# eKumaon.com > eKumaon.com | Let's connect with Uttarakhand ## Posts - [पहाड़ के जायकेदार नमक Pisi Noon की रोचक जानकारी।](https://www.ekumaon.com/2024/03/pahadi-pisi-noon-with-detailed-information.html): उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा यहाँ पैदा होने वाले जैविक उत्पादों के लिए प्रसिद्ध है। जिनमें राजमा, काले भट, - [Phool dei Wishes : फूलदेई के प्यारे शुभकामना सन्देश।](https://www.ekumaon.com/2024/03/happy-phooldei-wishes-quotes.html): Phool dei Wishes :  उत्तराखंड में फूलदेई का त्योहार बदलते दौर में भी बड़े हर्षोल्लाष के साथ मनाया जा रहा - [सुप्रसिद्ध कुमाऊंनी होली गीत संग्रह-बड़ावे की होली](https://www.ekumaon.com/2024/03/kumaoni-holi-songs-collection.html): कुमाऊँ में होली गायन की अनूठी परंपरा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां खड़ी होली की धूम मचती है वहीं शहरों - [प्रकृति का उत्सव- फूलदेई त्यौहार 2026](https://www.ekumaon.com/2024/03/phooldei-festival-uttarakhand-celebration-of-nature.html): उत्तराखंड, देवभूमि, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और जीवंत त्योहारों के लिए जाना जाता है। इनमें से एक अनूठा त्यौहार - [कुमाउनी होली के 10 लोकप्रिय गीत | Pahadi Holi Song](https://www.ekumaon.com/2024/03/10-famous-holi-songs-of-kumaon-uttarakhand.html): उत्तराखंड में कुमाउनी होली का इतिहास 400 साल से भी अधिक पुराना है। यहाँ बैठकी होली गायन की परंपरा की शुरुवात - [कुमाऊँ की होली में 'चीर बंधन' की विशिष्ट परम्परा | Cheer Bandhan](https://www.ekumaon.com/2024/03/kumaoni-holi-special-tradition-cheer-bandhan.html): कुमाऊं की होली अपनी विशिष्ट परम्पराओं के लिए जानी जाती है। यहाँ बैठकी होली, खड़ी होली, महिला होली में होली - [मैं पहाड़ों कु रैबासी गीत के लिरिक्स और भावार्थ।](https://www.ekumaon.com/2024/03/main-pahadon-ko-raibasi-lyrics.html): Mai Pahadon ko Raibasi एक लोकप्रिय गढ़वाली गीत है, जिसे सौरव मैठाणी और अंजलि खरे ने अपने मधुर कंठ से  गाया - [जागेश्वर धाम: इतिहास, वास्तुकला, धार्मिक महत्व और दर्शन।](https://www.ekumaon.com/2024/02/jageshwar-dham-history-architecture-religious-significance-worship-darshan.html): उत्तराखंड, जिसे देवभूमि भी कहा जाता है, प्राचीन मंदिरों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इसी देवभूमि में - [कैंची धाम: एक पवित्र आश्रम और आध्यात्मिक केंद्र।](https://www.ekumaon.com/2024/02/kainchi-dham-a-holy-ashram-and-spiritual-centre.html): कैंची धाम, उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र है। यह हनुमान जी को समर्पित एक मंदिर - [बेडु पाको बारामासा: उत्तराखंड का गौरव।](https://www.ekumaon.com/2024/02/bedu-pako-baramasa-pride-of-uttarakhand.html): “बेडु पाको बारामासा” उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध लोकगीत है। यह गीत कुमाऊंनी भाषा में है और इसे स्व. बृजेंद्र लाल - [फिर यूट्यूब पर आया गुलाबी शरारा गीत | Gulabi Sharara Song Back on YouTube.](https://www.ekumaon.com/2024/02/gulabi-sharara-song-is-back-on-youtube.html): पुनः अपने मंच पर पहुंचा गुलाबी शरारा गीत।   गुलाबी शरारा गीत (Gulabi Sharada Song) के प्रशंसकों के लिए शुभ - [प्रसिद्ध किताब कौतिक 16 मार्च से कुमाऊँ की आर्थिक राजधानी में।](https://www.ekumaon.com/2024/02/kitab-kautik-haldwani-held-on-16-and-17-march-html.html): उत्तराखंड में ‘किताब कौतिक’ नाम से प्रसिद्ध ‘पुस्तक मेला’ 16 एवं 17 मार्च को हल्द्वानी में आयोजित होगा। जिसमें 70 - [बसंत पंचमी के ख़ास शुभकामना सन्देश | Basant Panchami 2026](https://www.ekumaon.com/2024/02/basant-panchami-special-wishes.html): Basant Panchami 2026 : बसंत पंचमी, भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ महीने के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया - [कुमाऊंनी लोक गायिका कमला देवी और कोक स्टूडियो।](https://www.ekumaon.com/2024/02/uttarakhand-folk-singer-kamla-devi-in-coke-studio-india.html): पहाड़ी लोक संगीत के लिए एक शुभ समाचार है। उत्तराखंड के बागेश्वर जिले की रहने वाली कमला देवी (Kamla Devi) - [रघुपति राघव राजा राम ओरिजिनल भजन के लिरिक्स।](https://www.ekumaon.com/2024/01/original-lyrics-of-raghupati-raghav.html): Raghupati Raghav : आज भारत राममय है। हर तरफ भगवान् श्रीराम के नाम की गूंज है। अयोध्या में भगवान अपने - [दैंणा होया खोली का गणेशा स्तुति के लिरिक्स एवं भावार्थ।](https://www.ekumaon.com/2024/01/daina-hoya-kholi-ka-ganesha-lyrics.html): ‘दैंणा होया खोली का गणेशा’ गीत उत्तराखंड के प्रमुख श्रीगणेश स्तुति में से एक है। इस स्तुति में भगवान गणेश, - [आदि कैलाश: धार्मिक मान्यता, मुख्य आकर्षण और परमिट](https://www.ekumaon.com/2024/01/adi-kailash-where-one-gets-the-experience-of-being-god-in-person.html): देवभूमि उत्तराखंड आध्यात्म एवं पर्यटन की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है, उत्तराखण्ड के हर एक स्थल की अपनी एक - [Lyrics - Nagri Ho Ayodhya Si | नगरी हो अयोध्या सी लिरिक्स।](https://www.ekumaon.com/2024/01/nagri-ho-ayodhya-si-lyrics.html): Nagri Ho Ayodhya Si Lyrics   Nagri Ho Ayodhya Si मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम पर आधारित एक कर्णप्रिय प्रसिद्ध भजन है। - [उत्तरायणी- सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का त्यौहार।](https://www.ekumaon.com/2024/01/uttarayani-festival-of-cultural-and-social-consciousness.html): भारतीय परंपरा में ‘मकर संक्रान्ति’ को सूर्य के उत्तर दिशा में प्रवेश के रूप में मनाया जाता है। उत्तराखंड में - [चंद्रबदनी मंदिर: श्रीयंत्र में स्थित माँ चन्द्रबदनी शक्तिपीठ।](https://www.ekumaon.com/2023/11/chandrabadni-temple-uttarakhand.html): देवभूमि उत्तराखंड प्राचीन काल से ही ऋषियों की तपस्थली और आस्था का मुख्य केंद्र रहा है। यहाँ हर एक स्थल - [ब्राइट एंड कार्नर : सूर्यास्त का खूबसूरत नजारा देखना है तो चले आयें यहाँ।](https://www.ekumaon.com/2023/10/bright-end-corner-almora.html): Bright End Corner Almora  यह जगह शहर की शुरुआत भी है, बाहर निकलते वक्त शहर का आखिरी छोर भी यही - [Jai Maiya Durga Bhawani lyrics | जै मैय्या दुर्गा भवानी भजन के बोल।](https://www.ekumaon.com/2023/09/jai-maiya-durga-bhawani-lyrics.html): ‘जय मैया दुर्गा भवानी’ भजन उत्तराखंड के प्रमुख देवी दुर्गा भजनों में से एक है, जिसे अपने सुमधुर स्वरों से - [Hey Nanda Hey Gaura मार्मिक लोकगीत के बोल](https://www.ekumaon.com/2023/09/hey-nanda-hey-gaura-lyrics.html): ‘हे नंदा  हे गौरा कैलाशूँ की जात्रा’ – भजन युवा गायक दर्शन फर्स्वाण द्वारा गाया नंदा भगवती का एक मधुर - [हिलजात्रा-उत्तराखंड का सुप्रसिद्ध लोकनाट्य उत्सव।](https://www.ekumaon.com/2023/09/hiljatra-the-famous-folk-theater-festival-of-uttarakhand.html): उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अपनी संस्कृति, लोक त्यौहारों और विभिन्न उत्सवों के कारण जग विख्यात है। ऐसा ही - [संसदीय भव चक्र-अशोक चक्र की 24 तीलियों का अर्थ !](https://www.ekumaon.com/2023/08/meaning-of-ashok-chakra-24-spokes.html):  भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बीच में नीले रंग का चक्र “अशोक चक्र” “Ashok Chakra” कहलाता है। यह चक्र - [इतनी शक्ति हमें देना दाता …](https://www.ekumaon.com/2023/08/itni-shakti-hame-dena-data-lyrics.html): ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना’ प्रार्थना से जहाँ दिन की शुरुआत हो, वहां सकारात्मक - [पिछौड़ा - सुहाग, शुभ और संस्कृति का प्रतीक।](https://www.ekumaon.com/2023/08/pichora-symbol-of-suhag-auspicious-and-culture.html): Pichora : अक्सर आपने उत्तराखंड की महिलाओं को विवाह या किसी अन्य मांगलिक कार्यों के अवसर पर गहरे पीले सुनहरे - [बग्वाल मेला 2025 - जहाँ लोकहित के लिए होता है पत्थरों का रोमांचकारी युद्ध।](https://www.ekumaon.com/2023/08/bagwal-mela-devidhura-uttarakhand.html): उत्तराखंड की संस्कृति यहां के लोक पर्व और मेलों में स्पंदित होती है। यूं तो राज्य में जगह-जगह साल भर - [हरेला पर्व - जानिए वैज्ञानिक तथ्य और परम्परायें | Harela Festival](https://www.ekumaon.com/2023/07/harela-festival-and-our-traditions.html): Harela Festival : उत्तराखंड सिर्फ अपनी खूबसूरती से ही नहीं अपितु अपने लोकपर्वों के कारण भी पूरे देश और विदेश - [Harela Wishes in Kumaoni-हरेला की शुभकामनायें।](https://www.ekumaon.com/2023/07/harela-wishes-in-kumaoni.html): Harela Wishes in Kumaoni: हरेला उत्तराखंड के लोकप्रिय त्यौहारों में से एक है। सावन महीने की संक्रांति यानि प्रथम दिन - [खोल दे माता खोल भवानी…कुमाउनी झोड़ा गीत।](https://www.ekumaon.com/2023/06/khol-de-mata-khol-bhawani-lyrics.html): ‘खोल दे माता खोल भवानी धरमा केवाड़ा’: एक लोकप्रिय कुमाऊंनी झोड़ा है, जो यहाँ की ईष्ट देवी माँ भगवती भवानी - [Ku Dhungu Ni Puji Lyrics | को ढुंगो नि पुजि मील के लिरिक्स।](https://www.ekumaon.com/2023/06/garhwali-song-ku-dhungu-ni-puji-lyrics.html): Ku Dhungu Ni Puji: को ढुंगो नि पुजि मील – गढ़रत्न श्री नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा गाया प्रस्तुत मार्मिक गीत - ['प्रेरक उद्धरण' जो सफलता में मददगार बने हैं | Motivational Quotes in Hindi](https://www.ekumaon.com/2023/04/top-motivational-quotes-in-hindi.html): प्रेरक उद्धरण यानि वे पंक्तियाँ जिनसे हमें जीवन में कुछ सीख मिले। इन Motivational Quotes का यदि हम अनुसरण करने - [Garhwali Songs Lyrics-प्रसिद्ध गढ़वाली गीतों के बोल।](https://www.ekumaon.com/2023/04/garhwali-song-lyrics.html): इस पोस्ट में आपको कुछ चुनिंदा गढ़वाली गीतों के बोल (Garhwali Songs Lyrics) पढ़ने को मिलेंगे, जो वर्षों पुराने हैं - [लिंगुड़ा की सब्जी: पकाने की पहाड़ी विधि और फायदे।](https://www.ekumaon.com/2023/04/vegetable-of-lingda-right-choice-pahari-recipe-and-benefits.html): पहाड़ अपनी बेपनाह खूबसूरती के साथ-साथ अनेक जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों का भण्डार है। ये सभी यहाँ प्राकृतिक रूप से उपलब्ध - [गढ़वाली माँगल गीत के बोल | Mangal Geet Lyrics](https://www.ekumaon.com/2023/04/garhwali-mangal-geet-lyrics.html): उत्तराखंड अपने प्राकृतिक सौंदर्य, देवस्थलों के अलावा अपने ख़ास परम्पराओं और रीति-रिवाजों के कारण भी प्रसिद्ध है। यहाँ के कुछ - [Ram Navami Wishes in Hindi-राम नवमी की शुभकामनाएं।](https://www.ekumaon.com/2023/03/ram-navami-wishes-in-hindi.html): सनातन धर्म के मान्यतानुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म - [नवरात्रि के मौके पर, यहाँ हैं खुशियों भरे शुभकामना सन्देश](https://www.ekumaon.com/2023/03/navratri-wishes-in-hindi.html):  Navratri Wishes : हिन्दू सनातन धर्म में नवरात्रों का विशेष महत्व है। नवरात्रों के नौ दिनों में माता दुर्गा के - [फूलदेई त्यौहार का इतिहास और प्रचलित लोककथाएं।](https://www.ekumaon.com/2023/03/folktales-prevalent-on-phooldei-festival.html): उत्तराखंड में साल भर में अनेक छोटे-बड़े त्यौहार होते हैं। फूलदेई (Phool dei) एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसे खासतौर पर बच्चे - [हिन्दू नववर्ष 2083: प्रेरणादायक संदेश और अनमोल विचार।](https://www.ekumaon.com/2023/03/hindu-new-year-wishes-and-quotes.html): भारतीय पंचांग के अनुसार नववर्ष 1 जनवरी से नहीं बल्कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नव संवत्सर से शुरू होता है। हिन्दू - [झुकी आयो शहर से ब्यौपारी | Jogi Aayo Shahar Se Vyapari](https://www.ekumaon.com/2023/03/kumauni-holi-song-jogi-aayo-shahar.html): उत्तराखंड के कुमाऊँ में होली गायन की परम्परा सबसे विशिष्ट है। यहाँ होली गायन पौष माह के पहले रविवार से - [Kumaoni Holi Wishes-होली के आशीष वचन 'अशीक'](https://www.ekumaon.com/2023/03/kumaoni-holi-wishes.html): Kumaoni Holi Wishes: उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल की होली विशेष परम्परा के साथ मनाई जाती है। यहाँ होली शुरू होने - [सुकुंडा ताल: धार्मिक, पौराणिक मान्यताएं और पर्यटन की संभावनाएं।](https://www.ekumaon.com/2023/02/sukunda-tal-beautiful-tourist-destination-of-uttarakhand.html): उत्तराखंड, बागेश्वर जनपद में कपकोट तहसील के पोथिंग गांव की खूबसूरत पहाड़ी पर स्थित “सुकुंडा ताल” अपने प्राकृतिक सौंदर्य के - [उत्तराखंड के राजकीय चिह्न और प्रतीक: सांस्कृतिक धरोहर की पहचान](https://www.ekumaon.com/2023/02/state-emblem-and-symbols-of-uttarakhand.html): State Symbol of Uttarakhand: उत्तराखंड राज्य 9 नवंबर 2000 को भारत के 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। सन - [राजुला मालूशाही: उत्तराखंड की अमर प्रेम गाथा।](https://www.ekumaon.com/2023/02/an-immortal-love-story-of-uttarakhand-rajula-malushahi.html): Rajula Malushahi Story: “राजुला मालूशाही” एक अमर प्रेम कथा है जो प्रेम का प्रतीक मानी जाती है। उत्तराखंड की लोक - [प्रसिद्ध गीत जै हो कुमाऊं, जै हो गढ़वाला के लिरिक्स।](https://www.ekumaon.com/2023/02/jai-ho-kumaon-jai-ho-garhwal-lyrics.html): जै हो कुमाऊं, जै हो गढ़वाला-प्रस्तुत गीत श्री जनार्दन उप्रेती जी द्वारा रचित है, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के खूबसूरत अंचल कुमाऊँ - [प्रसिद्ध कुमाउनी होली गीत | Kumaoni Holi Song PDF](https://www.ekumaon.com/2023/02/kumaoni-holi-song-pdf.html): उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में होली गायन की अनूठी परंपरा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां खड़ी होली की धूम मचती - [उत्तराखंड में बसंत पंचमी से जुड़ी परम्पराएं | Bansat Panchami in Uttarakhand.](https://www.ekumaon.com/2023/01/bansat-panchami-in-uttarakhand.html): उत्तराखंड में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। इस दिन यहाँ अनेक शुभ कार्यों को शुरू करने की परम्परा है। - [नमो भगवती माँ सरस्वती वंदना के बोल और पीडीऍफ़ डाउनलोड।](https://www.ekumaon.com/2023/01/lyrics-namo-bhagwati-maa-saraswati.html):  ‘नमो भगवती माँ सरस्वती‘ गढ़वाली बोली-भाषा में रचित यह सरस्वती वंदना उत्तराखंड के विभिन्न विद्यालयों में हर दिन प्रातः बच्चों - [Lyrics-Hind Desh Ke Niwasi | हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं।](https://www.ekumaon.com/2023/01/lyrics-hind-desh-ke-niwasi.html): हिन्द देश के निवासी सभी जन एक हैं (Hind Desh Ke Niwasi, Sabhi Jan Ek Hain) -प्रस्तुत देशभक्ति गीत पद्मश्री - [उत्तराखंड मेरी मातृभूमि गीत | Lyrics-Uttarakhand Meri Matri Bhumi](https://www.ekumaon.com/2023/01/lyrics-uttarakhand-meri-matribhumi-song.html): उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, मातृभूमि यो मेरी पितृभूमि, ओ भूमि तेरी जय-जयकारा म्यर हिमाला– प्रस्तुत कविता / गीत/ वंदना बहुआयामी व्यक्तित्व - [Happy Ghughutiya, Uttrayani and Makar Sankranti Wishes in Hindi](https://www.ekumaon.com/2023/01/happy-ghughutiya-uttrayani-wishes-in-hindi.html): हर वर्ष माघ संक्रांति के दिन उत्तराखंड के कुमाऊँ में एक ख़ास त्यौहार मनाया जाता है, जिसे लोग घुघुतिया या - [Lyrics-Ghughuti Na Basa | घुघुती ना बासा, आम कि डाई मा।](https://www.ekumaon.com/2022/12/lyrics-ghughuti-na-basa-aam-ki-daye-maa.html): घुघुती ना बासा, आम कि डाई मा, (Ghughuti Na Basa) इस गीत में पहाड़ की एक महिला जिसका पति देश - [Lyrics- Bedu Pako Baramasa | बेडू पाको बारामासा गीत और उसके बोल।](https://www.ekumaon.com/2022/11/bedu-pako-baramasa-lyrics.html): Bedu Pako Baramasa Lyrics: दूर पर्वतीय लोक से निकल कर पूरे देश-प्रदेश ही नहीं अपितु अंतर्राष्ट्रीय फलक तक अपने पूरे - [कीवी की खेती कर नयी पहचान बनाई रिटायर्ड शिक्षक ने।](https://www.ekumaon.com/2022/11/kiwi-farming-uttarakhand-shama-retired-principal.html): अक्सर देखा जाता है लोग रिटायरमेंट के बाद किसी अच्छे शहर में बस जाते हैं या अपने काम करने के - [उत्तराखण्ड राज्य गीत के बोल-उत्तराखण्ड देवभूमि-मातृभूमि।](https://www.ekumaon.com/2022/08/uttarakhand-state-song-lyrics.html): ‘उत्तराखण्ड देवभूमि-मातृभूमि, शत्-शत् वंदन अभ‍िनंदन‘ यह पंक्तियाँ ‘उत्तराखंड के राज्य गीत’ की हैं। वर्ष 2016 में फ़रवरी माह के प्रथम सप्ताह में - [जहाँ पवन बहे संकल्प लिए, जहाँ पर्वत गर्व सिखाते हैं..](https://www.ekumaon.com/2022/05/jahan-pawan-bahe-sanklp-liye.html): Jahan Pawan Bahe Sankalp Liye Lyrics जहाँ पवन बहे संकल्प लिए, जहाँ पर्वत गर्व सिखाते हैं, जहाँ ऊँचे नीचे सब - [कुमाऊंनी होली गीत - बुरूंशी का फूल को कुमकुम मारो](https://www.ekumaon.com/2022/01/burushi-ko-phool-ko-kumkum-maro.html): प्रस्तुत पंक्तियाँ उत्तराखंड के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार स्वर्गीय श्री चारु चंद्र चंदोला जी की हैं। Burushi Ko Kumkum Maro - [हो जन्म दुबारा तो भारत वतन मिले-देशभक्ति गीत के लिरिक्स।](https://www.ekumaon.com/2021/12/ho-janm-dubara-to-bharat-vatan-mile-lyrics.html): हो जन्म दुबारा तो भारत वतन मिले गीत प्रमुख देशभक्ति गीतों में से एक है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रप्रेम की भावना - [उत्तराखण्ड सामान्य ज्ञान पीडीऍफ़ - 201 महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर।](https://www.ekumaon.com/2021/11/uttarakhand-gk-complete-notes.html): उत्तराखण्ड से संबंधित सामान्य ज्ञान की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए एक सुनहरा अवसर! - [उत्तराखंड की मांगल "लता"- नंदा सती](https://www.ekumaon.com/2021/09/mangal-lata-nanda-sati.html): देवभूमि उत्तराखंड  महज एक औपचारिक नाम ही नहीं बल्कि एक ऐसा दिव्य धाम है, जो कई सारी खूबियों को स्वयं - [दैंण है जाए माँ सरस्वती वंदना के बोल और भावार्थ हिंदी में।](https://www.ekumaon.com/2021/08/lyrics-dain-hai-jaya-maa-saraswati-school-prayar.html): ‘दैंण है जाए माँ सरस्वती’ एक सरस्वती वंदना है। जिसे विभिन्न विद्यालयों में प्रातः प्रार्थना के रूप में गाया जाता है। - [कुमाऊंनी त्यौहार - बिरुड़ पंचमी | Kumaoni Festival- Birud Panchami](https://www.ekumaon.com/2021/08/kumaoni-festival-birud-panchami.html): उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल में भाद्रपद माह की शुक्ल पंचमी को एक त्यौहार मनाया जाता है जिसे लोग ‘बिरुड़ पंचमी’ - [25 अगस्त 1942, सालम की जनक्रांति के रणबांकुरे।](https://www.ekumaon.com/2021/08/hero-salam-ki-kranti-uttarakhand.html): 1942 के दौरान कुमाऊं में चले ‘भारत छोड़ो‘ आंदोलन के तहत अल्मोड़ा की सालम पट्टी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। - [Indian Freedom Figher Kalu Mahar | आखिर क्यों भूल गये हम 'कालू महर' को](https://www.ekumaon.com/2021/08/freedom-fighter-kalu-mahar-uttarakhand.html): भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में उत्तराखण्ड के काली कुमाऊं यानि वर्तमान चम्पावत जनपद का अप्रतिम योगदान रहा है। स्थानीय जन इतिहास - [कुमाऊं का स्वतंत्रता संग्राम।](https://www.ekumaon.com/2021/08/kumaun-ka-swantrata-sangram.html): उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की प्रारंभिक शुरुआत 1857 के दौर में एक तरह से काली कुमाऊं (वर्तमान चम्पावत जनपद - [उत्तराखंड की यह ऑफ-बीट जगह, जहाँ हर साल आते हैं कई सेलेब्रिटीज।](https://www.ekumaon.com/2021/08/offbeat-tourist-places-near-delhi.html): अल्मोड़ा के द्वाराहाट से करीब 25 किमी दूर स्थित है यहाँ का एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान-दूनागिरी मंदिर। दूनागिरी से कुछ - [उत्तराखंड में कोई नई जगह घूमना है ? तो चलिए इस छोटे से पहाड़ी नगर की सैर पर :](https://www.ekumaon.com/2021/08/untouched-tourist-spot-uttarakhand-pithoragarh.html):   2018 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान कुछ प्राकृतिक आपदाओं के कारण भारतीय विदेश मंत्रालय ने पैदल ट्रैक के - [Kot Bhramari Temple Garud Bageshwar | माता कोट भ्रामरी, देवी नन्दा के रूप में पूजित।](https://www.ekumaon.com/2021/08/kot-bhramari-temple-garud-bageshwar-history.html): उत्तराखण्ड स्थित बागेश्वर जनपद के गरुड़ विकास खंड में कत्यूरी राजाओं की कुलदेवी भगवती भ्रामरी चंदवंशियों की भी कुलदेवी रही - [Harela Festival of Uttarakhand: A Lush Celebration of Harvest and Heritage.](https://www.ekumaon.com/2021/07/harela-festival-of-uttarakhand-gives-the-message-of-environmental-protection.html): Harela Festival of Uttarakhand : Harela is a folk Festival, it’s celebrated with full joy and glory in Kumaon region - [लोकसंस्कृति के वैभव को संजोने में जुटी "पिछौड़ी वूमेन"- मंजू टम्टा](https://www.ekumaon.com/2021/06/manju-tamta-pichoda-women-uttarakhand.html): पहाड़ वो नहीं है जो सैलानियों के कैमरों में क्लिक होता है। तस्वीरों में दिखाई पड़ने वाले ऊंचे पेड़, फूल, - [नमिता तिवारी : संस्कृति के सच्चे साधकों में एक नाम, जो पिछले दो दशक से अपने काम को नए-नए कलेवर और कैनवास पर अपनी कला के हुनर की छाप छोड़ रही हैं।](https://www.ekumaon.com/2021/06/namita-tiwati-aipan-artist-uttarakhand.html): संस्कृति और सभ्यताओं का समागम अगर दुनिया में कहीं है तो वो हमारे देवभूमि उत्तराखंड में है जो हमारी देश - [बागेश्वर के देवलचौरा में भी मैती आंदोलन, बेटी विदा होने से पूर्व लगाएगी एक पेड़।](https://www.ekumaon.com/2021/04/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a4%9a%e0%a5%8c%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82.html): वर्ष 1994 में शुरू हुए पर्यावरण से जुड़े मैती आंदोलन से सीख लेते हुए बागेश्वर के देवलचौरा में भी अब - [Lyrics : Haye Teri Rumala Gulabi Mukhadi-Kumaoni Song | हाई तेरी रुमाला गुलाबी मुखड़ी।](https://www.ekumaon.com/2021/04/lyrics-of-haye-teri-rumala-gulabi-mukhadi.html): उत्तराखण्ड के महान गायक स्व० गोपाल बाबू गोस्वामी जी का एक सुपरहिट गीत है ‘हाई तेरी रुमाला, गुलाबी मुखड़ी, के - [दानपुर क्यों कहलाया बागेश्वर का यह क्षेत्र? जानिए रोचक प्रसंग।](https://www.ekumaon.com/2021/04/why-we-get-danpur-name-imalaya-uttarakhand.html): Danpur Bageshwar : नंदाकोट हिमालय की तलहटी पर बसे वर्तमान जनपद बागेश्वर के आधे भू-भाग को ब्रिटिश राज में दानपुर - [Famous Kumauni Holi Song-हरि खेल रहे हैं होली, देबा तेरे द्वारे में।](https://www.ekumaon.com/2021/03/kumaoni-holi-hari-khel-rahe-hain-holi.html): कुमाऊँ की एक भक्तिमय होली  हरि खेल रहे हैं होली, देबा तेरे द्वारे में। टेसू के रंग में रंगे कपोल - [बलमा घर आयो फागुन में - उत्तराखण्ड का एक प्रसिद्ध होली गीत।](https://www.ekumaon.com/2021/03/uttarakhand-holi-song-balma-ghar-aayo-fagun-mai.html): Balma Ghar AayeKon Dina lyrics बलमा घर आयो फागुन में -2 जबसे पिया परदेश सिधारे, आम लगावे बागन में, बलमा - [अल्मोड़ा से शुरू हुई कुमाऊंनी होली की परंपरा, इन्हें माना जाता है होली गीतों का जनक।](https://www.ekumaon.com/2021/03/the-tradition-of-kumaoni-holi-started-from-almora.html): Kumaoni Holi : कुमाऊं में होली गीतों का इतिहास सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा से शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि - [फूलदेई और मेरा बचपन | Phool dei Tyohar 2026](https://www.ekumaon.com/2021/03/phooldei-wishes.html): बचपन में ‘फूलदेई त्यौहार’ की यादें आज भी ताज़ा हैं। जब हमें फूलदेई का बेसब्री से इंतजार रहता था। बसंत - [शकुनाखर-कुमाऊंनी संस्कृति के शगुन गीत | Shakunakhar Geet](https://www.ekumaon.com/2021/02/kumaoni-shakun-ankhar-lyrics.html): ‘शकुना दे काज ये अति नीका सो रंगीलो, पाटल अंचलि कमलै को फूल सोदी फूल मोलावंत, गणेश, रामीचंद, लछिमन, भरत, - [Lati Art Uttarakhand : पहाड़ी भावनाओं को जीवंत करती कंचन की कलाकृतियां।](https://www.ekumaon.com/2021/02/beautiful-art-work-by-pahad-girl-lati-art.html): Lati Art Uttarakhand : आपने अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्ट्राग्राम, फेसबुक या व्हाट्सअप में कुमाऊंनी/ गढ़वाली वेशभूषा में सुन्दर कार्टून - [ईजा - जिसमें संसार की सभी खुशियां समाई हैं।](https://www.ekumaon.com/2021/02/ija-means-mother-means-the-whole-world.html): ईजा यानि माँ यानि पूरा संसार। दुनिया में ईजा ही एक ऐसा शब्द है जिसमें पूरा संसार बसा है। या - [‘लोक में पर्व और परम्परा’ - एक सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विवेचन प्रस्तुत करती पुस्तक।](https://www.ekumaon.com/2021/01/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be.html):   आवरण पृष्ठ पुस्तक ‘लोक में पर्व और परम्परा’    ‘लोक में पर्व और परम्परा’ हिमालयी क्षेत्र एवं समाज के - [कुली बेगार-भारत की रक्तहीन क्रांति](https://www.ekumaon.com/2021/01/kuli-begar-movement-bloodless-revolution.html): उत्तराखंड में सदियों से एक अमानुषिक कुप्रथा चल रही थी, जिसका नाम था- ‘कुली- बेगार’। 1815 में यहाँ ईष्ट इंडिया - [Uttarakhand का सबसे बड़ा पर्व : घुघुतिया-उत्तरायणी (मकर संक्रांति)](https://www.ekumaon.com/2021/01/ghughutiya-tyar-most-popular-festival-uttarakhand.html): जनवरी माह में उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति, दक्षिण में पोंगल और पंजाब में लोहड़ी बड़े धूमधाम से मनाया जाता - [न्याय देवता गोरिल व सगटा ब्राह्मण की कथा।](https://www.ekumaon.com/2020/12/story-of-god-of-justice-and-sagata-brahman.html):  खबरदार ! मेरे राज्य में कोई भी बलवान निर्बल को और धनवान निर्धन को नहीं सता सकता-       - [गोलू देवता की कहानी - जानें जन्म की विस्तृत लोककथा](https://www.ekumaon.com/2020/11/folklore-of-golu-devta-kumaun-uttarakhand.html): Golu Devta: उत्तराखंड की पावन धरा को ऋग्वेद में देवभूमि कहा गया है। यह धरा ऐसी है जहाँ देवी-देवताओं का - [मांगल गीत 'दे द्यावा बाबा जी कन्या कु दान' के बोल। | De Dyawa Baba Ji Kanya Ku Dan.](https://www.ekumaon.com/2020/11/lyrics-of-de-dyawa-baba-ji-kanya-ku-dan.html): कितनी समृद्ध है उत्तराखंड की संस्कृति, बोली-भाषा, इसका अहसास हमें तब होता है जब कोई गैर उत्तराखंडी हमारी संस्कृति, हमारी - [उत्तराखंड का विदाई गीत : ना रो चेली, ना रो मेरी लाल। जा चेली जा सौरास।](https://www.ekumaon.com/2020/11/na-ro-cheli-na-ro-meri-lal-ja-cheli-ja-sauras.html): बेटी की विदाई का पल सदैव ही भावुक करने वाला होता है। पाल-पोश बड़ी कर बेटी को जब किसी नए घर - [सूवा रे सूवा, बणखंडी सूवा-कुमाऊं का विवाहोत्सव निमंत्रण गीत](https://www.ekumaon.com/2020/10/suwa-re-suwa-bankhandi-suwa.html): उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में जीवन के विभिन्न संस्कारों को संपन्न कराते समय कुछ विशेष गीत गाये जाते हैं जिन्हें - [यात्रा वृतांत- द से दारमा का डोयाट।](https://www.ekumaon.com/2020/10/%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a5%83%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4-%e0%a4%a6-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%95.html): डोई पांडे  कोरोना महामारी के बीच जब दिमाग और दिल के बीच जंग चल रही थी तो यह एक बहुत - [सरकारी नौकरी : उत्तराखण्ड शासन के माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रवक्ता हेतु भर्ती, जल्दी आवेदन करें।](https://www.ekumaon.com/2020/10/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%8c%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%96%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%a1.html): उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा उत्तराखण्ड शासन के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत उत्तराखण्ड विशेष अधीनस्थ शिक्षा (प्रवक्ता संवर्ग) सेवा - [जिया रानी : कत्यूरी राजवंश की आराध्य देवी की कहानी।](https://www.ekumaon.com/2020/10/jiya-rani-adorable-goddess-of-katyuri-descendants.html): Jiya Rani Ki Kahani: लगभग 800 साल पुरानी बात है जब कुर्मांचल और केदारेश्वर में कत्यूरी राजवंश का न्यायकारी राज - [बागेश्वर- कल और आज का प्रशासनिक इतिहास।](https://www.ekumaon.com/2020/09/bageshwar-administrative-history.html): सरयू एवं गोमती नदी के संगम पर स्थित बागेश्वर मूलतः एक ठेठ पहाड़ी कस्बा है। परगना दानपुर के 473, खरही - [गर्जिया देवी मंदिर का इतिहास, धार्मिक मान्यता और महत्व](https://www.ekumaon.com/2020/09/%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae.html): गर्जिया देवी मन्दिर या ‘गिरिजा देवी मन्दिर’ उत्तराखण्ड के रामनगर स्थित सुंदरखाल गाँव में स्थित है, जो माता पार्वती के प्रमुख - [खतड़ुवा (Khatarua) क्या है? कुमाऊँ का अनोखा लोकपर्व और उसका इतिहास](https://www.ekumaon.com/2020/09/historical-interpretation-of-kumaoni-lokparva-khatduva.html): कुमाऊं का स्वच्छता अभियान से जुड़ा ‘खतडुवा’ पर्व वर्षाकाल की समाप्ति और शरद ऋतु के प्रारंभ में कन्या संक्रांति के - [विश्व पटल पर छा रही मंजू टम्टा की रंगीली पिछौड़ी।](https://www.ekumaon.com/2020/09/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%aa%e0%a4%9f%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9b%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%9b%e0%a5%8c.html): हमारा पहाड़ आज जिन कठोर संघर्षों के साथ जिस श्रेष्ठ मुकाम पर खड़ा है, वह हमारे लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है। - [सातों-आठों:-सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने का पर्व …](https://www.ekumaon.com/2020/08/saton-aatho.html): विहंगम हिमालयी भू-भाग को शिव की भूमि माना जाता है। अलग-अलग स्थानों में शिव के कई रुपों में पूजा होती - [मुंशी हरिप्रसाद टम्टा-उत्तराखण्ड के दलित चिंतक और समाज सुधारक।](https://www.ekumaon.com/2020/08/munshi-hari-prasad-tamta.html): हर वर्ष 26 अगस्त को उत्तराखण्ड के दलित चिंतक और समाज सुधारक ‘मुंशी हरिप्रसाद टम्टा’ जी की जयंती मनाई जाती - [धौलीनाग-कुमाऊँ का प्रसिद्ध नाग मन्दिर | Dhaulinag Temple](https://www.ekumaon.com/2020/08/famous-nag-temple-of-kumaon-dhaulinag.html): कुमांऊ मण्डल में अनेक नाग मन्दिर हैं, जिनमें प्रमुख हैं धौलीनाग, पिंगलनाग, फेणींनाग, खरहरिनाग या खरेनाग, बेड़ीनाग, कालीनाग। इनमें से - [निबंध-उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2025 : एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास की यात्रा](https://www.ekumaon.com/2025/11/essay-on-uttarakhand-foundation-day.html): उत्तराखंड राज्य की स्थापना भारतीय संविधान के तहत 9 नवंबर, सन 2000 को हुई। इसे उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिलों को अलग कर बनाया गया, जिसमें मुख्य रूप से गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के क्षेत्र शामिल थे। उत्तराखंड का निर्माण भारत के राज्यों के पुनर्गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। यह उन क्षेत्रों के लोगों की लंबी और संघर्षपूर्ण मांगों का परिणाम था, जो विकास और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार की उम्मीद कर रहे थे। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी - [हरिद्वार का इतिहास : आदिकाल से सन 1947 तक।](https://www.ekumaon.com/2025/11/history-of-haridwar-from-ancient-times-to-1947.html): History of Haridwar : हरिद्वार प्राचीनतम मानव बस्तियों के लिए प्रसिद्ध है और पौराणिक-धार्मिक स्थल हरिद्वार का वर्णन गंगाद्वार के नाम से महाभारत में भी हुआ है। कनखल की भारत के पुरानी बस्तियों में गिनती होती है। हरिद्वार जिला भारत के उत्तराखंड राज्य का एक जिला है। हरिद्वार गंगा तट पर स्थित है। हरिद्वार जब उत्तर प्रदेश में सहारनपुर जिले के इंटरगत था तो 1988 में नया जिला बना। 9 नवंबर 2000 में हरिद्वार नए प्रदेश उत्तराखंड का भाग बना। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक - [राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उत्तराखण्ड दौरा, ये हैं उनके महत्वपूर्ण कार्यक्रम।](https://www.ekumaon.com/2025/11/president-droupadi-murmu-uttarakhand-visit-2025.html): नई दिल्ली/देहरादून। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 2 से 4 नवंबर, 2025 तक उत्तराखण्ड के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगी। इस दौरे के दौरान वे राज्य के विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction 2 नवंबर: हरिद्वार में पतंजलि विश्वविद्यालय के - [इगास बग्वाल की शुभकामनाएं और कोट्स | Happy Igas Bagwal 2025](https://www.ekumaon.com/2025/10/happy-igas-bagwal-wishes-quotes.html): Happy Igas Bagwal 2025 : इगास बग्वाल यानी बूढ़ी दिवाली का पर्व पूरे उत्तराखंड में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। जो हर वर्ष दीपावली के ठीक 11 दिन बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि को आता है। मानसखण्ड (कुमाऊँ) में इसे ‘बूढ़ी दिवाली‘ और केदारखंड (गढ़वाल) में इस पर्व को ‘इगास बग्वाल‘ के नाम से जानते हैं। परम्परानुसार इस पर्व के दिन अपने गौ वंश की पूजा कर उनका आभार प्रकट किया जाता है और उन्हें पौष्टिक आहार खिलाया जाता है। अपने ईष्ट देवों और पूर्वजों की पूजा कर विभिन्न प्रकार के पकवानों का आनंद लेकर रात को सामूहिक रूप - [देव दीपावली 2025: जानिए तिथि, मुहूर्त, महत्व और उत्सव की भव्यता](https://www.ekumaon.com/2025/10/dev-deepawali-date-auspicious-time-significance.html): देव दीपावली कब है 2025 में: देव दीपावली, जिसे देव दिवाली या त्रिपुरोत्सव भी कहा जाता है, भारत की आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में मनाया जाने वाला सबसे पवित्र और भव्य त्योहारों में से एक है। वर्ष 2025 में देव दीपावली बुधवार, 5 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान शिव द्वारा राक्षस त्रिपुरासुर पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है, जो अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य - [उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस 2025: रजत जयंती समारोह 1 से 9 नवंबर तक, जानें पूरा कार्यक्रम](https://www.ekumaon.com/2025/10/uttarakhand-foundation-day-2025-program.html): देवभूमि उत्तराखंड आगामी 9 नवंबर 2025 को अपने गठन के 25 वर्ष (रजत जयंती) पूर्ण करने जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा 1 नवंबर से 9 नवंबर 2025 तक “रजत जयंती समारोह” का भव्य आयोजन किया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस समारोह में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा, कला, संगीत और रंगमंच की अनूठी झलक देखने को मिलेगी। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और - [झुमैलो नृत्य : उत्तराखंड का पारंपरिक लोकनृत्य-गीत।](https://www.ekumaon.com/2025/10/jhumailo-folk-dance-song-uttarakhand.html): झुमैलो (Jhumelo) उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का एक प्राचीन पारंपरिक लोकनृत्य-गीत है, जिसमें महिलायें गोलाकार घेरा बनाते हुए एक-दूसरे के बांहों में बाँह डालकर झूमते हुए लोकगीत गाती हैं। यह नृत्य, नारी हृदय की वेदना और प्रेम को अभिव्यक्त करता है। यह एक सामूहिक नृत्य है, जिसे बिना वाद्ययंत्रों के किया जाता है।  Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket - [डी. डी. पंत : उत्तराखण्ड के महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद, गांधीवादी और जनसेवक](https://www.ekumaon.com/2025/10/dr-dd-pant-uttarakhand-scientist-gandhian-leader.html): उत्तराखण्ड की भूमि केवल प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने महान व्यक्तित्वों के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं में एक नाम है डा० देवी दत्त पंत (डी. डी. पंत) , जो एक ख्यातिलब्ध वैज्ञानिक, समाजसेवी, गांधीवादी और राजनेता के रूप में सदैव याद किए जाते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket - [दीपावली से पहले सरकार का statewide अभियान, पनीर-मिठाई जब्त](https://www.ekumaon.com/2025/10/uttarakhand-food-safety-drive-diwali-2025.html): दीपावली और अन्य पर्वों के मद्देनज़र उत्तराखण्ड सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रदेशभर में व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य संरक्षा आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में पूरे राज्य में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ छापेमारी और सैंपलिंग का सिलसिला तेज़ी से जारी है। सरकार का साफ संदेश है — “खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।” Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का - [इगास बग्वाल (बूढ़ी दिवाली)-जानिये लोकमान्यताएं और परम्परायें।](https://www.ekumaon.com/2025/10/igas-bagwal-know-the-facts-and-major-traditions.html): Igas Bagwal : उत्तराखण्ड की भूमि अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और विभिन्न पर्वों की समृद्ध विरासत के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ हर त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि लोकजीवन, आस्था और यहाँ के लोगों की वीरता का प्रतीक भी है। इन्हीं पर्वों में से एक है इगास-बग्वाल, जिसे दीपावली के ठीक 11 दिन बाद बड़े उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व गढ़वाल में वीरता, लोकगाथाओं और सामूहिकता प्रतीक है, जो हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं - [शैलेश मटियानी-जीवन संघर्ष, साहित्यिक यात्रा, सम्मान और उपलब्धियां](https://www.ekumaon.com/2025/10/shailesh-matiyani-life-struggle-literary-journey-honors-achievements.html): उत्तराखंड में हर वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षा के क्षेत्र में उन्नयन एवं गुणात्मक सुधार के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को शैलेश मटियानी पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस पुरस्कार को देने की शुरुवात उत्तराखंड में वर्ष 2009 से हुई थी। तब से यह पुरस्कार हर वर्ष सभी पात्र शिक्षाविदों को दिया जा रहा है। यहाँ हम इस महान साहित्यकार के बारे में जानेंगे, जिनके नाम से उत्तराखंड में यह पुरस्कार दिया जाता है।   शैलेश मटियानी नई हिंदी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकार और गद्यकार थे। जिन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों में समाज की विषमताओं, पहाड़ - [कालीमठ मंदिर एवं कालीशिला : माँ काली का सिद्धपीठ | Kalimath Temple Uttarakhand](https://www.ekumaon.com/2025/09/kalimath-temple-uttarakhand.html): उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित कालीमठ (Kalimath) एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जो हिमालय की सुरम्य घाटी में, सरस्वती नदी के तट पर बसा है। बर्फ से ढकी केदारनाथ की चोटियों से घिरा यह पवित्र स्थल उखीमठ और गुप्तकाशी के निकट लगभग 6,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। मान्यता है कि यहीं पर मां काली ने रक्तबीज असुर का वध कर पृथ्वी में लीन हो गई थीं। आज भी यहां पर रक्तशिला, मातंगशिला व चंद्रशिला स्थित हैं।   कालीमठ मंदिर की पुनर्स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी। स्कंदपुराण के अंतर्गत केदारखंड के बासठवें अध्याय में माता के इस शक्तिपीठ - [दुर्गा मैया के भजन-कीर्तन लिरिक्स - कुमाऊंनी और गढ़वाली में।](https://www.ekumaon.com/2025/09/durga-maiya-bhajan-lyrics-in-kumaoni-garhwali.html): इस पोस्ट में हम प्रस्तुत कर रहे हैं माँ दुर्गा के भजन और कीर्तन, जो कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषाओं में रचित हैं। जो न केवल देवी दुर्गा की महिमा का गुणगान करते हैं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर और लोक संगीत की अनमोल धारा को भी जीवित रखते हैं। कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा में रचे गए ये भजन हमारे हृदय में भक्ति और श्रद्धा का संचार करते हैं। इन भजनों में माँ दुर्गा की शक्ति, करुणा और आशीर्वाद की प्रतीकात्मकता है, जो हमें जीवन की कठिनाइयों से उबरने की प्रेरणा देती है।   दुर्गा मैया के भजन और कीर्तनों को - [जखिया (Cleome Viscosa): उत्तराखण्ड का अनोखा तड़का और औषधीय गुण](https://www.ekumaon.com/2025/09/jakhiya-cleome-viscosa-uttarakhand.html): जखिया, अपने अदभुत स्वाद के लिये पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसकी उत्तराखण्ड में व्यवसायिक खेती तो नहीं वरन घरेलू उपयोग के लिये उगाया जाता है या स्वतः ही उग जाता है। उत्तराखण्ड में शायद ही कोई ऐसा भोजन होगा जिसमें जखिया का उपयोग तड़के में न किया जाता हो, इसका स्वाद अपने आप में अनोखा है। आज उत्तराखण्ड में ही नहीं अपितु बड़े शहरों के होटलों में भी जख्या का प्रयोग तड़के के रूप में किया जाता है तथा उत्तराखण्ड के प्रवासी भी विदेशों में जख्या यहीं से ले जाते हैं ताकि विदेशों में भी पहाड़ी जख्या का स्वाद - [उत्तराखंड के युवाओं के लिए 10 बिज़नेस आइडियाज](https://www.ekumaon.com/2025/09/top-business-ideas-in-uttarakhand.html): उत्तराखंड राज्य अपनी प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन की अपार संभावनाओं के कारण स्वरोजगार के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहाँ की पहाड़ी जीवनशैली, पारंपरिक व्यवसाय और आधुनिक तकनीक को मिलाकर युवाओं एवं ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनने के व्यापक अवसर मिल सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि उत्तराखंड में कौन-कौन से स्वरोजगार किए जा सकते हैं – Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन - [बादल का वजन कितना होता है? | Badal ka Weight Kitna Hota Hai?](https://www.ekumaon.com/2025/09/badal-ka-weight-kitna-hota-hai.html): हम आसमान में अक्सर बादलों को तैरते हुए देखते हैं, और इन्हें देखकर हम सोचते हैं कि ये बेहद हल्के, fluffy होंगे क्योंकि ये हवा में आसानी से इधर-उधर जाते हुए प्रतीत होते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि इन बादलों का असल में वजन कितना होता है? बादल को देखने में जितना हल्का और नाजुक लगता है, असल में वह बहुत भारी हो सकते हैं। जिसका अंदाजा उनसे बरसने वाली भयंकर बारिश से लगाया जा सकता है। इस पोस्ट में हम जानेंगे कि बादल का वजन कैसे मापा जाता है और उनका वज़न क्या हो सकता - [गोलू देवता की आरती - Golu Devta Ki Aarti](https://www.ekumaon.com/2025/09/golu-devta-ki-aarti.html): गोलू देवता उत्तराखंड के लोक देवता हैं, जिन्हें ‘न्याय के देवता’ के रूप में मान्यता प्राप्त है। लोक आस्था के अनुसार वे सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और अन्याय के विरुद्ध हमेशा खड़े रहते हैं। कुमाऊँ क्षेत्र में विशेष रूप से पूजित, गोलू देवता के मंदिरों में, जिनमें चितई, घोड़ाखाल प्रमुख हैं श्रद्धालु अपने निवेदन पत्र बाँधकर न्याय की गुहार लगाते हैं। इसी कारण वे केवल आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि न्याय और सत्य के रक्षक माने जाते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी - [ब्रह्मकपाल बद्रीनाथ: पितरों के मोक्ष और पिंडदान का सर्वोच्च तीर्थ।](https://www.ekumaon.com/2025/09/brahmakapal-badrinath-supreme-pilgrimage-for-the-salvation-of-ancestors-pinddaan.html): देवभूमि उत्तराखंड में स्थित बैकुंठ धाम श्री बद्रीनाथ न सिर्फ जीवितों के लिए मोक्ष का द्वार माना जाता है, बल्कि पितरों की मुक्ति का सर्वोच्च तीर्थ स्थल भी है। यहां स्थित ‘ब्रह्मकपाल’ को पितरों की मोक्ष प्राप्ति का सुप्रीम कोर्ट कहा जाता है। मान्यता है कि यहां किया गया पिंडदान और तर्पण पितरों को सीधा मोक्ष प्रदान करता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का - [प्रधानमंत्री मोदी पहुंचे उत्तराखंड, ₹1200 करोड़ की वित्तीय सहायता की घोषणा।](https://www.ekumaon.com/2025/09/pm-modi-uttarakhand-flood-relief-1200-crore-html.html): देहरादून : प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आज देहरादून पहुंचे और उत्तराखण्ड में हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए समीक्षा बैठक की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने राज्य को ₹1200 करोड़ की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get - [खतड़वा त्योहार क्यों मनाया जाता है ? जानें सच और भ्रांति।](https://www.ekumaon.com/2025/09/khatarua-festival-kumaon-history-significance.html): उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र में हर वर्ष शरद ऋतु की शुरुआत पर मनाया जाने वाला खतड़वा पर्व (Khatarua Festival ) सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि लोकजीवन, पशुधन और प्रकृति से जुड़ी मान्यताओं का प्रतीक है। इसे लेकर कई तरह की कहानियाँ और मान्यताएँ प्रचलित हैं—कुछ लोग इसे पशुओं की कुशलता की कामना और ऋतु परिवर्तन का पर्व मानते हैं, तो कुछ इसे कुमाऊँ और गढ़वाल के राजाओं के बीच हुए कथित युद्ध से जोड़ते हैं। लेकिन क्या वास्तव में इस त्योहार के पीछे कोई ऐतिहासिक प्रमाण है, या यह केवल भ्रांति भर है? आइए जानते हैं खतड़वा पर्व के पीछे - [राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025: उत्तराखण्ड की डॉ. मंजू बाला को मिला सम्मान, बनीं पहली महिला प्रधानाध्यापिका](https://www.ekumaon.com/2025/09/dr-manju-bala-national-teacher-award-2025.html): शिक्षक दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 समारोह में उत्तराखण्ड का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय पटल पर रोशन हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में और केन्द्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान के हाथों चम्पावत जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालय च्यूरानी की प्रधानाध्यापिका डॉ. मंजू बाला को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का - [उत्तराखंड आपदा 2025 : अब तक 79 मौतें, 1944 करोड़ का नुकसान](https://www.ekumaon.com/2025/09/uttarakhand-disaster-2025-loss-report-html.html): उत्तराखंड में इस वर्ष मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं ने जनजीवन और राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। पहाड़ी जिलों में भूस्खलन, बादल फटना और अतिवृष्टि जैसी घटनाओं ने न सिर्फ दर्जनों लोगों की जान ली है, बल्कि हजारों लोग बेघर भी हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 अगस्त 2025 तक 79 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 115 लोग घायल हुए हैं और 90 लोग लापता हैं। Uttarakhand Disaster 2025 Loss Report मानसून सीजन में आयी इस आपदा ने न केवल जनहानि पहुंचाई है, बल्कि पशुधन और आवासीय - [दुबई को रवाना हुई गढ़वाली सेब की पहली खेप | Uttarakhand Apple Export](https://www.ekumaon.com/2025/08/uttarakhand-garhwali-apple-export-dubai-html.html): देहरादून। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग की ओर से गुरुवार को देहरादून से दुबई के लिए 1.2 मीट्रिक टन गढ़वाली सेब (किंग रोट किस्म) की पहली परीक्षण खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह परीक्षण खेप कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से संभव हो पाई है। यह पहल उत्तराखंड से कृषि निर्यात को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की - [उत्तराखंड कैबिनेट बैठक: युवाओं, महिलाओं और भूतपूर्व सैनिकों के लिए नई रोजगार नीति।](https://www.ekumaon.com/2025/08/uttarakhand-cabinet-meeting-employment-policy-women-youth-sainik-html.html): देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में महिलाओं, युवाओं और भूतपूर्व सैनिकों के लिए अलग-अलग रोजगार नीतियाँ तैयार करने का निर्णय लिया गया है, जिससे रोजगार के साधन बढ़ाने और कौशल विकास को गति मिलेगी। युवाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार मेले कैबिनेट ने निर्णय लिया कि युवाओं को सरकारी सेवाओं, नीट, नर्सिंग, विदेशी भाषाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही बड़े स्तर पर युवा महोत्सव और रोजगार मेलों का आयोजन किया जाएगा, - [खूनी गांव बना अब देवीग्राम, जानिये क्यों कहते थे यह अजीब नाम।](https://www.ekumaon.com/2025/08/khooni-gaon-now-devigram-pithoragarh.html): उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ का चर्चित खूनी गांव अब ‘देवीग्राम’ के नाम से जाना जाएगा। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों के विशेष प्रयासों के बाद भारत सरकार ने इस नाम परिवर्तन की अनुमति प्रदान की। इसके बाद उत्तराखंड शासन के राजस्व विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे - [Krishna Janmashtami : जन्माष्टमी पर अपनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश।](https://www.ekumaon.com/2025/08/krishna-janmashtami-wishes-quotes-messages-whatsapp-status.html): श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भारत में बड़े धूमधाम और हर्षोल्लाष के साथ मनाने की परम्परा पुरा काल से चली आ रही है।   यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा में हुआ था, इसीलिये हर वर्ष इस तिथि को श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे लोग ‘जन्माष्टमी’ के नाम से जानते हैं। (Krishna Janmashtami 2025) Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की - [धराली आपदा में भावुक कर देने वाला क्षण: रक्षाबंधन से पहले महिला ने सीएम धामी को बांधी राखी](https://www.ekumaon.com/2025/08/an-emotional-moment-in-dharali-disaster.html): उत्तरकाशी जनपद के धराली क्षेत्र में आई भीषण आपदा के बाद राहत और बचाव कार्यों का निरीक्षण कर रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने गुरुवार को एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद सभी की आंखें नम कर दीं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction - [रक्षाबंधन के कुछ चुनिंदा बधाई और शुभकामना सन्देश।](https://www.ekumaon.com/2025/08/special-raksha-bandhan-wishes.html): येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction तेन त्वाम् अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ भाई-बहन के असीम प्रेम व अटूट रिश्ते के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इस दिन बहिन अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर रिश्ते - [प्रेरक गीत : हम होंगे कामयाब एक दिन के लिरिक्स हिंदी में।](https://www.ekumaon.com/2025/08/motivational-song-hum-honge-kamyab-lyrics.html): “हम होंगे कामयाब एक दिन” (Hum Honge Kamyab) एक प्रसिद्ध हिंदी प्रेरक गीत है, जिसे भारत में राष्ट्रीय पर्वों, विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं, सामाजिक और शैक्षिक आंदोलनों तथा राष्ट्र निर्माण के सन्दर्भ में बड़े भावनात्मक और आदर्शवादी भाव से गाया जाता है। यह गीत न केवल आशा और आत्मविश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह एकता, साहस और दृढ़ निश्चय की भावना को भी उजागर करता है। यहाँ हम आपके लिए इस प्ररेणादायक गीत के लिरिक्स प्रस्तुत कर रहे हैं,  जो इस प्रकार हैं – हम होंगे कामयाब गीत के बोल हम होंगे कामयाब एक दिनहम होंगे कामयाब एक दिनहो हो - [हर्षिल-धराली आपदा: मुख्यमंत्री धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा, राहत कार्यों में तेजी के निर्देश](https://www.ekumaon.com/2025/08/uttarkashi-disaster-relief-review.html): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार देर शाम उत्तरकाशी स्थित स्मार्ट कंट्रोल रूम में हर्षिल और धराली क्षेत्रों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान अन्य जनपदों के जिलाधिकारी और शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे - [बिरुड़ पंचमी-गौरा के अपने मायके आने की ख़ुशी का पर्व।](https://www.ekumaon.com/2025/07/birud-panchami.html): उत्तराखंड की संस्कृति लोक परंपराओं और पर्वों से समृद्ध है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि समाज की सामूहिक चेतना और पारिवारिक मूल्यों को भी जीवंत बनाए रखते हैं। कुमाऊं अंचल में मनाया जाने वाला ‘बिरुड़ पंचमी’ ऐसा ही एक पारंपरिक पर्व है, जो भाद्रपद माह की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण - [Kargil Vijay Diwas 2026-शुभकामना, कोट्स और शौर्य सन्देश।](https://www.ekumaon.com/2025/07/kargil-vijay-divas-status.html): भारतीय इतिहास में 26 जुलाई का दिन ‘कारगिल विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। भारत-पाकिस्तान के बीच 60 दिन तक चले युद्ध का विराम इसी 26 जुलाई 1999 को हुआ था। भारतीय वीरों ने कायर पाकिस्तानी सेना को इस युद्ध में धूल चटा दी थी। जिसके बाद इस दिन को कारगिल विजय दिवस ( Kargil Vijay Davas) के रूप में मनाया जाने लगा। यह दिन न केवल एक सैन्य विजय का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्र के प्रति अटूट निष्ठा का परिचायक भी है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में - [उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025- कार्यक्रम, खर्च सीमा समेत पूरी जानकारी।](https://www.ekumaon.com/2025/06/panchayat-election-uttarakhand-2025-schedule-expenditure-limit.html): उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2025 की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही राज्य के 12 जनपदों (हरिद्वार को छोड़कर) में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जो 19 जुलाई 2025 को मतगणना संपन्न होने तक प्रभावी रहेगी। इस बार चुनाव दो चक्रों में संपन्न कराए जाएंगे, जिनके तहत 10 जुलाई और 15 जुलाई को मतदान होगा। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की - [हुड़का : उत्तराखंड के लोकजीवन से जुड़ा वाद्य यंत्र।](https://www.ekumaon.com/2025/06/hudka-traditional-musical-instrument-of-uttarakhand.html): उत्तराखण्ड, जिसे ‘देवभूमि’ भी कहा जाता है, केवल अपने मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति और संगीत के लिए भी जाना जाता है। यहाँ के लोकवाद्य न केवल मनोरंजन के उपकरण हैं, बल्कि वे धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के माध्यम भी हैं। इन्हीं वाद्य यंत्रों में से एक है-हुड़का। लोकजीवन से जुड़ा हुड़का हुड़का केवल एक वाद्य यंत्र नहीं है, बल्कि यह देवताओं के जागरण, लोकगीतों और लोकनृत्य की आत्मा है। उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल अंचलों में विशेष रूप से यह देवी-देवताओं की जागर के अवसर पर प्रयोग होता रहा है। इसे - [दशौर - गंगा दशहरा द्वार पत्र लगाने की विशिष्ट एक परम्परा।](https://www.ekumaon.com/2025/06/ganga-dussehra-dwar-patra-uttarakhand.html): सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी के कमंडल से राजा भागीरथ द्वारा देवी गंगा के धरती पर अवतरण दिवस को ‘गंगा दशहरा‘ के नाम से जाना जाता है। जिसे उत्तराखण्ड में ‘दशौर’ भी कहते हैं। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाये जाने वाले इस पर्व के दिन लोग विभिन्न गंगा घाटों पर स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। (shri ganga dussehra dwar patra) Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों - [फूलों की घाटी, जहाँ प्रकृति हर 15 दिन में बदल लेती है नया रंग।](https://www.ekumaon.com/2025/06/valley-of-flowers-nature-changes-every-15-days.html): उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित फूलों की घाटी (Valley of Flowers) प्रकृति प्रेमियों और साहसिक यात्रा का शौक रखने वाले लोगों के लिए किसी स्वप्नलोक से कम नहीं। छह महीने के लंबे इंतजार के बाद 1 जून से यह घाटी एक बार फिर से पर्यटकों के लिए खुल चुकी है। पहले ही दिन 49 पर्यटकों ने इसकी खूबसूरती को निहार लिया है। फूलों की घाटी के खुलने का इन्तजार कर रहे पर्यावरण प्रेमी, प्रकृति के शोधकर्ता और रोमांच के शौकीन खासे उत्साहित हैं। इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि तीर्थयात्रा सीजन के जोश को देखते हुए घाटी - [राजा हरूहीत की लोकगाथा: कुमाऊँ की सांस्कृतिक आस्था और न्याय की अमर मिसाल](https://www.ekumaon.com/2025/05/raja-haruhit-ki-kahani.html): उत्तराखंड की धरती न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिकता से भरी है, बल्कि यहां की लोककथाएं भी इसकी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए हैं। ऐसी ही एक मार्मिक और प्रेरक गाथा है राजा हरूहीत की, जो आज भी कुमाऊँ की आस्था, न्याय और बलिदान का प्रतीक माने जाते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और - [ब्रजेंद्र लाल शाह और उत्तराखंड के लोक संगीत में उनका योगदान](https://www.ekumaon.com/2025/05/brajendra-lal-shah-and-his-contribution-to-the-folk-music-of-uttarakhand.html): Brajendra Lal Shah : उत्तराखंड की लोक संस्कृति के संरक्षण में रंगकर्मी स्व. ब्रजेंद्र लाल शाह (जन्म 13 अक्टूबर 1928 स्थान – अल्मोड़ा) का अहम योगदान रहा है। उन्होंने ने पहाड़ की लोक संस्कृति को एक नई पहचान दिलाई। यही नहीं एक नई पीढ़ी को भी तैयार किया। स्व. शाह लोक संगीत को मनोरंजन नहीं बल्कि जन चेतना के वाहक मानते थे। स्व. मोहन उप्रेती और अन्य रंगकर्मियों के साथ मिल कर उन्होंने बेडू पाको बारामासा जैसे लोक गीत की रचना की। गांव-गांव जाकर पहाड़ के दो हजार लोकगीतों को संकलित किया। उनके कुमाऊंनी और गढ़वाली रामलीला उल्लेखनीय रही है। - [पंचायत चुनाव 2025: मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध](https://www.ekumaon.com/2025/05/panchayat-chunav-2025-matdata-soochi-online-check.html): राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन 2025 को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के मतदाताओं को एक अहम सुविधा प्रदान की है। अब पंचायत क्षेत्र के मतदाता अपने नाम की जानकारी निर्वाचक नामावली में ऑनलाइन माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा आयोग द्वारा विकसित मतदाता सूची पोर्टल secvoter.uk.gov.in पर उपलब्ध कराई गई है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का - [मेजर प्रिया पालनी की पहल-बागेश्वर में पहली बार SSB मार्गदर्शन शिविर, युवाओं के लिए सुनहरा अवसर।](https://www.ekumaon.com/2025/05/initiative-of-former-army-officer-major-priya-palani.html): बागेश्वर। पर्वतों की गोद में शिव नगरी बागेश्वर न केवल अपने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गौरव के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अब यह जिला देशसेवा की नई मशाल थामे एक संकल्प का गवाह भी बनने जा रहा है। यह संकल्प लिया है, रिटायर्ड मेजर प्रिया पालनी ने।  मेजर पालनी भारतीय सेना की पूर्व अधिकारी रही हैं और अब अपने जिले के युवाओं को एसएसबी जैसी कठिन चयन प्रक्रिया के लिए दिशा देने के लिए मैदान में उतरने वाली हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: - [रहस्यों और आस्था से परिपूर्ण: पंच केदारों में एक-श्री रुद्रनाथ मंदिर।](https://www.ekumaon.com/2025/05/doors-of-rudranath-temple-were-officially-opened-and-devotees-took-the-first-darshan.html): उत्तराखंड, जिसे प्राचीन काल से देवभूमि या देवताओं की भूमि कहा जाता है, अपने रहस्यमय और आध्यात्मिक मंदिरों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हिमालय की गोद में बसे इन मंदिरों की विशेषता न केवल इनकी भौगोलिक कठिनाइयों में है, बल्कि उनसे जुड़ी पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताओं में भी छिपी है। ऐसा ही एक अत्यंत पवित्र और रहस्यपूर्ण मंदिर है-श्री रुद्रनाथ मंदिर, जो पंच केदारों में से एक प्रमुख तीर्थस्थल है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन - [कटारमल सूर्य मंदिर: कोणार्क से भी प्राचीन उत्तराखंड का अद्भुत धरोहर](https://www.ekumaon.com/2025/05/know-about-katarmal-sun-temple.html): उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत अनेक रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थलों से समृद्ध है, जिनमें से एक है कटारमल सूर्य मंदिर। यह मंदिर न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि समूचे भारतवर्ष के लिए एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर है। यह मंदिर कोणार्क के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर से भी लगभग दो सौ वर्ष पुराना माना जाता है, जिससे इसकीऐतिहासिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। मंदिर की बेजोड़ स्थापत्य और शिल्प कला हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट - [कल्पेश्वर महादेव : ऐसा धाम जहाँ शिव की जटायें पूजी जाती हैं](https://www.ekumaon.com/2025/05/kalpeshwar-mahadev-a-place-where-shiva-dreadlocks-are-worshipped.html): कल्पेश्वर महादेव, उत्तराखंड में चमोली जनपद के उर्गम घाटी में स्थित भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। पंच केदार (केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मध्यमहेश्वर, और कल्पेश्वर) में से एक कल्पेश्वर ही एकमात्र ऐसा मंदिर है जो पूरे वर्ष भक्तों के लिए खुला रहता है। मंदिर की प्रमुख विशेषता है कि यहाँ भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में - [पहाड़ी किस्से और कहानियां - हलदुआ और पिंगलुआ का किस्सा।](https://www.ekumaon.com/2025/05/pahadi-tales-stories-the-story-of-haldua-and-pinglua.html): पहाड़ों के लोकजीवन में किस्से और कहानियों का विशेष स्थान रहा है। यहाँ से जुड़े किस्से और कहानियों में, आप प्रकृति के साथ गहरा संबंध, स्थानीय लोगों की संस्कृति और जीवनशैली, और कभी-कभी जादुई तत्वों को भी पाएंगे। ये कहानियां अक्सर स्थानीय भाषाओं में सुनाई जाती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती हैं। बदलते दौर में ये किस्से और कहानियां धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जोहार घाटी से जुड़ा एक रोचक किस्सा आप सभी के लिए प्रस्तुत है। आज के समय में शायद ही कोई ऐसी कहानियों पर विश्वास करे, लेकिन दादा-दादी का - [त्रियुगीनारायण: जानिए क्यों यह जगह बनती जा रही है परफेक्ट वेडिंग डेस्टिनेशन!](https://www.ekumaon.com/2025/05/triyuginarayan-temple-wedding-destination.html): जब बात शादी की आती है, तो हर कोई चाहता है कि वह दिन खास, यादगार और कुछ हटकर हो। आजकल डेस्टिनेशन वेडिंग का चलन जोरों पर है, लेकिन क्या आपने कभी हिमालय की गोद में बसे एक ऐसे पवित्र स्थान में शादी करने की कल्पना की है जहाँ खुद भगवान शिव और माता पार्वती ने सात फेरे लिए थे? Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन - [बद्रीनाथ एवं केदारनाथ : उत्तर के दो प्रमुख तीर्थस्थलों की ख़ास जानकारी](https://www.ekumaon.com/2025/05/badrinath-kedarnath-two-major-pilgrimage-places-of-the-north.html): उत्तर भारत के दो तीर्थस्थल बद्रीनाथ एवं केदारनाथ संपूर्ण भारतवासियों के प्रमुख आस्था-केंद्र हैं। धामों की संख्या चार है, बद्रीनाथ, द्वारका, रामेश्वरम् एवं जगन्नाथपुरी। ये धाम भारतवर्ष के क्रमश: उत्तरी, पश्चिमी, दक्षिणी एवं पूर्वी छोरों पर स्थित हैं। बद्रीनाथ उत्तराखंड, द्वारिका गुजरात, रामेश्वरम तमिलनाडु और जगन्नाथपूरी उड़ीसा में स्थित है। बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ के कपाट शरद् ऋतु में बंद हो जाते हैं और ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ में खुलते हैं। शेष तीन धामों की यात्रा पूरे वर्ष चलती रहती है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख - [लोककथा: "सरग ददा पाणी, पाणी!"- एक श्रापित चातक की करुण गाथा।](https://www.ekumaon.com/2025/05/chaatak-pakshi-ki-katha-sarag-dida-pani-uttarakhand-lokkatha.html): उत्तराखंड के सुरम्य पर्वतीय अंचल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से भरे हैं, बल्कि वहाँ की लोक संस्कृति भी उतनी ही समृद्ध और भावपूर्ण है। यहां के लोगों का प्रकृति के साथ आत्मीय रिश्ता है। यही कारण है कि यहां की लोककथाओं में अक्सर पक्षी, पेड़, झरने और जानवर पात्र बनकर मानवीय भावनाओं को दर्शाते हैं। ऐसी ही एक मार्मिक लोककथा है –चातक पक्षी की कथा, जिसे उत्तराखण्ड में “सरग ददा पाणी, पाणी” से जानते हैं।  Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा - [परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण के लिए अनूठी पहल।  ](https://www.ekumaon.com/2025/03/unique-initiative-for-conservation-of-traditional-water-sources.html): उत्तराखण्ड के परंपरागत जल स्रोत (Traditional Water Source) हमारे नौले एवं धारे ही हैं। ये यहाँ की संस्कृति और परम्परा में रचे बसे हैं। इनका उपयोग यहाँ के लोग सदियों से करते आये हैं। मनुष्य से लेकर मवेशी और अन्य जीव इन्हीं के जल पर निर्भर थे, लेकिन वर्तमान में ये नौले और धारे उपेक्षित हैं। बदलती जलवायु, जीर्णोद्धार और रख-रखाव के अभाव में जीवन के ये स्रोत अब अपने अस्तित्व को खोते जा रहे हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की - [गंध यानी बास के लिए इतने सारे शब्द हैं कुमाऊंनी में।](https://www.ekumaon.com/2025/03/there-are-so-many-words-for-smell-in-kumaoni.html): गंध यानी बास, जो किसी पदार्थ से निकलने वाले सूक्ष्म रासायनिक कणों के रूप में हमारी नाशिका (नाक) की घ्राण संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा महसूस की जाती है। यह सुगंध भी हो सकती हैं और दुर्गन्ध भी। हिंदी शब्दावली में गंध के लिए कुछ सीमित शब्द हैं, जो समानार्थी शब्द ही होते हैं। जैसे अच्छी गंध के लिए सुगंध और खुशबू जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। वहीं दुर्गन्ध के लिए बदबू, बू, बास जैसे शब्द हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की - [नथ-पहाड़ी महिलाओं की अमूल्य पूंजी।](https://www.ekumaon.com/2025/02/kumaoni-and-garhwali-pahadi-nath.html): ‘पहाड़ी नथ’ कहें या ‘कुमाउनी नथ’, या फिर ‘गढ़वाली नथ’ यह खूबसूरत आभूषण यहां के महिलाओं की पहचान है। जो पहाड़ी महिलाओं का सबसे पसंदीदा आभूषणों में से एक है। किसी खास उत्सव या मांगलिक कार्यों में उत्तराखंडी महिलाओं द्वारा नाक में पहना जाने वाला यह सुन्दर गोल आकार का स्वर्ण आभूषण को स्थानीय भाषा में ‘नथ’ (Nath) के नाम से ही जाना जाता है। इस आभूषण को विवाह के समय मायके या ससुराल पक्ष द्वारा लड़की को भेंट स्वरूप दिया जाता है और इसे सुहागिन महिलायें ताउम्र विभिन्न उत्सवों और समारोहों पर पहनती हैं। Table of Contents Toggle जहाँ - [फूलदेई त्योहार और इससे जुड़े रोचक तथ्य।](https://www.ekumaon.com/2025/02/phooldei-festival-in-uttarakhand.html): बसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व ‘फूलदेई’ उत्तराखंड के प्रमुख और लोकप्रिय त्यौहारों में से एक है। जिसे सिर्फ छोटे बच्चों के द्वारा मनाया जाता है, इसीलिये इसे ‘लोक बाल पर्व’ भी कहते हैं। नन्हें बच्चे इस अवसर पर अपने गांव के सभी घरों की दहलीज पर रंग-बिरंगे फूलों को अर्पित करते हुए घर को अपने आशीर्वचन देते हैं। यही इस त्यौहार की प्रमुख विशेषता है।   फूलदेई त्योहार फूलदेई त्यौहार की तैयारियां बच्चे और उनके अभिभावक संक्रांति से एक दिन पहले प्रारम्भ कर देते हैं। वे अपने आसपास से बंसत के मौसम में खिले - [बसंत पंचमी 2025: मां सरस्वती पूजा तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व।](https://www.ekumaon.com/2025/01/basant-panchami-saraswati-puja-date-auspicious-tim-significance.html): बसंत पंचमी 2025: सरस्वती पंचमी या श्री पंचमी, जिसे बसंत पंचमी के नाम से भी जाना जाता है, जो भारत के लोकप्रिय पर्वों में से एक है। सनातन धर्म को मानने वाले लोग इस दिन देवी सरस्वती जी की पूजा करते हैं। यह पर्व हिंदू महीने माघ के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो हर साल अंग्रेजी कैलेंडर में फरवरी माह में आता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव - [उत्तराखंड में मकर संक्रांति | घुघुतिया | पुषूड़िया | चुन्या त्यार | उत्तरायणी](https://www.ekumaon.com/2025/01/the-festival-of-makar-sankranti-is-special-in-uttarakhand.html): उत्तराखंड में मकर संक्रांति का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। सौर चक्र में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर जाने तथा ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य के धुन राशि से मकर राशि में गोचर करने पर यहाँ इस पर्व को ‘उत्तरायणी’ और ‘मकरैंणी’ के नाम से जानते हैं। इस दिन पहाड़ों के विभिन्न गॉंवों में ‘घुघुतिया’, पुषूड़िया, चुन्या त्यार और खिचड़ी संक्रांद जैसे त्योहार मनाये जाते हैं। वहीं यहाँ उत्तरैणी, माघ मेला और गिंदी मेला जैसी ऐतिहासिक मेलों आयोजन भी होता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी - [घुघुती क्या है, जानें इससे जुड़ी रोचक बातें-Ghughuti Festival 2026](https://www.ekumaon.com/2025/01/ghughuti-festival-know-interesting-things-related-to-this.html): Ghughuti Festival : उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में हर साल माघ माह की संक्रांति पर एक त्योहार मनाया जाता है, जिसे ‘घुघुती त्यार’ या घुघुतिया त्योहार कहते हैं। यहाँ, इस त्योहार को बड़े हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है। कौआ इस त्योहार का मुख्य आकर्षण होता है। बच्चे इस दिन कौओं को आटे और गुड़ से बने इस विशेष प्रकार के पकवान को ‘काले कौआ काले, घुघुती माला खा ले‘ की आवाज देते हुए खिलाते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की - [झन दिया बौज्यू छाना बिलौरी, लागला बिलौरी का घाम के बोल।](https://www.ekumaon.com/2025/01/jhan-diya-boujyu-chhana-bilouri-lyrics.html): यदि आप उत्तराखण्ड से हैं तो आपने ‘झन दिया बौज्यू छाना बिलौरी, लागला बिलौरी का घाम’ गीत अक्सर सुना या गुनगुनाया होगा। इस गाने में एक युवती अपने पिता से मनुहार करती है कि उसकी शादी छाना बिलौरी नामक गांव/इलाके में न की जाये क्योंकि वहाँ अनेक प्रकार के कष्ट हैं और सबसे मुश्किल बात यह है कि तेज धूप पड़ने के कारण वहाँ गरमी होती है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी - ['छोलिया नृत्य' का प्राचीन इतिहास। Choliya Dance Uttarakhand](https://www.ekumaon.com/2025/01/choliya-dance.html): Choliya Dance: उत्तराखंड में सैकड़ों सालों से प्रचलित ‘छोलिया नृत्य’ ने आकर्षण आज भी नहीं खोया है। अद्भुत छोलिया नृत्य दरअसल युद्ध का नृत्य है। यह नृत्य युद्धभूमि में लड़ रहे शूरवीरों के वीरता मिश्रित छल का नृत्य है। युद्धभूमि में दुश्मन को छल से कैसे हराया जा सकता है, यही इस नृत्य में दर्शाया गया है। इसी कारण इसे छल नृत्य (बाद में छलिया, अब छोलिया नृत्य) कहा जाता है। जानकारों के अनुसार इस नृत्य का प्रचलन दसवीं सदी में शुरू हुआ। कुमाऊं में आज भी सभी प्रमुख समारोह, शादी आदि के मौके पर छोलिया नृत्य का आयोजन होता - [प्रसिद्ध पहाड़ी भजन-कीर्तन के लिरिक्स (कुमाऊंनी और गढ़वाली)](https://www.ekumaon.com/2025/01/pahadi-bhajan-lyrics.html): उत्तराखंड की भूमि ऋषि-मुनियों की तपस्थली रही है। वहीं यहाँ देवी पार्वती का मायका और शिव का ससुराल है। मान्यता है यहाँ के कण-कण में देवी-देवताओं का वास है। इसीलिए इस भूमि को देवभूमि कहा जाता है। इस पावन भूमि में रहने वाले लोगों ने माता गौरा को ‘नंदा’ रूप में अपनी बेटी और शिव को दामाद का दर्जा दिया है। वहीं यहाँ भूमिया, गोलू जैसे अनेक लोक देवी-देवताओं को अपना पूजनीय बनाया है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में - [पौष की ठिठुरन के साथ ही शुरु हो जाती है, कुमाऊं की बैठ होली।](https://www.ekumaon.com/2024/12/the-sitting-holi-of-kumaon-begins-with-the-chill-of-paush.html): Kumaoni Holi: संगीत और गायन दृष्टि से उत्तराखण्ड के कुमाऊं अंचल की होली विशिष्ट है। यहां होली गायन की दो विधाएं दिखायी देती हैं। ‘खड़ी होली‘ है जो ग्रामीण परिवेश के अत्यन्त निकट है उसमें आम जन की भागीदारी प्रमुखता से रहती है। इसका गायन फाल्गुन एकादशी से प्रारम्भ होकर पूर्णिमा के अगले दिन ‘छलड़ी‘ तक चलता है। इस होली में ‘होल्यार‘ गोल घेरे में घूमते हुए ढोल-मजीरे की ताल पर घर-आँगन में होली गायन करते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी - [बुरांश का फूल और उसके औषधीय महत्व | Buransh Flower](https://www.ekumaon.com/2024/12/buransh-and-its-medicinal-importance.html): Buransh Flower: सदाबहार पहाड़ी वृक्षों में बसंत के आगमन पर यदि कोई वृक्ष फूलों की बहार बिखेरता है तो वह है ‘बुरांश’। बुरांश का नाम आते ही एक ऐसे वृक्ष का दृश्य आंखों के आगे तैरने लगता है जो बड़े-बड़े गुच्छानुमा गहरे लाल रंग के फूलों से लदा है और जो दूर से ही सदाबहार हरे जंगलों के बीच अपनी आकर्षक उपस्थिति दर्शाता है। जी, हां! बुरांश का फूल है ही ऐसा जिसे हर कोई देखना चाहेगा, हर कोई उसे अपने ड्राइंग रूम में सजाना चाहेगा। अगर किसी जगह पर एक साथ दर्जनभर बुरांशके पेड़ खिले हों तो समूचा क्षेत्र - [स्वर्ग तारा जुन्याली रात के बोल एवं हिंदी में भावार्थ।](https://www.ekumaon.com/2024/11/swarg-tara-junyali-raat-lyrics.html): Swarg Tara Junyali Raat: दशकों से उत्तराखंड के मधुर गीतों में शामिल होकर जन-जन का लोकप्रिय गीत ‘स्वर्ग तारा जुन्याली रात, को सुणलो यो मेरी बात’ एक प्रेमगीत है। जिसमें नायक अपनी नायिका की तुलना सरग यानी आसमान (स्वर्ग) के तारे से कर रहा है। वह कहता है – ‘स्वर्ग की तारा यानी स्वर्ग के तारे जैसी सुन्दर, इस जुन्याली अर्थात चांदनी रात में मेरी बात कौन सुनेगा ?’   स्वर्ग तारा गीत के गीतकार (रचयिता) पिथौरागढ़ जनपद स्थित मल्ला जाखनी निवासी स्वर्गीय श्री शेर सिंह रावत जी हैं। इस गीत को स्वर्गीय श्री गोपाल बाबू गोस्वामी, चंद्र सिंह राही - [इगास बग्वाल और बूढ़ी दिवाली की अनूठी परम्परायें।](https://www.ekumaon.com/2024/11/igas-bagwal-wishes-and-unique-traditions.html): उत्तराखण्ड में कार्तिक शुक्ल की एकादशी को एक ख़ास त्योहार मनाया जाता है जिसे केदारखंड (गढ़वाल) में ‘इगास बग्वाल’ और मानसखंड (कुमाऊं) में ‘बूढ़ी दिवाली’ के नाम से जानते हैं। यहाँ ये त्योहार दीपावली से ठीक 11 दिन बाद देव दीपावली के दिन मनाने की परंपरा है। दरअसल ज्योति पर्व दीपावली का उत्सव इसी दिन पराकाष्ठा को पहुंचता है, इसलिए पर्वों की इस श्रृंखला को इगास-बग्वाल नाम दिया गया। यहाँ इस त्योहार मनाने की अनूठी परम्परायें हैं। जो यहाँ की संस्कृति और समृद्ध रीति-रिवाजों का परिचायक है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है - [Uttarakhand Movement: उत्तराखंड राज्य प्राप्ति की संघर्ष गाथा (वर्ष 1938-2000)](https://www.ekumaon.com/2024/11/uttarakhand-movement-the-story-of-struggle-to-attain-uttarakhand-state.html): उत्तराखंड, भारत के उत्तर में हिमालय की तलहटी में स्थित एक सुरम्य पहाड़ी प्रदेश है। जिसकी अंतरराष्ट्रीय सीमायें उत्तर में तिब्बत (चीन अधिकृत) और पूर्व में नेपाल से लगती हैं। वहीं पश्चिम में प्रदेश सीमा हिमाचल और दक्षिण में उत्तर प्रदेश से लगती हैं। उत्तराखंड का अधिकांश क्षेत्र पहाड़ी है और क्षेत्रफल लगभग 53,483 वर्ग किलोमीटर है। दिनांक 9 नवंबर 2000 के दिन उत्तराखंड देश के 27 वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा - [Bhat Ke Dubke: स्वादिष्ट भट के डुबके के फायदे अनेक।](https://www.ekumaon.com/2024/11/bhat-ke-dubke.html): Bhat Ke Dubke:  उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सोयाबीन को ‘भट’ कहा जाता है। यहाँ काले और सफ़ेद रंग के भट (सोयाबीन) की पैदावार अच्छी मात्रा में होती है। लेकिन काला भट (Black Bean, Phaseolus vulgaris) अपने उच्च पोषण तत्व व औषधीय महत्व के कारण यहाँ की एक महत्वपूर्ण फसल है। सर्दियों के मौसम आते ही यहाँ के लोग भट (Bhat) को पीसकर पोषक तत्वों से भरपूर एक स्वादिष्ट गाढ़ी दाल बनाते हैं, जिसे यहाँ ‘भट के डुबके‘ कहते हैं। जो मुख्यतः चाँवल यानी भात के साथ मिलाकर खाया जाता है। यहाँ हम उत्तराखंड के इस लजीज व्यंजन के बारे - [ऐपण (Aipan) का इतिहास, वैज्ञानिक आधार और महत्व।](https://www.ekumaon.com/2024/10/history-scientific-basis-significance-of-aipan.html): ऐपण (Aipan) उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल की पारम्परिक लोक कलाओं में से एक है। मुख्यतः विभिन्न धार्मिक समारोहों और त्यौहारों के अवसर पर बनाये जाने वाले इस कला का यहाँ बड़ा सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। जिसे यहाँ बेटियों और महिलाओं द्वारा अपने हाथों से चित्रित किया जाता है। लोककला की यह शैली पूर्णतः लोकमान्यताओं पर आधारित है, जिसमें बनाये जाने वाले बिंदुओं, पंचधारा,अष्टकमल, स्वास्तिक, सूर्य, चंद्र, घंट और डमरू के अपने महत्व होते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की - [कीड़ाजड़ी-ताकत का खजाना है यह सोने से महँगी जड़ी।](https://www.ekumaon.com/2024/10/keeda-jadi-benefits-and-price.html): उच्च हिमालयी क्षेत्र कई ऐसे दुर्लभ जड़ी-बूटियों के भंडार हैं, जो हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। इनका उपयोग आयुर्वेद में चिकित्सा के लिए प्राचीन काल से होता चला आ रहा है। ऐसी ही एक जड़ी है जिसे हम “Keeda Jadi” ,  यारसागुम्बा या कॉर्डिसेप्स के नाम से जानते हैं। पारम्परिक चीनी और तिब्बती चिकित्सा पद्धति में इसे ताकत, स्टैमिना और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत ही प्रभावी माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Ophiocordyceps sinensis है। आईये विस्तृत में पढ़ते हैं इस हिमालयन जड़ी के बारे में – Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 - [संघर्ष के प्रेरक उद्धरण-जो आपके हौसले को नई उड़ान देंगे।](https://www.ekumaon.com/2024/10/struggle-motivational-quotes-in-hindi.html): Struggle Motivational Quotes in Hindi: जीवन में संघर्ष एक स्वाभाविक एवं अनिवार्य हिस्सा है, जिसे अपने जीवन काल में मनुष्य को किसी न किसी समय झेलना पड़ता है। यही उसकी असली परीक्षा की घड़ी भी होती कि वह इस संघर्ष को कैसे पार पाता है। यही संघर्ष हमें अपने जीवन में धैर्य और ढृढ़ता का पाठ पढ़ाता है। यह वही समय होता है जब हमारी सहनशक्ति, मानसिक और शारीरिक शक्ति का परीक्षण होता है। यह हमें आत्म-परीक्षण करने और अपने को बेहतर बनाने का मौक़ा देता है।   Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है - [UK RTO Code List: जानिए गाड़ी के नंबर प्लेट पर लिखा कोड किस जिले का है ?](https://www.ekumaon.com/2024/10/uk-rto-code-list.html): UK RTO Code List: पहाड़ी राज्य उत्तराखंड क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का 19वां राज्य है, जिसका क्षेत्रफल 53,483 वर्ग किलोमीटर है। जिसमें 46,035 वर्ग किलोमीटर पर्वतीय और 7,448 वर्ग किलोमीटर मैदानी है। यहाँ वर्तमान में कुल 13 जिले हैं। यहाँ की खूबसूरत वादियां इसे पर्यटन प्रदेशों की सूची में प्रमुख स्थान पर रखते हैं। नैनीताल, मसूरी, कौसानी आदि हिल स्टेशन देश ही नहीं अपितु विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य - [प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए लॉन्च हुई वेबसाइट, पंजीकरण जरूर करें -](https://www.ekumaon.com/2024/10/website-launched-for-migrant-uttarakhandis.html): Website for migrant Uttarakhandis: उत्तराखंड सरकार ने ‘प्रवासी उत्तराखंडी’ नाम से एक वेबसाइट लॉन्च की है, जिसका उद्देश्य भारत से बाहर और भारत के विभिन्न राज्यों में रह रहे प्रवासियों तक पहुंचना और उनसे संपर्क स्थापित करना है। यह प्रकोष्ठ दुनियाभर में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों का एक डेटाबेस बनाने का प्रयास करेगा, जिनसे समय-समय पर विशेष कार्यक्रम के तहत जुड़ने का प्रयास करेगा। यह प्रकोष्ठ प्रवासी उत्तराखंडियों को राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों, कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध कराएगा।  Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक - [प्रकृति और एडवेंचर प्रेमियों के लिए नैनीताल के नज़दीक 7 बेहतरीन वीकेंड गेटवेज़](https://www.ekumaon.com/2024/09/7-best-weekend-getaways-near-nainital.html): Tourist Spot Near Nainital : उत्तराखंड के शांत और सुरम्य कुमाऊँ की वादियों में स्थित नैनीताल एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन, जो खूबसूरत झील और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह शहर वर्षभर पर्यटकों से गुलजार रहता है। वहीं इसके आसपास कई ऐसे रोमांचक दर्शनीय स्थल हैं जो यहाँ आने वाले हर पर्टयक को रोमांच, शांति और बेहतर परिवेश का अहसास करवाते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों - [नंदा देवी मंदिर-अल्मोड़ा, जहाँ पूजा तारा शक्ति के रूप में होती है।](https://www.ekumaon.com/2024/09/nanda-devi-temple-almora.html): आदिशक्ति भगवती की 6 अंगभूता देवियों में से एक ‘नंदा देवी’ उत्तराखंड और हिमालय के अन्य भागों में जन सामान्य की आराध्य हैं। यहाँ देवी को बेटी के रूप में स्थान दिया गया है। यहाँ विभिन्न स्थानों में नंदा के मंदिर हैं। इन्हीं में अल्मोड़ा स्थित ‘नंदा देवी मंदिर’ यहाँ के प्राचीन ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। जिसका निर्माण चंद राजाओं के द्वारा करवाया गया था। यहाँ स्थापित नंदा देवी की प्रतिमा बधाणगढ़ से लाई गई है और माता की पूजा तारा शक्ति के रूप में होती है। आईये जानते हैं इस कुमाऊँ के इस मंदिर के बारे में – - [Bhulekh Uttarakhand: खाता खतौनी - ऑनलाइन देखें](https://www.ekumaon.com/2024/08/bhulekh-uttarakhand-view-land-record-online.html): Bhulekh Uttarakhand: राजस्व विभाग उत्तराखंड द्वारा यहाँ के सभी 13 जिलों के भूलेख का एक ऑनलाइन डाटाबेस है, जहाँ से आप अपनी जमीन से जुड़े दस्तावेजों खसरा-खाता खतौनी, रिकार्ड्स ऑफ़ राइट्स, भूलेख का विवरण ऑनलाइन देख सकते हैं। प्रदेश सरकार की यह आधारिक वेबसाइट bhulekh.uk.gov.in है। जो निरंतर अपडेट होती जा रही है। लोगों की सुविधा के लिए डिजिटल इंडिया के वाक्य को साकार करते हुए विभिन्न दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में - [गिरीश तिवारी 'गिर्दा' द्वारा दिए गए नयी पीढ़ी को महत्वपूर्ण सन्देश।](https://www.ekumaon.com/2024/08/girish-tiwari-girda-and-his-message-to-new-generation.html): हम सबके प्रिय जनकवि, लेखक, संस्कृतिकर्मी और नाटककार गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ जन्म 9 सितंबर, 1945 को अल्मोड़ा के ज्योली हवालबाग (उत्तराखण्ड) में हुआ। उनके पिता का नाम हंसादत्त तिवाडी और माता का नाम जीवंती तिवाडी था। ‘गिर्दा’  की शुरुआती पढ़ाई अल्मोड़ा में हुई। बचपन से ही उनमें कलात्मक अभिरुचि थी। पढ़ाई के बाद उन्होंने कुछ छोटी-मोटी नौकरिय़ां की, अन्तत: नैनीताल में ‘गीत एवम नाट्य प्रभाग’ में नियुक्त हुए। चिपको आंदोलन, वन आंदोलन, नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन और नदी बचाओ आदि आंदोलनों में गिर्दा सक्रिय रहे और उनके लिखे गीतों और कविताओं ने भी इन आन्दोलनों को ऊर्जा और सही - [रक्षा सूत्र 'जनेऊ' मात्र धागा नहीं, विस्तृत में यहाँ पढ़ें-](https://www.ekumaon.com/2024/08/all-about-janeu-rules-and-importance.html): रक्षाबंधन के त्योहार को हिंदी में श्रावणी पूर्णिमा और उत्तराखंड के कुमाऊँ में इस पर्व को आम बोलचाल की भाषा में”जन्यो पुन्यू” कहा जाता है। इस दिन सभी सनातनी बंधु (जिनका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ है) उपवास रखते हुए सामूहिक पूजा अर्चना के पश्चात् जनेऊ बदलते हैं। गौतम गोत्रीय यथा तिवारी, त्रिपाठी हरतालिका तीज को जनेऊ पूजन करते हैं। आईये जानते हैं पहाड़ों में कैसे बनाई जाती हैं जनेऊ, पवित्रता के क्या नियम हैं, जनेऊ को कब और क्यों बदलना चाहिए, कैसे धारण करना चाहिए जनेऊ को। इन सब के बारे में विस्तृत में बताया है तारा पाठक जी द्वारा। Table - [घी संक्रांति: लोक मान्यतायें, महत्व और परम्परायें।](https://www.ekumaon.com/2024/08/importance-of-ghee-sankranti-with-snail.html): Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction घी संक्रांति का त्योहार उत्तराखंड के प्रमुख लोक पर्वों में से एक है। जिसे यहाँ ‘घी त्यार’, ‘ओलगिया त्यार’, ‘घी-संक्रांद’ अथवा ‘घिया संक्रांद’ के नाम से जानते हैं। मूलतः यह ऋतु पर्व है, जिसे खेती किसानी और पशुपालन से जुड़े हुए लोग बड़े उत्साहपूर्वक - [हरेला के दिन उत्तराखंड में क्यों करते हैं वृक्षारोपण ?](https://www.ekumaon.com/2024/07/why-do-we-plant-trees-on-harela-day-festival.html): उत्तराखंड में हरेला का त्यौहार ( Harela Festival) बड़े धूमधाम और हर्षोल्लाष के साथ मनाया जाता है। जिसे हर साल सावन महीने की संक्रांति के दिन ही मनाने की परम्परा है। प्रदेश के कुमाऊँ में इस दिन हरेले का पूजन होता है। इस अवसर पर भगवान शिव और उनके परिवार के डिकारे बनाकर उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही इस दिन यहाँ वृक्षारोपण करने की परम्परा है। जिसे हर परिवार द्वारा अनिवार्य रूप से करना होता है। आईये जानते हैं हरेला के दिन उत्तराखंड में वृक्षारोपण क्यों किया जाता है ? Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन - [जी रया जागी रया lyrics और इसका अर्थ।](https://www.ekumaon.com/2024/07/jee-raya-jagi-raya-lyrics-and-its-meaning.html): उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र कुमाऊँ, गढ़वाल या जौनसार के निवासी अपनी संस्कृति और परम्पराओं का निर्वहन करते हुए आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। यहाँ विभिन्न प्रकार के त्यौहार, मेले, सांस्कृतिक गतिविधियां, पूजा पद्धतियाँ पुरखों के ज़माने से चली आ रही परम्पराओं के अनुसार ही बड़े हर्षोल्लास और उमंग के साथ संपन्न की जा रही हैं। इन्हीं परम्पराओं में कुमाऊँ के पर्वतीय अंचल में ‘जी रया, जागी रया’ जैसे आशीर्वचनों से पर्व पूजन और शुभकामना प्रेषित की जाती हैं। आइये जानते हैं क्या हैं ये आशीष के शुभ वचन – Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में - [हिमशिखरों के बीच एक खूबसूरत स्थल - मां आनन्देश्वरी दुर्गा मंदिर।](https://www.ekumaon.com/2024/07/anandeshwari-durga-temple-sundardhunga-uttarakhand.html): उत्तराखंड स्थित बागेश्वर जिले के सुन्दरढूंगा ग्लेशियर रेंज में जहां सुंदर वादियां तथा ऊंचे-ऊंचे हिमशिखरों से आच्छादित पर्वतमालाएं हैं वहीं आध्यात्म के पवित्र प्रतीक इस पर्वतमाला में बसे हैं। यह पर्वतमालाएं मां आदिशक्ति मां नंदा जी को समर्पित हैं। इन पर्वतमालाओं में मां के साथ अन्य देवी-देवताओं का वास है। इन पवित्र पर्वतमालाओं में एक मुख्य स्थान है देवीकुंड, जहाँ हाल ही में कुंड के समीप ‘मां आनन्देश्वरी दुर्गा’ का भव्य मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था, दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम से बनकर तैयार हुआ है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में - [मैती आंदोलन क्या है ? पढ़िये इसकी मुख्य बातें ….](https://www.ekumaon.com/2024/07/know-the-main-points-of-maiti-movement.html): उत्तराखंड ने सदैव ही प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान किया है। उनके संरक्षण और संवर्धन में यहाँ के रहवासियों द्वारा निरंतर कार्य किये गए। जब भी उन्हें लगा कि उनके जंगलों को हानि पहुँचने वाली है तो उन्होंने पेड़ों से चिपककर उन्हें कटने से बचाया है। उनकी यही मुहिम विश्व विख्यात हुई, जो चिपको आंदोलन के नाम से जाती है। इसी से प्रेरित उत्तराखंड में एक मुहिम और है जिसे ‘मैती आंदोलन’ (Maiti Movement) के नाम से जाना जाता है।  Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक - [उत्तराखंड में कुछ दिन बिताने के लिए होमस्टे एक अच्छा विकल्प।](https://www.ekumaon.com/2024/07/home-stay-in-uttarakhand.html): पर्यटन प्रदेश उत्तराखंड में घूमने या अपने प्रवास के दौरान रहने के लिए ‘होमस्टे’ लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है। जो पर्याप्त सुविधाओं के परिपूर्ण होते हुए बेहद कम दाम में उपलब्ध रहते हैं। होमस्टे होटल जैसा ही होता है, लेकिन इसमें घर जैसा माहौल होता है। मेहमान परिवार के घर या उसके आस-पास ठहरते हैं। होमस्टे लोगों को एक प्रतिष्ठित होटल की तरह ही आरामदायक सुविधाएँ प्रदान करते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य - [Harela Festival 2025: मानव और पर्यावरण के अंतर-संबंधों का अनूठा पर्व।](https://www.ekumaon.com/2024/07/harela-unique-festival-of-inter-relationship-between-humans-and-environment.html): देवभूमि, तपोभूमि, वीरभूमि जैसे कई नामों से विभूषित सुरम्य प्रदेश उत्तराखंड अपने धार्मिक स्थलों, पर्यटक स्थलों के अलावा विशिष्ट लोक संस्कृति और परम्पराओं से पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। प्रकृति के गोद में बसे इस प्रदेश के रहवासियों ने अपनी परम्पराओं को जीवित रखते हुए सदैव प्रकृति का सम्मान किया है। उनकी परम्परायें, संस्कृति और तीज-त्यौहार प्रकृति से जुड़े हुए हैं। इन्हीं में मानव और पर्यावरण के अंतर संबंधों का अनूठा पर्व है ‘हरेला’ जो हरियाली, सम्पन्नता, पशु प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी - [स्वास्तिक पर्वत भी है उत्तराखंड में ! यहाँ दर्शन करें -](https://www.ekumaon.com/2024/06/swastik-mountain-is-also-in-uttarakhand.html): उत्तराखंड में बागेश्वर जिले के सुन्दरढूंगा घाटी स्थित देवी कुंड के सामने वाले हिम शिखर पर ॐ पर्वत की भांति बर्फ से बनी ‘स्वास्तिक’ की आकृति नजर आयी है। लोग इसे ‘स्वास्तिक पर्वत’ ( Swastik Parvat) कह रहे हैं। बर्फ से ढके पर्वत पर बर्फ के पिघलते ही यह आकृति बेहद साफ़ और स्पष्ट नजर आ रही है। वही स्वास्तिक जिसे भारतीय संस्कृति में पुराकाल से ही मंगल प्रतीक माना जाता है और किसी भी शुभ कार्य को प्रारम्भ करने से पहले स्वस्तिक को अंकित करके उसकी पूजा की जाती है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में - [उत्तराखंड कैबिनेट ने लिए महत्वपूर्ण निर्णय। यहां पढ़ें -](https://www.ekumaon.com/2024/06/uttarakhand-cabinet-took-important-decisions.html): राजधानी देहरादून में कैबिनेट की बैठक संपन्न हुई, जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टर को सेवा अवधि, पर्यटन नीति-2018 में संशोधन,  वित्त सेवा के अन्तर्गत सीधी भर्ती के माध्यम से चयनित वित्त अधिकारियों के व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम समेत विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction उत्तराखंड  कैबिनेट द्वारा लिए गए - [सामान्य ज्ञान -उत्तराखंड के प्रमुख व्यक्तियों के उपनाम](https://www.ekumaon.com/2024/06/nicknames-of-prominent-personalities-of-uttarakhand.html): सामान्य ज्ञान:  उत्तराखंड की धरती ने ऐसे अनेक विभूतियों को जन्म दिया है, जो अपनी उपलब्धियों से प्रसिद्ध हैं। लोगों ने उन्हें उनके उपनामों ने विभूषित किया है। यहाँ हम उत्तराखंड के प्रमुख विभूतियों के उपनाम दे रहे हैं जिनके बारे में यहाँ के विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है – Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket - [गढ़वाल के 52 गढ़, जिनके एकीकरण के बाद 'गढ़वाल' नाम का जन्म हुआ।](https://www.ekumaon.com/2024/06/52-garh-of-garhwal.html): उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र कभी 52 गढ़ों और वीर भड़ों के देश के रूप में जाना जाता था। जिसका जिक्र बड़े शान से आज भी यहाँ के लोगों में, लोक गीतों में होता है। यहाँ तब 52 राजाओं के 52 इलाकों में स्वतंत्र अलग-अलग राज्य थे। इतिहास में उल्लेख है कि इन राजाओं के बीच आपस में लड़ाई चलती रहती थी। माना जाता है कि नौवीं शताब्दी लगभग 250 वर्षों तक इन गढ़ों की स्थिति बनी रही लेकिन बाद में इनके बीच आपसी लड़ाई का पँवार वंश के राजाओं ने लाभ उठाया और 15वीं सदी तक इन गढ़ों के राजा - [गासेरा-ऐसा धान का खेत जिसमें हर वर्ष बिना बोये ही पौधे उग आते हैं।](https://www.ekumaon.com/2024/06/gasera-kuti-village-rice-field-intresting-information.html): उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश जाने वाले मार्ग पर पड़ने वाले राज्य के सुदूरवर्ती गांव कुटी में हर साल धान का खेत लहलहा उठता है, लेकिन आपको यह जानकार हैरानी होगी कि धान के इन पौधों में बीज (दाने) नहीं लगते। नवंबर आते-आते धान का यह खेत खुद ही समाप्त हो जाएगा। बताते हैं कि जब पांडवों ने इस क्षेत्र में प्रवास किया था तब कुटी गांव में कुंती के लिए कुटिया बनाई थी। करीब एक वर्ष तक पांडव इस इलाके में रहे। तब उन्होंने खेत भी तैयार किए थे। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 - [Nain Singh Rawat : 13 हजार मील की पैदल दूरी तय कर तैयार किया था कालजयी मानचित्र।](https://www.ekumaon.com/2024/05/nain-singh-rawat-great-explorer-surveyor-and-cartographer.html): पंडित नैन सिंह रावत की गिनती उन भारतीयों में की जाती है जिन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा से अंग्रेजों को अपना कायल बना दिया था। पढ़े लिखे न होने के बावजूद पंडित नैन सिंह रावत  (Nain Singh Rawat) अंग्रेजों की नजरों में किसी शिक्षाविद् से कम न थे। अपनी अद्भुत इच्छाशक्ति के दम पर 19वीं शताब्दी के इस महान अन्वेषक ने पैदल 13 हजार मील से अधिक दूरी तय कर मध्य एशिया का कालजयी मानचित्र तैयार किया था। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी - [कुमाउनी लोक कथा : सास-ब्वारी खेत।](https://www.ekumaon.com/2024/05/kumaoni-folk-tale-saas-bwari-khet.html): उत्तराखंड की लोककथायें, जिन्हें हम “कुमाऊंनी और गढ़वाली लोक कथायें” भी कहते हैं, यहाँ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रमुख हिस्से हैं। यहाँ ये कथायें पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से प्रसारित होती रही हैं। इन्हीं में ‘सास-ब्वारी खेत’ के नाम से एक लोक कथा प्रचलित है, जिसका सम्बन्ध बागेश्वर के समीप बिलौना सेरा से है। सरयू नदी के किनारे बिलौना के लम्बे-चौड़े समतल खेत पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं। यहाँ के खेतों के मध्य एक खेत को ‘सास- ब्वारी गड़’ यानि सास-ब्वारी खेत कहा जाता है। जिसके सम्बन्ध में एक मार्मिक लोककथा प्रचलित है।   Table of Contents Toggle जहाँ हर - [नरु-बिजुला की 600 साल पुरानी अद्भुत प्रेम कहानी।](https://www.ekumaon.com/2024/05/naru-bijula-story.html): Naru Bijula Story : पहली नजर का प्यार, इकरार, प्यार को पाने की कोशिश, दो इलाकों की परंपरागत दुश्मनी, रार और फिर प्यार करने वालों की जीत, यानी हर वो मसाला इस कहानी में है, जो बालीवुड फिल्मों के लिए अनिवार्य माना जाता है। अंतर है तो सिर्फ इतना कि बालीवुड में बनने वाली फिल्में काल्पनिक कहानियों पर आधारित होती हैं, जबकि यह एक सच्ची कहानी है। बात हो रही है उत्तरकाशी के दो भाइयों ‘नरु और बिजुला’ की। इन दोनों ने आज से करीब छह सौ साल पहले प्यार की खातिर कुछ ऐसा किया, जो प्रेम डगर पर पग - [यूट्यूब की ट्रेंडिंग सूची में कुमाऊंनी गीत-Sonchadi](https://www.ekumaon.com/2024/05/sonchadi-coke-studio-is-trending-today.html): यूट्यूब की ट्रेंडिंग सूची में इन दिनों एक कुमाऊंनी गीत ‘Sonchadi’ यानि ‘सुनचड़ी’ ट्रेंड कर रहा है। जिसे कोक स्टूडियो भारत  (Coke Studio India) के सीजन-2 में उत्तराखंड की लोक गायिका कमला देवी, बॉलीवुड गायिका नेहा कक्कड़ और नैनीताल के दिग्विजय सिंह परियार ने गाया है। इस गीत के मुखड़े मुनस्यारी के लवराज ने लिखे हैं। दो दिन से यह पहाड़ी गीत यूट्यूब की दैनिक ट्रेंडिंग सूची में बना हुआ है। जिसे 48 घंटे में करीब 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। कोक स्टूडियो भारत द्वारा उत्तराखंड के कुमाऊंनी संगीत को नए कलेवर के साथ प्रस्तुत किया - [काफल : औषधीय गुणों की खान है पहाड़ का यह फल।](https://www.ekumaon.com/2024/05/kafal-fruit-rich-in-medicinal-properties.html): Kafal Fruit : गर्मी के मौसम में मैदानी इलाकों में जहाँ आम के फल का स्वाद लोगों की जुबां पर रहता है वहीं पहाड़ी इलाकों में एक फल हर किसी को अपने स्वाद के कारण अपनी ओर आकर्षित करता है, वह है ‘काफल’ ।अपने में कई औषधीय गुणों को समेटे काफल का फल हिमालयी राज्य उत्तराखंड, हिमाचल के सामान्य ठंडी और छायादार वाले पर्वतीय इलाकों में मई और जून माह के मध्य पकता है। आईये जानते हैं विभिन्न पोषक तत्वों से परिपूर्ण पहाड़ों के इस अमृत फल के बारे में – Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में - [पंछी उड़ी जानी - जीवन की वास्तविकता को बताता है यह गीत](https://www.ekumaon.com/2024/04/panchi-udi-jani-lyrics-with-description.html): कुमाऊँ के संगीत के मजबूत हस्ताक्षर प्रह्लाद सिंह मेहरा भले ही अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन वे अपने संगीत की ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जिसे पूरा उत्तराखंड सदियों तक गुनगुनाता रहेगा। पहाड़ों में होने वाली रामलीला के मंच से अपने संगीत के सफर की शुरुवात करने वाले प्रह्लाद मेहरा ने अनगिनत ऐसे गीत गाये हैं जिसमें उन्होंने पहाड़ की वास्तविकता को संगीत के माध्यम से सभी लोगों तक पहुँचाया है। जिनमें पहाड़ की बेटी-ब्वारियों के कष्टमय जीवन, रोजगार के लिए शहरों में संघर्ष करते युवाओं के दर्द को बयां करते गीत हैं। वहीं सामाजिक चेतना को जाग्रत करते - [उत्तराखंड में बैशाखी के त्यौहार को मनाने की विशेष परम्परा।](https://www.ekumaon.com/2024/04/baishakhi-festival-in-uttarakhand.html): Baishakhi Festival in Uttarakhand: बैसाखी भारत के सभी राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाई जाती है। उत्तराखंड में बैसाखी “बिखौती” के नाम से जानी जाती है। यहाँ हर एक संक्रांति को कोई मेला या त्यौहार आयोजित होता है। बैसाख के महीने की संक्रांति को ‘विषुवत संक्रांति’ (Vishuvat Sankranti) के नाम से जाना जाता है। इस दिन कुमाऊं में स्याल्दे बिखोती का मेला लगता है। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का - [रम्माण उत्सव - उत्तराखंड का एक अनुष्ठानिक रंगमंच।](https://www.ekumaon.com/2024/04/ramman-festival-of-uttarakhand.html): Ramman Festival Uttarakhand : रम्माण उत्तराखंड के चमोली जिले में मनाया जाने वाले वाला एक लोक उत्सव है जो हर वर्ष वैशाख (अप्रैल) माह में 11 से 13 दिन तक आयोजित होता है। इस उत्सव में कलाकार ढोल, दमाऊं और रणसिंघ जैसे पारम्परिक वाद्यों की धुनों पर मुखौटा पहनकर रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन करते हैं। जिनमें राम-लक्ष्मण जन्म, राम-लक्ष्मण का जनकपुरी में भ्रमण, सीता स्वयंबर, राम वनवास, स्वर्णमृग वध, सीता हरण, हनुमान मिलन, लंका दहन तथा राजतिलक प्रमुख हैं। इन सभी प्रस्तुतियों में कोई संवाद नहीं होता है बल्कि ढोल के तालों में नृत्य के भावों की अभिव्यक्ति - [अपने गीतों से सदैव अमर रहेंगे प्रहलाद मेहरा।](https://www.ekumaon.com/2024/04/prahlad-singh-mehra-will-always-remain-immortal-through-his-songs.html): उत्तराखंड के लोकप्रिय लोक गायक प्रहलाद सिंह मेहरा का हृदयगति रुकने से निधन हो गया है। उनके आकस्मिक निधन से उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। अपने लोक गीतों से पहाड़ के संगीत को नया जीवन देने वाले श्री मेहरा के यूँ चले जाने से उत्तराखंड के संगीत जगत को एक अपूरणीय क्षति हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार लोकगायक प्रहलाद मेहरा को बुधवार को हार्ट अटैक आया और हल्द्वानी के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। वहीं उन्होंने अंतिम साँस ली। उनके यूँ ही अचानक चले जाने से उनके प्रशंसक स्तब्ध हैं। Table of Contents Toggle जहाँ - [देवी के डोले : आण-बाण के साथ एजेंडी देवता - 1940 के दशक का एक वृत्तांत।](https://www.ekumaon.com/2024/04/story-devi-ke-dole-agendi-devta-with-aan-baan.html): कुमाऊं के तत्कालीन अल्मोड़ा जिले का एक गांव जहां एक गरीब ब्राह्मण परिवार रहता है। परिवार में घर का मुखिया, उसकी पत्नी एवं 6-7 बच्चे (जिनकी उम्र 2 साल से 16 वर्ष) घर के मुखिया की आय का मुख्य साधन बिरति(वृति*) है। परिवार के पास खेत खलिहान एवं मवेशियों के स्थिति अच्छी है, जिस वजह से अनाज एवं धिनाली* की कोई कमी नहीं है। आषाढ़ का महीना है और गायों को खुरपाक* रोग लगा हुआ है जिससे उन्हें रात को गोठ* में ना बांधकर, बाहर ही खुले में बांध रहे है। आज परिवार के मुखिया को कहीं दूर एक गांव - [उत्तराखंड के रोचक कहावतें और मुहावरे।](https://www.ekumaon.com/2024/04/kumaoni-proverbs-and-idioms.html): कुमाऊंनी भाषा कितनी समृद्ध है इसका अंदाजा यहाँ के कहावतों और मुहावरों से भी लगाया जा सकता है। ये कहावतें ऐसी हैं जो हमारे पुरखों से लेकर आज तक हम सभी अपनी सामान्य बोलचाल में प्रयोग करते आ रहे हैं। इनका भाव हमारे समाज को एक दिशा देते रहा है। ये कहावतें और मुहावरे यहाँ की संस्कृति, परम्परा, कृषि, मौसम, मानवीय व्यवहार आदि पर आधारित हैं। लेकिन बदलते युग में हमारी भाषा ये शब्द कहीं खो से गए हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट - [Devi Bhagwati Maiya Lyrics | देवी भगवती मैया भजन के बोल](https://www.ekumaon.com/2024/04/devi-bhagwati-maiya-lyrics.html): देवी भगवती मैया, कोटगाड़ी की देवी मैया (Devi Bhagwati Maiya) माँ दुर्गा को समर्पित एक कुमाऊंनी भजन है, जिसे स्वर्गीय पप्पू कार्की ने गाया है और लिरिक्स भी उनके द्वारा ही लिखे गए हैं। इस भजन में उत्तराखंड के पांखुं (पिथौरागढ़)  स्थित माँ कोटगाड़ी देवी को दैंण होने, सुफल होने की प्रार्थना की गई है। माता कोटगाड़ी को उत्तराखंड में न्याय की देवी के रूप में पूजते हैं। न्याय की चाह में लोग देवी के द्वार आते हैं और यहाँ अपने कोर्ट -कचहरी के कागजों को यहाँ छोड़कर जाते हैं। देवी उनका त्वरित न्याय करती हैं। वहीं कुंडली मिलान न हो - [Chaitra Navratri : मन, वचन और कर्म से शुद्ध होकर घर में नवरात्रि कैसे मनायें ?](https://www.ekumaon.com/2024/04/how-to-celebrate-navratri-at-home.html):   Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction नवरात्रि का पर्व सनातन धर्म के प्रमुख अनुष्ठानों में से एक हैं। इस दौरान लोग उपवास रखकर नौ दुर्गा की आराधना करते हैं। भारत में नवरात्रि का पर्व अत्यधिक उत्साह के साथ मनाते हैं। यहाँ वर्ष में चार नवरात्रों का वर्णन मिलता है। - [मुनस्यारी के दर्शनीय स्थल और पर्यटन विभाग से प्रशिक्षित गाइड।](https://www.ekumaon.com/2024/03/sightseeing-places-in-munsiyari-and-guide.html): मुनस्यारी (Munsyari) जोहार परगने का मुख्य स्थल, सुदूर जनपद पिथौरागढ़ का अंतिम तहसील जिसकी उत्तरी सीमा महान हिमालय भारत-तिब्बत (चीन) से लगा भू-भाग है और समुद्रतल से ऊंचाई 2290 मीटर एवं दक्षिण गोरी नदी से के तट से 2400 मीटर है। प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर रमणीक हिमालयी क्षेत्र यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक सामने पंचाचूली हिमपर्वत के मनमोहक दृश्यावलोकन से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी - [पूर्णागिरि धाम: हिमालय की गोद में बसा एक प्रमुख शक्तिपीठ।](https://www.ekumaon.com/2024/03/purnagiri-dham-a-major-shaktipeeth-situated-in-the-lap-of-himalayas.html): Maa Purnagiri   Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction पूर्णागिरी धाम, उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित एक आस्था और शक्ति का प्रमुख केंद्र है। यह देवी पूर्णागिरि को समर्पित 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह धाम अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। मान्यता ## Pages - [अस्वीकरण (Disclaimer)](https://www.ekumaon.com/disclaimer): Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction अंतिम अपडेट: 2 नवम्बर 2025 | संपर्क: ekumaon18@gmail.com यह पृष्ठ ई-कुमाऊँ डॉट कॉम  (https://www.ekumaon.com) पर प्रकाशित जानकारी के उपयोग से संबंधित शर्तों और सीमाओं को स्पष्ट करता है। कृपया इसे ध्यानपूर्वक पढ़ें। 1. जानकारी की प्रकृति और सत्यता हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध सभी सामग्री - [Privacy Policy](https://www.ekumaon.com/privacy-policy): Who we are Suggested text: Our website address is: https://www.ekumaon.com. Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction Comments Suggested text: When visitors leave comments on the site we collect the data shown in the comments form, and also the visitor’s IP address and browser user agent string to help spam detection. - [About Us](https://www.ekumaon.com/about-us): eKumaon.com, उत्तराखंड को समर्पित एक ऑनलाइन समाचार एवं  ब्लॉग वेबसाइट है। जो इंटरनेट के माध्यम से अपने उत्तराखण्ड कुमाऊँ-गढ़वाल के सम-सामयिक समाचारों, देव-देवालयों, संस्कृति, सभ्यता, कला, संगीत, अविदित पर्यटक स्थलों, लोक कथाओं, ज्वलन्त मुद्दों आदि को आप सभी के सामने रखने का एक छोटा सा प्रयास है। ताकि हम अपनी जड़ों से जुड़े रहें। Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket - [नए पोस्ट](https://www.ekumaon.com/latest-news) - [Home](https://www.ekumaon.com/): लोकपर्व See All Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction समाचार विशेष See All लोककथायें See All धार्मिक स्थल See All साहित्य See All पर्यटन See All व्यक्तित्व See All प्रार्थना See All - [Contact us](https://www.ekumaon.com/contact-us): विनोद सिंह  Table of Contents Toggle जहाँ हर 15 दिन में अपना रंग बदलती है घाटीघाटी में खिलते हैं ये प्रमुख फूलवैश्विक धरोहरइतिहासमार्गरेट लैगी: घाटी की चिरनिद्रा में चली गई वैज्ञानिकवन्य जीवन और जैव विविधताफूलों की घाटी का महत्वबीते वर्षों में पर्यटन का ग्राफप्रवेश शुल्क विवरण (Valley of Flowers Ticket Price)कब और कैसे पहुंचे?कैसे पहुंचे:रहने की व्यवस्था-Get Direction पता : ग्राम- पोथिंग, डाकघर- पोथिंग, तहसील-कपकोट, जनपद-बागेश्वर-263632 फ़ोन : 9411117737  ईमेल : vsgariya@gmail.com | ekumaon18@gmail.com नीचे दिए गए बॉक्स के माध्यम से अपने सन्देश भेज सकते हैं। किसी भी समस्या और सुझाव के लिए निःसंकोच संपर्क कर सकते हैं – ## Optional - [Agent (MCP protocol)](websites-agents.hostinger.com/www.ekumaon.com/mcp) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)