दूर हैं। यहाँ लोग आज भी मीलों पैदल और पीठ में जरुरी सामान लेकर चलते हैं। इस दूरी को गॉंवों में रहने वाले लोग बड़े आराम से तय कर लेते हैं लेकिन गांव से रोजगार के लिए शहरों में रह रहे लोग खासकर युवा वर्ग जब अपने घर को लौटते हैं तो उन्हें यह दूरी बिलकुल भी रास नहीं आती है। आज हमें घर तक पहुँचने के लिए सड़क चाहिए, अच्छी शिक्षा के लिए विद्यालय चाहिए और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अस्पताल चाहिए। हमारे बुजुर्गों ने अपने दम पर सामाजिक भागीदारी से अच्छे रास्ते बनाये, मीलों पानी की गूलें खोदी, शिक्षा के लिए मीलों चले, दर्जनों रोगियों को डोली में बिठाकर अस्पताल तक ले गए लेकिन आज हम सरकारी सुविधाओं के भरोसे बैठ गए। गॉंवों में राजनीति हावी हो चुकी है। विकास कार्यों हेतु हर वर्ष सैकड़ों आश्वासन मिलते हैं। इन्हीं आश्वासनों के भरोसे आज हम और हमारे गांव विकास की दौड़ में पीछे छूटते जा रहे हैं।

श्रमदान कर सड़क बनाते पिथौरागढ़ स्थित टुंडा चौड़ा गांव का युवावर्ग। (Photo : Gopu Bisht)
इस सरकारी भरोसे के उलट एक दृश्य पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट तहसील स्थित टुंडा चौड़ा गांव से देखने को मिला है। कोरोना महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान अपने गांव लौटे दर्जनों युवाओं ने इन सियासी आश्वासनों को दरकिनार कर अपने गांव को सड़क से जोड़ने का बीड़ा उठा लिया है। इस कार्य में उनको साथ मिला है गांव  की नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान श्रीमती मनीषा देवी और उनके पति गोविन्द सिंह का। युवावर्ग हर रोज सुबह 5 बजे से अपने इस सड़क निर्माण कार्य में जुट जा रहे हैं। इनके इस पुनीत और निःस्वार्थ भाव से किये जा रहे कार्य को अब पूरे ग्रामीणों ने सराहा है। वे भी अब श्रमदान कर उनकी इस मुहिम में सम्मिलित हो चुके हैं। पहाड़ की रीढ़ कही जाने वाली महिलाएं भी सड़क निर्माण में अपना योगदान दे रही हैं। आसपास के गॉंवों के समाजसेवी लोग भी युवाओं के इस कार्य से प्रभावित होकर उनसे मिलते पहुँच रहे हैं और सड़क निर्माण हेतु श्रमदान कर रहे हैं। लोग उचित सामाजिक दूरी बनाकर इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं। 

मुख्य सड़क से टुंडा चौड़ा गांव की दूरी करीब 4 किलोमीटर है। 100 परिवारों वाले इस गांव में पलायन अन्य पहाड़ी गाँवों की अपेक्षा काफी कम है। सैन्य बाहुल्य इस गांव में आज भी लोग 4 किलोमीटर की दूरी तय कर आवागमन करते हैं। युवाओं द्वारा श्रमदान कर गांव तक सड़क पहुँचाने के लक्ष्य से प्रभावित होकर लोगों ने सड़क बनाने के लिए अपने खेत और भूमि दान में दे दी है। ताकि पूरा उनका गांव और उनके समीपवर्ती गांव के लोगों को इसका लाभ मिल सके। लोगों का कहना है इस सड़क के बनने से आसपास के करीब 5-6 गांवों को लाभ प्राप्त होगा। घर से विद्यालय की दूरी अधिक होने के कारण पढ़ाई छोड़ देने वाली बेटियां भी आगे की पढ़ाई जारी रख सकेंगी। 

10 दिन में ग्रामीणों द्वारा करीब 800 से 1100 मीटर सड़क खोद डाली है। सड़क करीब 4 किलोमीटर बननी है। सीमित संसाधन, बिगड़ता मौसम भले ही उनके इस कार्य में बाधा पहुंचा रहा हो लेकिन युवाओं के हौसले बुलंद हैं। इन बुलंद हौसलों को यदि पंख लगाने हैं तो आज हमें टुंडाचौड़ा गांव के युवा वर्ग को अपना सहयोग करना होगा। सरकार, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं से उम्मीद की जाती है कि बिना आश्वासन के शीघ्र ही उनके इस मुहिम में आप भी भागीदार बनें। 

ग्राम प्रधान टुंडा चौड़ा का सराहनीय योगदान :
श्रमदान कर सड़क निर्माण में टुंडा चौड़ा गांव के प्रधान श्रीमती मनीषा देवी का योगदान सर्वोपरि रहा है। उनके पति श्री गोविन्द सिंह भी इस कार्य हेतु अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। वे हर दिन युवाओं के साथ सड़क निर्माण में जुटे हैं। ग्रामीणों से सड़क हेतु भूमि मांगने के लिए उन्होंने अहम् भूमिका निभाई है। ग्रामीणों को विश्वास है सड़क मार्ग का लाभ जल्द ही प्राप्त होगा। उम्मीद है श्रीमती मनीषा देवी के नेतृत्व में टुंडा चौड़ा गांव विकास के नए आयामों को प्राप्त करेगा। 
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