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Buransh बुरांश - सुमित्रानंदन पन्त

सार जंगल में त्वि ज क्वे न्हां रे क्वे न्हां , फुलन छै के बुरूंश ! जंगल जस जलि जां । सल्ल छ , दयार छ , पई अयांर छ , सबनाक फाडन में पुडनक...

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