हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ: केवल एक तीर्थ नहीं, रहस्यों का केंद्र भी है !

आइए जानते हैं बाबा केदार से जुड़े 10 रहस्यमयी तथ्य।

बिना सीमेंट-गारे के बना मंदिर!

मंदिर के पत्थरों को 'इंटरलॉकिंग' तकनीक से जोड़ा गया है, जो इसे सदियों से अडिग रखे हैं।

बर्फ के नीचे दबा रहा मंदिर।

वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों के अनुसार, केदारनाथ मंदिर लगभग 400 वर्षों तक (1300-1900 ईस्वी के बीच) बर्फ में दबा रहा।

पांडवों ने किया था निर्माण।

कथाओं के अनुसार, शिव ने बैल का रूप लिया और जिस स्थान पर उनका कूबड़ रहा, वहां मंदिर बना।

अद्भुत है शिवलिंग का आकार।

यहाँ शिवलिंग गोल नहीं, बल्कि बैल की पीठ के आकार का 'त्रिकोणीय' है।

शिव के पांच दिव्य रूपों में एक।

केदारनाथ 'पंचकेदार' का सबसे महत्वपूर्ण हैं।

चमत्कारिक 'भीम शिला

2013 की आपदा में इस शिला ने जल के वेग को दो हिस्सों में बांटकर मंदिर को बचाया।

सर्दियों में उखीमठ का निवास।

अत्यधिक बर्फबारी के कारण 6 महीने बाबा केदार की पूजा ओंकारेश्वर मंदिर, उखीमठ में की जाती है।

दक्षिण भारत के होते हैं पुजारी।

मंदिर के मुख्य पुजारी (रावल) कर्नाटक के वीरशैव (लिंगायत) समुदाय से होते हैं।

अखंड ज्योत का रहस्य 

कपाट बंद होने पर जलाया गया दीपक 6 महीने बाद खुलने पर भी जलता मिलता है।

शंकराचार्य की समाधि

मंदिर के ठीक पीछे आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि स्थल है, जिन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

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