Skimmia Laureola नैर

Skimmia Laureola उत्तराखण्ड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाया जाने वाला एक झाड़ीनुमा औषधीय पौधा है। जिसे उत्तराखण्ड में 'नैर' के नाम से जाना जाता है। इस औषधीय पौधे की खुशबूदार पत्तियों का उपयोग उत्तराखण्ड में देवी-देवताओं की पूजा में 'धूप' के रूप में किया जाता है। नैर के पत्तों को जंगल से लाकर घर के अन्दर ही सुखाया जाता है। जब ये पत्तियां सूख जाती हैं तब इन पत्तियों का चूरा बनाकर थोड़ा सा गाय/भैंस का घी मिलाया जाता है और यह धूप तैयार हो जाता है। इस धूप को जलते कोयले पर डाला जाता है और यह सुगन्धित धुआँ देता हुआ जलता है। कहते हैं नैर के पत्तों का धूप जलाने से वातावरण शुद्ध रहता है। नैर की पत्तियों का उपयोग पेट दर्द, पेचिश, उल्टी जैसे विभिन्न पेट की समस्याओं के लिए भी किया जाता है। नैर की पत्तियों का तेल का उपयोग जीवाणुरोधी गतिविधियों में भी किया जाने लगा है।
लेकिन बहु-उपयोगी नैर आज अत्यधिक दोहन के कारण विलुप्त होने की कगार पर है। हमें और सरकार को भी नैर के संरक्षण में आवश्यक कदम उठाने होंगे ताकि हम भविष्य में नैर की खुशबु से अपने देवों को प्रसन्न और अपने पर्यावरण को शुद्ध कर सकें।

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